जयपुर, राजस्थान के नगरीय विकास एवं आवासन (UDH) मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा है कि तकनीक के इस्तेमाल से प्रदेश का शहरी प्रशासन अब अधिक पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी बन गया है। जयपुर के जेईसीसी में आयोजित राजस्थान डिजिफेस्ट-टाई ग्लोबल समिट 2026 के दौरान ‘आईटी के माध्यम से शहरी शासन की पुनर्कल्पना’ विषय पर बोलते हुए उन्होंने सरकार की डिजिटल उपलब्धियों को साझा किया।
बार-बार केवाईसी के झंझट से मुक्ति
मंत्री खर्रा ने बताया कि राज्य सरकार की तकनीकी पहलों ने आम नागरिकों के जीवन को सरल बना दिया है:
- यूनिक प्रॉपर्टी आईडी: इस नई व्यवस्था से नागरिकों को अब अपनी संपत्तियों के लिए बार-बार केवाईसी (KYC) कराने की आवश्यकता नहीं होगी।
- आधार आधारित ई-केवाईसी: ई-नगर प्रणाली और आधार लिंकिंग के माध्यम से मैन्युअल प्रक्रियाओं को खत्म कर दिया गया है, जिससे मानवीय त्रुटियों और भ्रष्टाचार की संभावना समाप्त हो गई है।
- घर बैठे सेवा: अब पट्टों से संबंधित कार्यों के लिए नागरिकों को जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे; सेवाएँ पूरी तरह डिजिटल कर दी गई हैं।
जेडीए बना तकनीकी रोल मॉडल
यूडीएच मंत्री ने जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) की सराहना करते हुए इसे राज्य के अन्य सभी प्राधिकरणों के लिए ‘रोल मॉडल’ बताया। उन्होंने कहा कि जेडीए ने जिस प्रकार सुशासन के लिए तकनीकी नवाचारों को अपनाया है, वह पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल है।
निवेश में राजस्थान का नया कीर्तिमान
प्रदेश की निवेश नीतियों पर चर्चा करते हुए श्री खर्रा ने एक महत्वपूर्ण तथ्य साझा किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान अब केवल ‘एमओयू साइनिंग’ वाला राज्य नहीं रहा, बल्कि ‘एमओयू एक्जीक्यूशन’ (कार्यान्वयन) वाला राज्य बन गया है।
- 37,000 करोड़ का निवेश: अब तक 400 से अधिक एमओयू धरातल पर उतर चुके हैं।
- विश्वास का माहौल: सरकार की पारदर्शिता के कारण ही वैश्विक निवेशक राजस्थान की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति
सत्र के दौरान यूडीएच प्रमुख शासन सचिव देबाशीष पृष्टी, जेडीए सचिव निशांत जैन, भीलवाड़ा यूआईटी आयुक्त ललित गोयल और जोधपुर विकास प्राधिकरण के उप आयुक्त रामजी भाई कलबी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
प्रमुख बिंदु (Highlights):
- डिजिटल गवर्नेंस: ई-नगर प्रणाली से नगरीय सेवाओं का पूर्ण डिजिटलीकरण।
- सुविधा: यूनिक आईडी से प्रॉपर्टी मैनेजमेंट हुआ आसान।
- विकास: जेडीए की तकनीकी कार्यप्रणाली को प्रदेश भर में लागू करने पर जोर।
- आर्थिक प्रगति: 37 हजार करोड़ रुपये का निवेश धरातल पर उतरा।
