जयपुर। राजस्थान के प्रशासनिक महकमे में जलदाय विभाग (PHED) के जल जीवन मिशन घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की लंबी विधिक कार्रवाई के बाद अब सूबे के ऊर्जा विभाग में ईडी की धमाकेदार एंट्री हुई है। इस बड़ी विधिक कार्रवाई ने समूचे बिजली तंत्र और सचिवालय के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है और पूरे सिस्टम के फ्यूज उड़ा दिए हैं। प्रवर्तन निदेशालय की जयपुर विंग ने एक कड़ा विधिक रुख अपनाते हुए जयपुर डिस्कॉम (Jaipur Discom) प्रशासन से पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए करोड़ों रुपये कीमत के दो सबसे बड़े विवादित टेंडरों की मूल फाइलें, वित्तीय दस्तावेज और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड्स तुरंत प्रभाव से तलब कर लिए हैं। इसके साथ ही, ईडी ने इस पूरे वित्तीय महा-घपले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा अब तक दर्ज किए गए मुकदमों और की गई विधिक कार्रवाई की वर्तमान वस्तुस्थिति (Status Report) भी मांगी है।
जयपुर डिस्कॉम के अधीक्षण अभियंता (TW) के दफ्तर में पहुंचे ईडी के इस नोटिस ने डिस्कॉम के आला अफसरों और नामचीन टेक्नोक्रेट्स को सकते में डाल दिया है।
खेल नंबर 1: बूट मॉडल पर जीएसएस निर्माण में 246% अधिक रेट का खेल
जयपुर डिस्कॉम के करोड़ों रुपये के विवादित टेंडर अब पूरी तरह से केंद्रीय जांच एजेंसी के रडार पर हैं। डिस्कॉम प्रशासन द्वारा आंतरिक स्तर पर करवाई गई चार अलग-अलग जांचों में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं (Financial Irregularities) पकड़ी गई थीं। इनमें सबसे सर्वाधिक गंभीर मामला बूट (BOOT – Build Own Operate Transfer) मॉडल पर 33/11 केवी जीएसएस (GSS) निर्माण के टेंडर को माना गया था।
- बगैर वित्तीय प्रावधान टेंडर: विधिक जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि तत्कालीन अधिकारियों ने बिना किसी बजटीय और वित्तीय प्रावधानों के ही इस महा-टेंडर को फाइनल कर दिया।
- 246% अधिक रेट पर मेहरबानी: सबसे चौंकाने वाला विधिक तथ्य यह सामने आया कि यह काम ‘आरसी एंटरप्राइजेज’ नामक फर्म को बाजार दर से सीधे 246 प्रतिशत अधिक रेट पर सौंप दिया गया।
- दोहरा रवैया: आश्चर्य की बात यह रही कि एक तरफ डिस्कॉम ने इस घपले की जांच के लिए कमेटी बनाई, तो दूसरी तरफ फर्म को ग्राउंड पर काम करने से विधिक रूप से नहीं रोका। नतीजा यह हुआ कि जब तक एक साल बाद जांच रिपोर्ट पर कोई विधिक कार्रवाई शुरू हो पाती, तब तक चतुर फर्म ने 42 जीएसएस निर्माण का काम काफी हद तक पूरा कर लिया था और करोड़ों का बिल उठा लिया था।
बाद में मामला बिगड़ने पर डिस्कॉम ने करीब ₹500 करोड़ के इस विवादित कॉन्ट्रैक्ट को ‘टर्मिनेट’ (निरस्त) करने के साथ ही तत्कालीन प्रबंध निदेशक (MD) सहित अन्य टेक्नोक्रेट्स के खिलाफ एसीबी में विधिक मुकदमा दर्ज कराया था। वर्तमान में यह विवाद कोर्ट में विचाराधीन है।
खेल नंबर 2: फर्जी दस्तावेज लगाने वाली एबी एंटरप्राइजेज की ईएमडी रिफंड का सच
ईडी की नजर केवल आरसी एंटरप्राइजेज तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूर्ववर्ती सरकार के समय टेंडर नंबर TN 534 और TN 535 में सामने आए ‘एबी एंटरप्राइजेज’ के प्रकरण में भी गहरा विधिक रिकॉर्ड तलब किया गया है।
इस प्रकरण में आरोप है कि एबी एंटरप्राइजेज ने टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने के लिए पूरी तरह से फर्जी और कूटरचित दस्तावेज (Forged Documents) पेश किए थे। विधिक नियमानुसार फर्जी दस्तावेज लगाने वाली फर्म की धरोहर राशि (EMD) को राजसात (जब्त) कर फर्म को ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए था, लेकिन डिस्कॉम के तत्कालीन आला अफसरों ने नियमों को ताक पर रखकर फर्म पर विशेष मेहरबानी दिखाई और ₹3.26 करोड़ की भारी-भरकम धरोहर राशि चुपचाप वापस लौटा दी (Refund)। इस मामले में विधिक जांच के बाद तत्कालीन वित्तीय निदेशक, जोनल चीफ इंजीनियर, एसीई (MM), एसीई (PPM) व संबंधित अधीक्षण अभियंता (SE) को चार्जशीट जारी करने के साथ ही फर्म के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के विधिक निर्देश दिए गए थे।
ईडी ने डिस्कॉम से ‘आधिकारिक वारंट’ के तहत तलब किए ये 8 महत्वपूर्ण दस्तावेज
प्रवर्तन निदेशालय की मनी लॉन्ड्रिंग विंग ने जयपुर डिस्कॉम को नोटिस थमाकर निम्नलिखित विधिक फाइलों की प्रमाणित प्रतियां तुरंत जांच टेबल पर पेश करने की कड़क डेडलाइन दी है:
- टेंडर डॉक्यूमेंट्स: टेंडर संख्या 534, 535, 545 और 546 के मूल और स्वीकृत टेंडर दस्तावेज।
- फर्म के कागजात: एबी एंटरप्राइजेज की तरफ से टेंडर में तकनीकी और वित्तीय विडिंग के लिए पेश किए गए सभी दस्तावेजों की कॉपी।
- शिकायत की प्रति: एबी एंटरप्राइजेज के फर्जीवाड़े के खिलाफ डिस्कॉम प्रशासन को मिली मूल विधिक शिकायतों की फाइल।
- TCIL का पत्र: टेलीकम्युनिकेशंस कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (TCIL) की तरफ से डिस्कॉम को मिले पत्र की प्रमाणित विधिक प्रति।
- कमेटी की मिनट्स: 8 फरवरी और 15 मार्च 2023 को आयोजित हुई उच्च स्तरीय कॉरपोरेट लेवल परचेज कमेटी (CLPC) की मीटिंग मिनट्स की कॉपियां।
- रिफंड की कड़ियां: एबी एंटरप्राइजेज को ₹3.26 करोड़ की राशि किस विधिक नियम के तहत और किन अधिकारियों के हस्ताक्षर से रिफंड की गई, उसकी पूरी बैंक डिटेल।
- आरसी एंटरप्राइजेज की फाइल: आरसी एंटरप्राइजेज को जारी जीएसएस निर्माण टेंडर की शुरुआत से लेकर निरस्तीकरण तक की संपूर्ण विधिक जानकारी।
- जांच रिपोर्ट: आरसी एंटरप्राइजेज प्रकरण में डिस्कॉम की आंतरिक विजिलेंस टीम द्वारा तैयार की गई विस्तृत जांच रिपोर्ट और उस पर की गई प्रशासनिक कार्रवाई का पूरा काला चिट्ठा।
विपक्ष और राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन फाइलों के ईडी के हाथ में जाते ही बिजली कंपनियों के कई पूर्व और वर्तमान रसूखदार सफेदपोशों और बड़े इंजीनियरों की गिरफ्तारियां होना विधिक रूप से लगभग तय है।