-सरकारी गवाह विशाल सक्सेना का बड़ा कबूलनामा, टेंडर फिक्सिंग में संजय अग्रवाल ही थे नंबर-1
जयपुर। राजस्थान के जलदाय विभाग (PHED) में हुए हजारों करोड़ के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले की परतें अब तेजी से उधड़ रही हैं। पूर्व मंत्री महेश जोशी की गिरफ्तारी के बाद अब गलियारों में सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है— अगला नंबर किसका? क्या एसीबी अब उस चेहरे तक पहुंचेगी जिसे इस पूरे खेल का ‘असली मास्टरमाइंड’ कहा जा रहा है?

भ्रष्टाचार की ‘त्रिमूर्ति’ और वसूली का नेटवर्क:-
महेश जोशी के कार्यकाल में जलदाय विभाग केवल विकास का जरिया नहीं, बल्कि वसूली का अड्डा बन गया था। सूत्रों और सरकारी गवाहों के बयानों के आधार पर इस सिंडिकेट का ढांचा कुछ इस प्रकार था:
-संजय अग्रवाल (तत्कालीन एक्सईएन, वर्तमान एसई): विभाग का वह ‘चाणक्य’ जिसने कथित तौर पर 20 हजार करोड़ के जेजेएम टेंडरों की सौदेबाजी की पूरी प्लानिंग की। आरोप है कि टेंडरों को मैनेज करने से लेकर जांच के नाम पर ठेकेदारों से करोड़ों की वसूली का पूरा ब्लूप्रिंट इसी अधिकारी ने तैयार किया था।
-दिनेश गोयल (पूर्व सीई): 17 फरवरी को एसीबी के हत्थे चढ़ चुके गोयल और संजय अग्रवाल की जोड़ी बड़े प्रोजेक्ट्स को ‘मैनेज’ करने के लिए कुख्यात रही है।
-संजय बड़ाया: पूर्व मंत्री का वह करीबी दोस्त, जो फंड कलेक्शन का मुख्य जरिया था। बड़ाया के साथ इस काम में किशन गुप्ता, तपन गुप्ता और नमन खंडेलवाल जैसे रिश्तेदारों का नाम भी प्रमुखता से सामने आ रहा है।

सरकारी गवाह के खुलासे से हड़कंप:-
एसीबी की पूछताछ में सरकारी गवाह बने विशाल सक्सेना ने विभाग के भीतर मचे इस गदर का कच्चा चिट्ठा खोल दिया है। सक्सेना ने स्पष्ट रूप से संजय अग्रवाल का नाम लेते हुए उन्हें टेंडर मैनेजमेंट का मुख्य खिलाड़ी बताया है। इसके अलावा, तत्कालीन एसीएस सुबोध अग्रवाल पर भी संदिग्ध फर्मों को टेंडर देने और इरकॉन के फर्जी प्रमाणपत्रों के सत्यापन में ढिलाई बरतने के गंभीर आरोप लगे हैं।
क्या संजय अग्रवाल को किसी रसूखदार का संरक्षण प्राप्त है?
जलदाय विभाग में 20 हजार करोड़ के जेजेएम टेंडरों को मैनेज कराने वाली जोड़ी में एक सीई दिनेश गोयल को एसीबी गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन इस खेल के असली मास्टरमाइंड तत्कालीन अधिशाषी अभियंता संजय अग्रवाल अभी तक एसीबी की जांच और पकड़ दोनों से ही दूर है। बड़ा सवाल ये है कि तत्कालीन पीएचईडी मंत्री महेश जोशी, तत्कालीन एसीएस सुबोध अग्रवाल सहित एक दर्जन लोगों को एसीबी गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन संजय अग्रवाल का नाम एसीबी के सामने आने के बाद भी उनको अभी तक एसीबी ने पूछताछ के लिए नहीं बुलाया और न ही उन्हें गिरफ्तार किया गया है। क्या तत्कालीन अधिशाषी अभियंता संजय अग्रवाल को किसी का संरक्षण प्राप्त है? क्या एसीबी पर्याप्त सबूत जुटाने का इंतजार कर रही है, या फिर जांच की आंच को कहीं और मोड़ने की कोशिश हो रही है?
बड़ा सवाल: क्या महेश जोशी के ‘कलेक्शन एजेंट’ संजय बड़ाया के रिश्तेदारों—किशन, तपन और नमन—पर भी शिकंजा कसेगा? ये वो नाम हैं जो पर्दे के पीछे रहकर भ्रष्टाचार की रकम को ठिकाने लगाने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं।
सौदेबाजी, तबादले और वसूली का ‘कॉम्बिनेशन’:-
जलदाय विभाग में केवल टेंडरों की ही सौदेबाजी नहीं हुई, बल्कि ट्रांसफर-पोस्टिंग के नाम पर भी इंजीनियर्स से मोटी वसूली की गई। ठेकेदारों पर दबाव बनाकर उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की धमकी देना और फिर ‘सेटलमेंट’ के नाम पर करोड़ों डकार जाना इस सिंडिकेट का रोज का काम था।
