Expose Now Exclusive: टॉपरों की ‘मंडी’ पर सरकारी सर्जिकल स्ट्राइक! मोशन एजुकेशन और CLC के ‘झूठे दावों’ की खुली पोल, लगा लाखों का जुर्माना

जयपुर। आईआईटी-जेईई (IIT-JEE) और नीट (NEET) की तैयारी कराने वाले देश के बड़े कोचिंग संस्थानों द्वारा रिजल्ट चमकाने के लिए फैलाए जा रहे ‘झूठ के जाल’ पर केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा प्रहार किया है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार प्रथाओं (Unfair Trade Practices) के खिलाफ देशव्यापी कार्रवाई करते हुए अब तक 60 से अधिक नोटिस जारी किए हैं और 31 कोचिंग संस्थानों पर 1.39 करोड़ रुपए से ज्यादा का जुर्माना लगाया है।

इसी कड़ी में मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्र की अध्यक्षता वाले CCPA ने राजस्थान के दो नामचीन कोचिंग संस्थानों— कोटा के मोशन एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड पर 10 लाख रुपए और सीकर के करियर लाइन कोचिंग (CLC) पर 5 लाख रुपए का भारी-भरकम जुर्माना ठोकते हुए अंतिम आदेश पारित कर दिया है।

महानिदेशक (जांच) द्वारा की गई गहन पड़ताल में इन दोनों संस्थानों के दावों के जो खोखले राज खुले हैं, वे देश के लाखों छात्रों और अभिभावकों की आंखें खोलने वाले हैं।

‘मोशन है तो सिलेक्शन है’ के नारे की खुली पोल:-

कोटा की मोशन एजुकेशन ने अपनी वेबसाइट, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और अखबारों में छाए विज्ञापनों में बढ़-चढ़कर निम्नलिखित दावे किए थे:

-दावा 1: जेईई एडवांस्ड परिणाम 2025 में उत्तीर्ण छात्रों का प्रतिशत 51.02% (3231/6332) रहा।

-दावा 2: जेईई (मुख्य परीक्षा) में 65.8 प्रतिशत (6930/10532) छात्र सफल रहे।

-दावा 3: नीट परिणाम 2025 में 91.2% (6972/7645) छात्र उत्तीर्ण हुए।

-दावा 4: नीट 2025 के शीर्ष 500 AIR (सामान्य और ओबीसी) में 19 छात्र और 7 छात्र 100 से कम रैंक वाले हमारे हैं।

जांच में क्या हुआ भंडाफोड़?

-कोर्स की जानकारी छिपाई: मोशन एजुकेशन ने सफल छात्रों की तस्वीरें तो चमका दीं और विज्ञापन अपने पेड कोर्सेज (जैसे पूर्णकालिक कक्षा कार्यक्रम, आवासीय कार्यक्रम, नर्चर बैच, एंथ्यूज बैच और ड्रॉपर/लीडर बैच) का किया। लेकिन असलियत यह थी कि अधिकांश छात्र इनके “आई-एकलव्य (ऑनलाइन)” पाठ्यक्रम से थे, जो एक मुफ्त रैंकर्स बैच है। इस महत्वपूर्ण जानकारी को जानबूझकर छिपाया गया।

-परीक्षा के बाद दाखिला व बिना सहमति फोटो: जांच में सामने आया कि संस्थान ने परीक्षा संपन्न होने के बाद दाखिला लेने वाले कुछ छात्रों के नाम और तस्वीरों का भी इस्तेमाल कर सफलता का झूठा श्रेय ले लिया। इसके अलावा, छात्रों या उनके अभिभावकों की कोई उचित सहमति (Consent) भी नहीं ली गई थी।

करियर लाइन कोचिंग (CLC, सीकर): आंकड़ों की बाजीगरी और विरोधाभासी बयान:-

सीकर स्थित CLC कोचिंग द्वारा अपनी वेबसाइट और समाचार पत्रों में बड़े-बड़े दावे किए जा रहे थे:

-दावा 1: “एमबीबीएस, आईआईटी और अन्य संस्थानों में 1650 से अधिक सीएलसी छात्र।”

-दावा 2: “नीट में ऑल इंडिया रैंक-100 में 2 सीएलसी छात्र।”

-दावा 3: “3 सीएलसी छात्र दिल्ली के एम्स में।”

-दावा 4: “6 सीएलसी छात्रों ने 720 में से 710 से अधिक अंक प्राप्त किए।”

“ऑल इंडिया रैंक-1000 में परिणामों में 7 गुना वृद्धि” और “सीकर में पिछले वर्ष में सर्वश्रेष्ठ…” जैसे भ्रामक दावे।

जांच में क्या हुआ भंडाफोड़?

-सिर्फ टेस्ट सीरीज वाले बच्चों को बताया अपना: महानिदेशक की जांच में साबित हुआ कि जिन छात्रों के नाम और फोटो विज्ञापनों में थे, वे केवल ‘परीक्षा श्रृंखला पाठ्यक्रम’ (Test Series) में नामांकित थे। इस सच को विज्ञापन में छुपाया गया ताकि लोग उन्हें रेगुलर क्लासरूम का छात्र समझें।

-झूठ पकड़ने पर खुद उलझा CLC: जब CCPA ने “1650 से अधिक छात्रों” के दावे पर सबूत मांगा, तो CLC ने लिखित बयान में कहा कि यह आंकड़ा साल 1996 से अब तक का (Cumulative Selection) है। जबकि सुनवाई के दौरान उन्होंने कह दिया कि यह सिर्फ वर्ष 2024 का है। प्राधिकरण ने माना कि इस तरह के विरोधाभासी बयानों से साफ है कि इनके दावे पूरी तरह निराधार और भ्रामक हैं।

नियमों की धज्जियां उड़ाईं, आदेश को दी चुनौती:-

CCPA ने पाया कि बार-बार अवसर और दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जाने के बावजूद दोनों ही संस्थान अपने विज्ञापनों में किए गए दावों को साबित करने में पूरी तरह विफल रहे। दोनों संस्थान परिणाम घोषित होने के बाद सफल उम्मीदवारों से लिखित सहमति प्राप्त करने का दस्तावेजी साक्ष्य भी नहीं दे पाए, जो ‘कोचिंग क्षेत्र में भ्रामक विज्ञापन की रोकथाम के लिए दिशानिर्देश, 2024’ के तहत अनिवार्य है। प्राधिकरण ने दोनों को तत्काल प्रभाव से ये भ्रामक विज्ञापन बंद करने और भविष्य में सत्य व पूर्ण जानकारी (जैसे छात्र ने फुल-टाइम कोर्स किया था, ऑनलाइन किया था, या सिर्फ टेस्ट सीरीज ली थी) देने का निर्देश दिया है।

-ताजा अपडेट: कार्रवाई से बचने के लिए दोनों संस्थानों ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) के समक्ष अपील दायर करके CCPA के इन आदेशों को चुनौती दी है।

Expose Now का नज़रिया, शिक्षा के नाम पर ‘भ्रम का व्यापार’ बंद हो:-

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत हर उपभोक्ता (और छात्र) को सत्य और सटीक जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है ताकि वे सोच-समझकर निर्णय ले सकें। कोचिंग संस्थान भ्रामक विज्ञापनों के जरिए इस अधिकार का गला घोंटते हैं। देश का युवा और उनके माता-पिता अपनी गाढ़ी कमाई, समय और उम्मीदें इन संस्थानों में झोंक देते हैं, और बदले में उन्हें मिलती है आंकड़ों की बाजीगरी। पहले टेस्ट सीरीज़ के नाम पर टॉपर्स को अपने पाले में करो, फिर करोड़ों के विज्ञापनों में उनकी फोटो छापकर नए मासूमों को फंसाओ— सफलता के इस गंदे घालमेल पर लगा यह जुर्माना स्वागत योग्य है।

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