2 नंबर वाले को दिए 191 अंक! प्रयोगशाला सहायक भर्ती-2018 में OMR शीट का ‘महा-खेल’, SOG ने दबोचे दो और मुन्नाभाई

जयपुर। राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं के सिस्टम को खोखला करने वाले गिरोहों के खिलाफ स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) का ‘ऑपरेशन क्लीन’ लगातार जारी है। एसओजी ने ‘प्रयोगशाला सहायक सीधी भर्ती परीक्षा-2018’ (Lab Assistant Exam 2018) में एक ऐसे खौफनाक फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है, जिसने हर पढ़ने वाले छात्र को सन्न कर दिया है।

जांच में सामने आया है कि जिन अभ्यर्थियों के परीक्षा में वास्तविक अंक महज 2 और 4 नंबर थे, ओएमआर (OMR) स्कैनिंग करने वाली प्राइवेट एजेंसी से साठगांठ कर उनके प्राप्तांक 191 और 165 कर दिए गए और उन्हें सरकारी नौकरी की लिस्ट में डाल दिया गया। एसओजी ने इस मामले में फर्जी तरीके से चयनित दो और अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया है।

पकड़े गए ‘मुन्नाभाइयों’ की मार्कशीट का असली सच:

एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (ADG) विशाल बंसल ने बताया कि गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी राजस्थान के करौली और दौसा जिले के रहने वाले हैं। जब चयन बोर्ड ने शक होने पर इनकी OMR शीट की ‘री-स्कैनिंग’ (दोबारा जांच) करवाई, तो इनके असली नंबरों का कच्चा चिट्ठा खुल गया:

गिरफ्तार आरोपी का नामनिवासीफर्जी (दिखाए गए) अंकरी-स्कैनिंग में निकले ‘असली अंक’
महेन्द्र कुमार मीना (31)नांगललाट, टोडाभीम (करौली)165 अंकसिर्फ 4 अंक
देवेन्द्र सिंह गुर्जर (28)नादना, मंडावर (दौसा)191 अंकसिर्फ 2 अंक

स्कैनिंग कंपनी ‘राभव लिमिटेड’ ने बिछाया था पूरा जाल

एडीजी विशाल बंसल ने इस पूरे ‘नेक्सस’ से पर्दा उठाते हुए बताया कि इस परीक्षा की ओएमआर शीट को स्कैन करने का ठेका ‘राभव लिमिटेड’ (Rabhav Limited) नामक प्राइवेट एजेंसी के पास था।

कंपनी के भ्रष्ट कर्मचारियों विनोद कुमार गौड़ और शादान खान ने दलालों के जरिए फेल हो रहे अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूली। इसके बाद इन्होंने सिस्टम के सॉफ्टवेयर और मूल OMR शीट में कांट-छांट कर पूरे 27 अयोग्य अभ्यर्थियों को अनुचित तरीके से ‘प्रोविजनल’ रूप से चयनित करवा दिया।

डायरेक्टर सहित 3 पहले ही खा रहे हैं जेल की हवा

एसओजी की टीम इस पूरे रैकेट की जड़ तक पहुंच चुकी है।

  • फर्जीवाड़ा करने वाले राभव लिमिटेड के दोनों कर्मचारियों (विनोद और शादान) के साथ-साथ कंपनी के कार्यकारी निदेशक (Executive Director) रामप्रवेश सिंह को एसओजी पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
  • अब इस गिरोह के जरिए पास होने वाले 27 डमी/फर्जी अभ्यर्थियों की धरपकड़ की जा रही है।

एसओजी अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार किए गए महेंद्र और देवेंद्र से कड़ी पूछताछ की जा रही है कि उन्होंने इस काम के लिए दलालों को कितने लाख रुपये दिए थे और इस ‘कमीशन कांड’ के तार राज्य के किन-किन सफेदपोशों से जुड़े हैं।


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