Expose Now बड़ा खुलासा: राजस्थान FSO भर्ती में ”खास” को किया ‘पास’ ! फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती में महाफर्जीवाड़े का खेल

-SOG की दहलीज पर पहुंचा ‘खाद्य सुरक्षा’ का महाघोटाला, मंत्रियों के चहेतों को रेवड़ियों की तरह बांटी नौकरियां, CM के आदेश के बाद भी फाइलें दबाकर बैठे हैं अधिकारी

जयपुर। राजस्थान में लीक हुए पेपरों, डमी कैंडिडेट और बिक चुकी परीक्षाओं का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है। REET, फायरमैन और RAS भर्ती घोटालों के बाद अब चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के ‘डायरेक्टरेट ऑफ Food Safety’ के अधीन हुई खाद्य सुरक्षा अधिकारी (FSO) की भर्तियां महाफर्जीवाड़े के रडार पर हैं। एडवोकेट चंद्रशेखर कच्छावा द्वारा स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक को भेजी गई एक विस्फोटक शिकायत ने सूबे के प्रशासनिक और सियासी गलियारों में भूकंप ला दिया है। आरोप है कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में योग्य और गरीब बेरोजगारों के हक पर डाका डालकर, नियमों को ताक पर रखकर चहेतों, रसूखदारों और एक ‘जाति विशेष’ के लोगों को सरकारी कुर्सियां सौंप दी गईं।

खुलासा नंबर 1:

लिखित परीक्षा में ‘जाति’ का चमत्कारी दबदबा, टॉप-10 में 8 एक ही बिरादरी के:-

मुख्यमंत्री की बजट घोषणा (2021-22) के तहत FSO के 200 पदों पर लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। लेकिन जब आरपीएससी (RPSC) और विभाग द्वारा 178 पदों की अंतिम चयन सूची जारी की गई, तो रिजल्ट देखकर युवाओं के पैरों तले जमीन खिसक गई। शिकायत के अनुसार, मेरिट के टॉप 10 अभ्यर्थियों की सूची में से लगभग 7 से 8 अभ्यर्थी एक ही जाति विशेष से ताल्लुक रखते हैं। इतना ही नहीं, पूरी चयन सूची में 40 से अधिक अभ्यर्थी एक ही बिरादरी के हैं।

Expose Now का सीधा सवाल: क्या यह महज एक इत्तेफाक है या फिर तत्कालीन मंत्रियों और रसूखदारों ने अपने पद और धनबल दिखाते हुए इस पूरी चयन सूची को अपने ‘सिंडिकेट’ के इशारे पर तैयार करवाया था?

खुलासा नंबर 2:

98 पदों वाली भर्ती और इंटरव्यू का ‘अंडर द टेबल’ खेल:-

दूसरा गंभीर मामला FSO की 98 पदों पर निकाली गई भर्ती का है, जिसमें लिखित परीक्षा के साथ ‘साक्षात्कार’ (Interview) का भी प्रावधान था। शिकायत में दावा किया गया है कि इस इंटरव्यू प्रक्रिया का इस्तेमाल प्रतिभावान युवाओं को बाहर करने और चहेतों को ‘सदोष लाभ’ पहुंचाने के लिए नंबरों के हेरफेर के हथियार के रूप में किया गया। इस भर्ती की फाइल को सरकारों के बदलने के साथ कभी ठंडे बस्ते में डाला गया, तो कभी रातों-रात निकालकर अपनों को फायदा पहुंचाया गया।

भजनलाल सरकार के आदेश भी नहीं मान रहे रसूखदार अफसर:-

सबसे बड़ा सवाल वर्तमान भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर भी खड़ा हो रहा है। राजस्थान सरकार के कार्मिक विभाग ने 6 जून 2024 को एक कड़ा आदेश जारी किया था, जिसमें स्पष्ट कहा गया था कि पिछले 5 वर्षों में नियुक्त हुए सभी राज्यकर्मियों का ‘आन्तरिक कमेटी’ बनाकर दोबारा वेरिफिकेशन किया जाए। जांच में यह देखना था कि क्या परीक्षा देने वाला और नौकरी करने वाला व्यक्ति एक ही है (डमी कैंडिडेट तो नहीं)? और क्या शैक्षणिक दस्तावेज और डिग्रियां असली हैं?

लेकिन हकीकत यह है कि FSO भर्ती के संदिग्ध 200 और 98 पदों की फाइलों को विभाग के आला अधिकारी आज भी दबाकर बैठे हैं। SOG को रिपोर्ट भेजने के बजाय मामले को रफा-दफा करने का बैकडोर खेल जारी है, क्योंकि डर इस बात का है कि फाइलें खुलीं तो कई बड़े मगरमच्छ बेनकाब हो जाएंगे।

Expose Now के तीखे सवाल:

-अफसरों को किसका खौफ? जब मुख्यमंत्री का स्पष्ट आदेश है कि संदिग्ध मामलों की रिपोर्ट तुरंत SOG को दी जाए, तो खाद्य सुरक्षा विभाग के आला अधिकारी इन फाइलों को दबाकर किसके रसूख को बचा रहे हैं? क्या आज भी विभाग पर पुरानी सरकार के ‘आकाओं’ का साया है?

-क्या डिग्रियों का भी है खेल? FSO पद के लिए बेहद विशिष्ट शैक्षणिक योग्यता (Food Technology/Biotechnology आदि) की आवश्यकता होती है। क्या चयन सूची में शामिल चहेतों की डिग्रियां असली हैं या बैकडेट में किसी निजी यूनिवर्सिटी से खरीदी गई हैं?

तुरंत दर्ज हो FIR, बेनकाब हो भर्ती सिंडिकेट:-

SOG को सौंपी गई शिकायत में एडवोकेट चंद्रशेखर कच्छावा ने साफ तौर पर मांग की है कि इस पूरे महाफर्जीवाड़े के खिलाफ तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज कर उच्च स्तरीय तकनीकी जांच शुरू की जाए। जो युवा दिन-रात लाइब्रेरी में खून-पसीना एक करते रहे, उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए इस ‘भर्ती सिंडिकेट’ के चेहरों को सलाखों के पीछे भेजना ही होगा। अब गेंद SOG और सरकार के पाले में है— क्या युवाओं को न्याय मिलेगा या ये फाइलें भी सचिवालय की अलमारियों में धूल फांकेंगी?

ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now

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