जयपुर। राजस्थान विधानसभा में मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान मंदिरों के जीर्णोद्धार और विकास का मुद्दा गूँजा। देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने सदन में कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के धार्मिक स्थलों के विकास के लिए पूरी निष्ठा से काम कर रही है। हालांकि, उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनावी वर्ष में की गई कई घोषणाएं व्यावहारिक नहीं पाई गईं, जिसके कारण उन्हें लागू करना संभव नहीं हो सका।
कोटा के इन मंदिरों पर हुई चर्चा
विधायक चेतन पटेल कोलाना द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए मंत्री ने कोटा जिले के तीन प्रमुख मंदिरों की स्थिति स्पष्ट की:
| मंदिर का नाम | स्थान | स्वीकृत राशि | वर्तमान स्थिति |
| ठाकुर जी गोपालजी महाराज | ढीपरी चम्बल (खातौली) | 383.33 लाख | स्वीकृति जारी, निविदा अटकी |
| प्राचीन शिव मंदिर | पीपल्दा समेल (सुल्तानपुर) | 248.14 लाख | स्वीकृति जारी, निविदा अटकी |
| श्री चमलेश्वर महादेव | ककरावदा (इटावा) | शून्य | कोई स्वीकृति जारी नहीं हुई |
आचार संहिता और वित्त विभाग की ‘टीप’ बनी बाधा
मंत्री कुमावत ने बताया कि 13 जून 2023 को बजट घोषणा की अनुपालना में पर्यटन विकास कोष से राशि स्वीकृत की गई थी। लेकिन इसके बाद विधानसभा चुनाव की आदर्श आचार संहिता लागू हो गई, जिससे कार्यों की निविदा (टेंडर) जारी नहीं हो सकी। चुनाव के बाद 22 दिसंबर 2023 को वित्त विभाग द्वारा जारी ‘अशासकीय टीप’ के कारण इन कार्यों के क्रियान्वयन पर रोक लग गई।
अराजकीय मंदिरों को लेकर स्पष्टीकरण
सदन के पटल पर रखे गए विवरण के अनुसार, कोटा जिले में कुल 24 धार्मिक स्थल देवस्थान विभाग के अधीन हैं। विधायक द्वारा पीपल्दा क्षेत्र के मंदिरों को विभाग के अधीन लाने के सवाल पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि:
- पीपल्दा के प्राचीन धार्मिक स्थल वर्तमान में अराजकीय हैं।
- मौजूदा नियमों में अराजकीय मंदिरों को सरकारी नियंत्रण (देवस्थान विभाग) में लेने का कोई प्रावधान नहीं है।
भविष्य की योजना: ऋण प्रक्रिया है जारी
देवस्थान मंत्री ने आश्वासन दिया कि ‘राजस्थान टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर कैपेसिटी बिल्डिंग फण्ड’ के माध्यम से ऋण लेने की प्रक्रिया वर्तमान में चल रही है। ऋण प्राप्त होने के बाद इन मंदिरों के विकास और लंबित कार्यों के संबंध में उचित और अग्रिम निर्णय लिया जाएगा।
