जयपुर: राजस्थान के बेरोजगार युवाओं के लिए ‘मुख्यमंत्री युवा संबल योजना’ का फायदा अब परेशानी का सबब बनता जा रहा है। प्रदेश के अधिकतर जिलों में पिछले 9 महीनों (जनवरी से) से युवाओं को बेरोजगारी भत्ता नहीं मिला है। जिन कुछ जिलों में आंशिक भुगतान हुआ भी है, वहां भी 6 महीने से पैसा अटका हुआ है।
बजट है पर भुगतान नहीं, पढ़ाई पर पड़ रहा सीधा असर
चौंकाने वाली बात यह है कि सरकार ने इस बार बजट में भत्ते के लिए 825 करोड़ रुपए का भारी-भरकम प्रावधान किया है। योजना के तहत एक महीने का कुल भत्ता 70 से 80 करोड़ रुपए होता है, फिर भी बिल पेंडिंग पड़े हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा किताबें, कोचिंग फीस, इंटरनेट, यात्रा और कमरे के किराए जैसे बुनियादी खर्चों के लिए पूरी तरह से इसी भत्ते के भरोसे रहते हैं। भत्ते के अटकने से छात्रों और उनके परिवारों के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
योजना के नियम और 2 लाख युवाओं की सीमा
मुख्यमंत्री युवा संबल योजना में प्रदेश के अधिकतम 2 लाख पात्र बेरोजगार युवाओं को आर्थिक सहायता दी जाती है। योजना के तहत:
- पुरुष अभ्यर्थियों को: 4,000 रुपए प्रतिमाह।
- महिलाओं, ट्रांसजेंडर व विशेष योग्यजन को: 4,500 रुपए प्रतिमाह दिए जाते हैं। जब कोई युवा योजना की पात्रता से बाहर होता है, तब उसकी जगह नया पात्र युवा जुड़ जाता है, लेकिन कुल संख्या 2 लाख से अधिक नहीं हो सकती।
क्यों अटका है पैसा? IFMS 2.0 बनी तकनीकी रुकावट
राजस्थान युवा बेरोजगार महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष राधे मीणा के अनुसार, सरकार ने योजना को पारदर्शी बनाने के लिए भत्ते के बिलों का भुगतान ‘IFMS 2.0’ पोर्टल से करने का नियम लागू किया है। लेकिन इस पोर्टल की तकनीकी खामियों के चलते पैसा समय पर जारी नहीं हो पा रहा है।
रोजगार निदेशालय का दावा: 7 अक्टूबर तक होगा भुगतान
इस पूरे मामले पर रोजगार निदेशालय के संयुक्त निदेशक श्याम लाल साटोलिया ने स्पष्टीकरण दिया है। उनका कहना है कि बजट की कोई समस्या नहीं है। जनवरी से मार्च तक के बिल पास हो गए हैं और वित्त विभाग से 7 अक्टूबर तक भुगतान करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इसके साथ ही अप्रैल, मई और जून के बिल भी जल्द भेज दिए जाएंगे। बिलों को ‘ECS’ (इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सर्विस) होने में समय लगता है, इसी तकनीकी कारण से भुगतान में देरी हो रही है।