RAS भर्ती में नया बवाल: डोटासरा के समधी और तीन संतानों पर फर्जी ओबीसी प्रमाण पत्र का आरोप, RPSC को 24 घंटे का अल्टीमेटम

राजस्थान की राजनीति और नौकरशाही के गठजोड़ का एक बेहद बड़ा और गंभीर मामला सामने आया है। प्रदेश कांग्रेस के कद्दावर नेता गोविंद सिंह डोटासरा के समधी (चूरू के जिला शिक्षा अधिकारी) रमेश चंद्र पूनिया और उनकी तीन संतानों पर ‘ओबीसी नॉन-क्रीमीलेयर’ का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) में चयनित होने का सनसनीखेज आरोप लगा है।

इस मामले में जयपुर के चर्चित अधिवक्ता गोरधन सिंह सहित छह लोगों ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के चेयरमैन डॉ. भूपेंद्र यादव समेत आयोग के सभी सातों सदस्यों को ‘सूचना पत्र’ (लीगल नोटिस) भेजकर 24 घंटे का कड़ा अल्टीमेटम दिया है।

RPSC को दो टूक: ‘आप केस दर्ज कराओ, वरना आपके खिलाफ होगी FIR’

अधिवक्ता गोरधन सिंह द्वारा RPSC चेयरमैन डॉ. भूपेंद्र यादव और सदस्य (राजकुमारी गुर्जर, रामुराम राईका, शिव सिंह राठौड़, संगीता आर्य, जसवंत सिंह राठी, बाबूलाल कटारा और मंजू शर्मा) को भेजे गए नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है:

  1. आयोग खुद बने वादी: RPSC प्रशासन इस फर्जीवाड़े का तत्काल संज्ञान लेते हुए अपनी ओर से जयपुर के सिविल लाइंस थाने में आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करवाए।
  2. 24 घंटे की डेडलाइन: यदि 24 घंटे के भीतर आयोग मुकदमा दर्ज नहीं करवाता है, तो सूचनाकर्ताओं द्वारा RPSC के अध्यक्ष और सातों सदस्यों को ‘सह-आरोपी’ बनाते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी।
  3. इन संगीन धाराओं में मांगा केस: कूट रचित दस्तावेज तैयार करने, पद के दुरुपयोग और धोखाधड़ी की आईपीसी (IPC) की धारा 420, 409, 406, 467, 468, 471, 166, 167 एवं 120-B के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।

क्या है वकील गोरधन सिंह का ‘क्रीमीलेयर’ का गणित?

नोटिस में दिए गए तथ्यों के अनुसार, चूरू के DEO रमेश चंद्र पूनिया की तीन संतानों— प्रतिभा (RAS 2016 बैच, वर्तमान SDM और डोटासरा की पुत्रवधू), गौरव और प्रभा (दोनों का चयन हाल ही में RAS 2018 में हुआ) ने अवैध रूप से ओबीसी कोटे का लाभ उठाया है।

  • प्रमोशन की टाइमिंग: रमेश चंद्र पूनिया को 32 वर्ष 3 माह की आयु पूरी होने पर ही ‘प्रधानाध्यापक’ (Headmaster) के पद पर सरकारी प्रमोशन मिल गया था।
  • नियम की अनदेखी: सर्विस रूल्स के मुताबिक, इस स्थिति में उनकी संतानें स्वतः ही ‘ओबीसी क्रीमीलेयर’ (Creamy Layer) की श्रेणी में आ जाती हैं, जिन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकता। इसके बावजूद तथ्यों को छुपाकर तीनों के ‘नॉन-क्रीमीलेयर’ प्रमाण पत्र बनवाए गए।

तीनों को ’80-80′ नंबर का रहस्य! > इस पूरी शिकायत में जिस एक आंकड़े ने भूचाल ला दिया है, वह हैं RAS के साक्षात्कार (Interview) के मार्क्स। एडवोकेट गोरधन सिंह ने खुलासा किया है कि रमेश पूनिया की तीनों संतानों (प्रतिभा, गौरव और प्रभा) को अलग-अलग भर्तियों के RAS इंटरव्यू में बोर्ड द्वारा हूबहू ’80-80 नंबर’ ही दिए गए हैं। एक ही परिवार के तीन सदस्यों को एक बराबर टॉप नंबर मिलने के इस ‘संयोग’ पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

DEO रमेश पूनिया का पलटवार: “सारे आरोप 100% मनगढ़ंत”

दूसरी तरफ, खुद पर और बच्चों के करियर पर उठे इन सवालों का चूरू के जिला शिक्षा अधिकारी रमेश चंद्र पूनिया ने पुरजोर खंडन किया है। पूनिया ने अपना आधिकारिक स्पष्टीकरण देते हुए कहा:

“मेरी नियुक्ति थर्ड ग्रेड शिक्षक के पद पर हुई थी। 32 साल की उम्र में मैं हेडमास्टर बना, तब मेरी ग्रेड-पे 6500 रुपये थी। जब मैं 43 साल का हुआ, तब जाकर ‘प्रधानाध्यापक’ (Principal) बना। इसीलिए 40 साल की आयु वाला क्रीमीलेयर का नियम मुझ पर लागू ही नहीं होता। मैंने अपने तीनों बच्चों के ओबीसी प्रमाण पत्र के लिए अपने वेतन संबंधी व अन्य सभी वैध दस्तावेज लगाए थे, जिसके आधार पर प्रशासन ने ओबीसी नोटिफिकेशन के तय नियमों से ही प्रमाण पत्र जारी किए हैं। ये आरोप पूरी तरह गलत और दुर्भावनापूर्ण हैं।”


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