बड़ा खुलासा: RMSCL टेंडर में करोड़ों का घोटाला, खास फर्मों को फायदा पहुंचाने के लिए ‘मनमर्जी’ से शर्तों में किया बदलाव

-आरटीपीपी एक्ट 2012 और नियम 2013 का सरेआम उल्लंघन, बिना सक्षम स्वीकृति के टेंडर दस्तावेजों में की गई ‘काट-छांट’

जयपुर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त शासन सचिव के आदेश पर राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (RMSCL) के टेंडरों और खरीद में चल रही गड़बड़ियों की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। आधिकारिक जांच रिपोर्ट के दस्तावेज बताते हैं कि RMSCL में बैठे कुछ अधिकारियों ने चुनिंदा प्राइवेट फर्मों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए न केवल टेंडर की शर्तों को बार-बार बदला, बल्कि ‘राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता (RTPP) अधिनियम, 2012′ के नियमों को भी ठेंगा दिखा दिया।

जांच रिपोर्ट के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया में बिना सक्षम स्तर (अध्यक्ष एवं प्रमुख शासन सचिव) की मंजूरी के निविदा दस्तावेजों में भारी हेरफेर और ‘काट-छांट’ की गई है, जिसे रिपोर्ट में “घोर अनियमितता” और “गंभीर अपराध” की श्रेणी में माना गया है।

बदले गए नियम, टर्नओवर की शर्त में करोड़ों का ‘खेल’:-

जांच रिपोर्ट में सबसे बड़ा खुलासा निविदा सूचना संख्या 04/2025 को लेकर हुआ है। अध्यक्ष एवं प्रमुख शासन सचिव महोदया द्वारा अनुमोदित मूल दस्तावेज में सर्जिकल आइटम के लिए 10 करोड़ और एमएसएमई (MSME) फर्मों के लिए 5 करोड़ रुपये का औसत टर्नओवर तय था। वहीं सूचर्स आइटम के लिए यह सीमा क्रमशः 20 करोड़ और 10 करोड़ रुपये थी।

क्या हुआ खेल: टेंडर जारी करते समय बिना अध्यक्ष की मंजूरी के नियमों को बदल दिया गया। सर्जिकल और सूचर्स दोनों ही मामलों में MSME फर्मों के टर्नओवर की शर्त को घटाकर सीधे 02 करोड़ रुपये कर दिया गया।
रिपोर्ट में साफ लिखा है कि दिनांक 16.06.2025 को टेंडर जारी करते समय जानबूझकर किसी ‘विशेष फर्म’ को वित्तीय लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से यह बदलाव किया गया था।

शुद्धिपत्र (Corrigendum) का सहारा लेकर नियमों का मखौल उड़ाया:-

रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने गड़बड़ियों को छुपाने और चहेती फर्मों को उपकृत करने के लिए बैक-टू-बैक कई शुद्धिपत्र (Corrigendum) जारी किए। निविदा संख्या 02/2025 में टर्नओवर की शर्त को बदलने के लिए प्रबंध निदेशक (MD) स्तर पर 10.10.2025 को नोटशीट मंजूर कराकर 15.10.2025 को शुद्धिपत्र जारी कर दिया गया। जबकि इसके लिए अध्यक्ष एवं प्रमुख शासन सचिव का अप्रूवल लेना अनिवार्य था।

यही नहीं, गुणवत्ता सुनिश्चित करने वाली ‘बिड कंडीशन 2(g)’ (जिसके तहत सरकारी अस्पतालों या एम्स आदि में सप्लाई का पिछला अनुभव जरूरी था) को भी 15.10.2025 को एक शुद्धिपत्र के जरिए टेंडर से हटा दिया गया। रिपोर्ट कहती है कि गुणवत्ता से जुड़ी इतनी अहम शर्त को हटाने से पहले विषय-विशेषज्ञों (Experts) की राय तक नहीं ली गई।

अयोग्य फर्मों को बना दिया ‘योग्य’, खोल दीं वित्तीय बोलियां:-

जांच का एक और सबसे गंभीर पहलू निविदा सूचना संख्या 17/2024 से जुड़ा है। नियमों के मुताबिक जो फर्में तकनीकी रूप से ‘नॉन-रेस्पॉन्सिव’ यानी अयोग्य (Disqualified) पाई गई थीं, उन्हें नियम विरुद्ध तरीके से ‘योग्य’ घोषित कर दिया गया और उनकी वित्तीय बोलियां (Financial Bids) खोल दी गईं।

इस मामले में कार्यकारी निदेशक (उपापन) द्वारा कृष्ण प्रताप सिंह (वरिष्ठ लेखाधिकारी) एवं मनीष मोदी (औषधि नियंत्रक अधिकारी) को स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए 23.12.2025 को अनौपचारिक टिप्पणी क्रमांक 103 भी जारी की जा चुकी है।

इन टेंडरों में पाई गई भारी धांधली (जांच के दायरे में):

-निविदा संख्या 04/2025 व 09/2025: टर्नओवर की शर्तों में अवैध रूप से काट-छांट और आरटीपीपी एक्ट का उल्लंघन।

-निविदा संख्या 17/2024: तकनीकी रूप से रिजेक्टेड (अयोग्य) फर्मों की वित्तीय बोलियां खोलना।

-निविदा संख्या 02/2025: बिना उच्च स्वीकृति के बार-बार शुद्धिपत्र जारी कर टेंडर की मूल शर्तों को बदलना।

दोषी अधिकारियों पर गिरेगी गाज, अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश:-

रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि “बोली दस्तावेजों में बिना सक्षम अनुमोदन के संशोधन/काट-छांट किया जाना गंभीर अनियमितता की श्रेणी में आता है, जिसके लिए संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों की जवाबदेही सुनिश्चित कर अनुशासनात्मक कार्रवाई किया जाना उचित होगा।”

अब गेंद सरकार के पाले में है। टेंडर दस्तावेजों के बारीक परीक्षण (Examination) के बाद यह विस्तृत जांच रिपोर्ट आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई के लिए उच्च स्तर पर प्रस्तुत कर दी गई है। देखना यह है कि सरकारी खजाने और जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले इन रसूखदार अधिकारियों पर कब और क्या कार्रवाई होती है।

ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now

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