Expose Now Exclusive: नियमों के ‘भंवरजाल’ में उलझा PHED ! ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने या जिम्मेदारी से बचने का नया खेल?

जयपुर। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) में वित्तीय शक्तियों के नए संशोधनों ने एक बड़ा प्रशासनिक गतिरोध (Administrative Deadlock) पैदा कर दिया है। वित्त विभाग द्वारा जल जीवन मिशन (JJM) और अमृत मिशन जैसे महा-प्रोजेक्ट्स में टेंडर मंजूर करने की अधिकारियों की वित्तीय शक्तियों को अचानक कई गुना बढ़ा तो दिया गया, लेकिन अब इसी की आड़ में “समय सीमा बढ़ाने (Time Extension)” और “अतिरिक्त भुगतान (Extra Items)” को मंजूरी देने का एक नया पेंच फंस गया है।

हाल ही में संपन्न हुई PHED वित्त समिति की बैठक के दस्तावेज, जो यह साफ बयां करते हैं कि विभाग के आला अधिकारी अब पुरानी फाइलों पर फैसला लेने से डर रहे हैं और जिम्मेदारी की गेंद को वित्त विभाग के पाले में फेंक रहे हैं।

शक्तियों का वो ‘बूम’ जिसने उलझाई फाइलें:-

वित्त विभाग ने पिछले साल 3 अक्टूबर 2025 और 31 अक्टूबर 2025 को एक आदेश जारी कर PHED के अधिकारियों की टेंडर स्वीकार करने की शक्तियों (Clause 16) में बंपर बढ़ोतरी की थी:

-अधिशासी अभियंता (EE): जो पहले सिर्फ 30 लाख तक के टेंडर पास कर सकते थे, उनकी पावर बढ़ाकर सीधे 75 लाख कर दी गई।

-अधीक्षण अभियंता (SE): 1.20 करोड़ से बढ़ाकर 3 करोड़।

-अतिरिक्त मुख्य अभियंता (ACE): 2.50 करोड़ से बढ़ाकर 7.50 करोड़।

-मुख्य अभियंता (CE): 5 करोड़ से बढ़ाकर सीधे 15 करोड़।

-EPC (Empowered Procurement Committee): सीधे 100 करोड़ रुपये तक के टेंडर मंजूर करने की पावर पा गई।

पावर बढ़ी तो फंसा ‘पेंच’:-

मलाईदार टेंडर्स की पावर तो बढ़ गई, लेकिन असली खेल तब शुरू हुआ जब उन पुराने प्रोजेक्ट्स की फाइलें सामने आईं जो इस संशोधन से पहले मंजूर हुए थे। क्लाउज 23 (Time Extension) नियम कहता है कि प्रोजेक्ट का समय बढ़ाना हो, तो फाइल ‘टेंडर मंजूर करने वाले अधिकारी’ (Bid Sanctioning Authority) या उससे उच्च अधिकारी के पास जाएगी। क्लाउज 33 (Extra Items) प्रोजेक्ट में स्वीकृत राशि से 5% तक का अतिरिक्त काम या भुगतान (BSR/Non-BSR) मंजूर करने का अधिकार भी टेंडर मंजूर करने वाले अथॉरिटी के पास है।

अब असमंजस यह है कि जो काम पुराने नियमों के तहत ऊंचे स्तर (जैसे CE या EPC) से पास हुए थे, नए नियमों के बाद क्या उन्हें अब छोटे अधिकारी (जैसे SE या EE) टाइम एक्सटेंशन दे सकते हैं? क्योंकि अब वो बजट राशि इन छोटे अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में आ चुकी है।

जिम्मेदारी से भाग रहे अफसर, ‘वित्त विभाग’ के पाले में डाली गेंद:-

‘Expose Now’ के पास मौजूद दस्तावेजों के मुताबिक, मुख्य अभियंता (JJM) ने इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा था कि पुराने ठेकों में देरी माफी और एक्स्ट्रा पेमेंट के मामलों को कौन निपटाएगा? हैरानी की बात यह है कि लाखों-करोड़ों की वित्तीय शक्तियों का इस्तेमाल करने वाली PHED की इस वित्त समिति ने खुद फैसला लेने के बजाय साफ कह दिया—”चूंकि शक्तियां वित्त विभाग ने बदली हैं, इसलिए हम इस पर फैसला नहीं लेंगे। प्रस्ताव प्रशासनिक विभाग के जरिए सीधे वित्त विभाग (Finance Department) को स्पष्टीकरण के लिए भेजा जाए।”

‘Expose Now’ के तीखे सवाल: जनता के पैसे और वक्त पर कब तक बहेगी लालफीताशाही?

  1. काम में देरी का जिम्मेदार कौन?

जल जीवन मिशन और अमृत मिशन के सैकड़ों प्रोजेक्ट्स पहले ही रेंग रहे हैं। इस प्रशासनिक असमंजस के कारण टाइम एक्सटेंशन और एक्स्ट्रा आइटम्स की फाइलें अटकेंगी, जिससे प्रोजेक्ट्स और लेट होंगे। इसका खामियाजा जनता कब तक भुगतेगी?

  1. क्या यह जिम्मेदारी से बचने का रास्ता है?

जब अधिकारी टेंडर बांटने के लिए बढ़ी हुई शक्तियों का स्वागत करते हैं, तो पुराने प्रोजेक्ट्स की जवाबदेही तय करने या फैसले लेने के वक्त फाइलें आगे क्यों सरका दी जाती हैं?

  1. ठेकेदारों को फायदा या पेनल्टी से बचाने का गेम?

समय सीमा बढ़ाने (Time Extension) के नियमों में स्पष्टता न होने का फायदा सीधे तौर पर सुस्त ठेकेदारों को मिलेगा, जिन पर पेनाल्टी लगाने की हिम्मत अधिकारी इस ‘कन्फ्यूजन’ के दौर में नहीं जुटा पा रहे हैं।

वित्त समिति का फैसला: बैठक में आखिरकार यह निर्णय ले लिया गया है कि मुख्य अभियंता (JJM) अब इस पूरे मामले को स्पष्टीकरण के लिए वित्त विभाग को भेजेंगे। अब देखना यह है कि वित्त विभाग इस ‘अधिकारी बनाम नियम’ की जंग को कब तक सुलझा पाता है, या फिर फाइलों का यह खेल ऐसे ही चलता रहेगा !

PHED और वित्त विभाग की इस अंदरूनी खींचतान की हर अपडेट के लिए जुड़े रहिए ‘Expose Now’ के साथ।

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