करौली में 33 लाख के कथित गबन और 181 के विरोधाभासी जवाब पर गरमाई सियासत, आखिर कार्रवाई पर किसका ब्रेक?

करौली : चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में कथित 33 लाख रुपए के गबन और वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब नए सवालों के साथ और गंभीर होता जा रहा है। Expose Now News में 13 अगस्त 2026 को प्रकाशित खबर “आरोप गंभीर, कार्रवाई गायब—33 लाख के कथित गबन मामले में चिकित्सा विभाग की भूमिका पर सवाल” के बाद विभागीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है।

मामले में प्रमुख शासन सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के निर्देशों की पालना में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) करौली डॉ. सतीश चन्द मीना ने निदेशक (जन स्वास्थ्य), चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं राजस्थान, जयपुर को तथ्यात्मक रिपोर्ट भेज दी है। लेकिन अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब CMHO कार्यालय की तथ्यात्मक रिपोर्ट निदेशालय पहुंच चुकी है और विभागीय स्तर पर जांच एवं आक्षेपों का उल्लेख है, तो संबंधित मामले में कार्रवाई अब तक क्यों लंबित है?

आंतरिक जांच में आक्षेप, रिपोर्ट निदेशालय पहुंची

तथ्यात्मक रिपोर्ट के अनुसार, कार्यालय खण्ड मुख्य चिकित्सा अधिकारी गुढाचन्द्रजी के वर्ष 04/2019 से 03/2025 तक के आंतरिक जांच प्रतिवेदन के अनुच्छेद संख्या 4 भाग-2(ब) में खबर से संबंधित आक्षेप गठित किया गया है।

मामले में डॉ. जगराम मीना, कनिष्ठ विशेषज्ञ (दंत) से संबंधित कथित वित्तीय अनियमितताओं की कार्यालय स्तर पर जांच कराई गई थी और जांच रिपोर्ट पूर्व में ही निदेशालय को भेजे जाने का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आंतरिक जांच में सामने आए आक्षेपों पर ठोस अनुपालना और साक्ष्यों सहित रिपोर्ट भेजने के लिए खण्ड मुख्य चिकित्सा अधिकारी गुढाचन्द्रजी को पत्र लिखा गया, लेकिन पालना रिपोर्ट अब तक अप्राप्त बताई गई है। सवाल साफ है—जांच हुई, आक्षेप बने, रिपोर्ट भेजी गई… फिर कार्रवाई कहां है?

आचार संहिता उल्लंघन और BCMO की भूमिका पर सवाल

मामले का एक अन्य गंभीर पहलू नगर निकाय चुनाव की आचार संहिता उल्लंघन से जुड़ा हुआ है। बताया गया है कि जिला निर्वाचन विभाग की जांच में डॉ. जगराम मीना को आचार संहिता उल्लंघन के मामले में आरोपी मानते हुए नोटिस जारी किए गए थे। अब नगर निकाय चुनाव की आदर्श आचार संहिता भी लागू हो चुकी है।

ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब निर्वाचन विभाग की जांच और नोटिस की प्रक्रिया हो चुकी है, तो संबंधित मामले में आगे की कार्रवाई क्यों नहीं हुई? आचार संहिता उल्लंघन के मामले की जानकारी निर्वाचन तंत्र और चिकित्सा विभाग के उच्च अधिकारियों तक होने के बावजूद कार्रवाई लंबित रहने से निर्वाचन विभाग, राज्य सरकार और चिकित्सा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सांठगांठ और मिलीभगत के आरोपों की चर्चा तेज

चिकित्सा महकमे में अब इस बात को लेकर चर्चा है कि किसी सामान्य कार्मिक या अधिकारी की छोटी प्रशासनिक चूक पर तत्काल कार्रवाई हो जाती है। कई मामलों में पद से हटाने, एपीओ करने या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई में देर नहीं लगती। लेकिन यहाँ मामला कथित तौर पर:

  • 33 लाख रुपए की वित्तीय अनियमितताओं,
  • विभागीय आंतरिक जांच,
  • ऑडिट आक्षेपों,
  • बार-बार की गई शिकायतों,
  • आचार संहिता उल्लंघन के आरोपों और नोटिस,
  • तथा निदेशालय को भेजी गई तथ्यात्मक रिपोर्ट तक पहुंचने के बावजूद कार्रवाई के इंतजार में है।

Expose Now News द्वारा दस्तावेजों और तथ्यों के साथ मामला उठाए जाने के बाद विभाग की PHS गायत्री राठौर द्वारा करौली CMHO से तत्काल तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी गई थी। इसके बाद 14 अगस्त को CMHO डॉ. सतीश चन्द मीना द्वारा रिपोर्ट निदेशालय भेज दी गई। इसके बाद से ही विभागीय गलियारों में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर कार्रवाई में देरी का कारण क्या है?

181 पर मिला ऐसा विरोधाभासी जवाब कि परिवादी रह गया हैरान!

इस पूरे मामले में एक नया और बेहद गंभीर विरोधाभास सामने आया है। परिवादी जितेंद्र द्वारा राजस्थान संपर्क पोर्टल 181 पर शिकायत दर्ज कर संबंधित दंत चिकित्सक/BCMO के खिलाफ अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी मांगी गई थी। शिकायत के निस्तारण में कथित तौर पर ऐसा जवाब दर्ज किया गया कि—डॉ. जगराम मीना पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं, उन्हें राज्य सरकार द्वारा लगाया गया है, आरोपों की जांच हो चुकी है और इस परिवाद में राहत संभव नहीं है।

लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि परिवादी के अनुसार यह जवाब 19 अगस्त को स्वयं डॉ. जगराम मीना द्वारा दिया गया था। अब सवालों की पूरी श्रृंखला खड़ी हो गई है:

  1. 14 अगस्त: CMHO करौली द्वारा तथ्यात्मक रिपोर्ट साक्ष्यों सहित निदेशालय भेजे जाने का उल्लेख।
  2. 19 अगस्त: 181 शिकायत पर कथित रूप से जवाब—आरोप बेबुनियाद हैं और राहत संभव नहीं है।

तो फिर सच क्या है? जब CMHO कार्यालय की तथ्यात्मक रिपोर्ट में विभागीय जांच के आक्षेपों और मामले से संबंधित तथ्यों का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट निदेशालय भेजी जा चुकी थी, तो उसके बाद 181 पर आरोपों को बेबुनियाद बताने वाला जवाब किस आधार पर दिया गया?

निदेशक जन स्वास्थ्य बोले—रिपोर्ट मिल चुकी है, शीघ्र होगी कार्रवाई

मामले में निदेशक जन स्वास्थ्य, चिकित्सा विभाग रविप्रकाश शर्मा ने बताया कि करौली CMHO कार्यालय से रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है और शीघ्र कार्रवाई की जाएगी। अब पूरे मामले में निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि निदेशालय स्तर पर होने वाली आगामी कार्रवाई क्या होगी।

EXPOSE NOW के 5 बड़े सवाल

  1. 33 लाख रुपए की कथित वित्तीय अनियमितताओं पर जांच के बाद जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
  2. आंतरिक जांच प्रतिवेदन में आक्षेप होने के बावजूद ठोस कार्रवाई अब तक क्यों नहीं हुई?
  3. निर्वाचन विभाग द्वारा आचार संहिता उल्लंघन के मामले में नोटिस के बावजूद आगे की कार्रवाई कहाँ अटकी?
  4. 14 अगस्त को निदेशालय भेजी गई तथ्यात्मक रिपोर्ट के बाद 19 अगस्त को 181 पर आरोपों को बेबुनियाद बताने वाला जवाब किस आधार पर दिया गया?
  5. आखिर कार्रवाई में देरी की वजह क्या है—प्रशासनिक प्रक्रिया, लापरवाही या फिर किसी कथित रसूख और सांठगांठ का प्रभाव?

Expose Now का सीधा सवाल—”14 अगस्त को रिपोर्ट निदेशालय पहुंच गई थी… फिर कार्रवाई पर आखिर किसका ब्रेक लगा है?”


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