सफेद चावल से बना पोहा और हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स: जानें क्यों डायबिटीज मरीजों के लिए यह जोखिम भरा है

भारत में नाश्ते का मतलब अक्सर ‘पोहा’ होता है। इसे हल्का, सुपाच्य और वजन घटाने में मददगार मानकर करोड़ों लोग रोज सुबह बड़े चाव से खाते हैं। लेकिन हाल ही में मशहूर मास्टरशेफ संजीव कपूर ने एक पॉडकास्ट के दौरान पोहा प्रेमियों को एक ऐसी चेतावनी दी है, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। संजीव कपूर के अनुसार, पोहा जिसे हम सेहत का खजाना मानते हैं, वह असल में शरीर में ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ाने का काम कर सकता है। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि यदि कोई अपना इंसुलिन रिस्पॉन्स चेक करना चाहता है, तो उसे बस एक प्लेट पोहा खाकर देख लेना चाहिए। उनके मुताबिक, पोहा खाने के बाद शुगर लेवल में जो उछाल आता है, वह वाकई चौंकाने वाला और चिंताजनक है।

संजीव कपूर ने इस बात पर जोर दिया कि पोहा मूल रूप से ‘प्रेस किया हुआ सफेद चावल’ है, जो कार्बोहाइड्रेट का एक बड़ा स्रोत है। चूंकि यह सफेद चावल से बनता है, इसलिए इसमें फाइबर की भारी कमी होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और Healthline जैसी वेबसाइटों के अनुसार, पोहा का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) 55 से 70 के बीच होता है, जो मध्यम से उच्च श्रेणी में आता है। जब हम उच्च GI वाली चीजें खाते हैं, तो शरीर में ग्लूकोज बहुत तेजी से रिलीज होता है, जिससे ब्लड शुगर अचानक ‘स्पाइक’ कर जाता है। यह स्थिति विशेष रूप से डायबिटीज के मरीजों या प्री-डायबिटिक लोगों के लिए बेहद जोखिम भरी हो सकती है।

रिसर्च भी संजीव कपूर के इस दावे का समर्थन करती दिखती है। Fitterfly की एक रिपोर्ट बताती है कि फाइबर की कमी ही पोहा को शुगर स्पाइक का मुख्य कारण बनाती है। वहीं, ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (BMJ) की एक स्टडी के अनुसार, सफेद चावल या उससे बने प्रोसेस्ड प्रोडक्ट्स का अधिक सेवन करने से टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा 11% तक बढ़ सकता है। ऐसे में विशेषज्ञों का सुझाव है कि अगर आप पोहा खाना चाहते हैं, तो इसमें भारी मात्रा में सब्जियां, मूंगफली या प्रोटीन के स्रोत मिलाएं ताकि इसका ग्लाइसेमिक लोड कम हो सके और शुगर लेवल अचानक न बढ़े।

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