जयपुर। राजस्थान में पारदर्शी शासन के दावों के बीच ‘राजस्थान संवाद’ के आउटडोर मीडिया फ्लेक्स बैनर टेंडर में एक बड़े खेल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। आरोप है कि सरकारी टेंडर की शर्तों को किसी ‘खास’ को फायदा पहुँचाने के लिए इस कदर मरोड़ा गया कि अब विभाग की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
चर्चा है कि एक रसूखदार प्रवक्ता के सगे भाई की फर्म ‘स्वस्तिक प्रिंटर्स’ को उपकृत करने के लिए टेंडर की मूल शर्तों में रातों-रात भारी ढील दे दी गई। जिस टेंडर के लिए पहले कड़े मापदंड तय थे, उन्हें अचानक इतना लचीला बना दिया गया कि अनुभवहीन फर्में भी रेस में शामिल हो सकें।
शर्तों में ‘बड़ा खेल’, आंकड़ों की बाजीगरी
विभागीय सूत्रों और आरोपों के अनुसार, टेंडर की योग्यता को पूरी तरह बदल दिया गया है:
-अनुभव की भारी कटौती: पहले जहाँ 2 करोड़ रुपये के कार्य अनुभव की अनिवार्य शर्त थी, उसे घटाकर महज 20 लाख रुपये कर दिया गया।
-समय सीमा का खात्मा: अनुभव की अवधि के लिए तय 3 साल की अनिवार्य शर्त को भी हटा दिया गया है, ताकि नई और ‘पसंदीदा’ फर्मों के लिए रास्ता साफ हो सके।
भ्रष्टाचार के पुराने साये और बेखौफ अधिकारी:-
हैरानी की बात यह है कि एक तरफ प्रदेश में महेश जोशी जैसे कद्दावर नाम इसी तरह के ‘पुलिंग’ और टेंडर घोटालों के आरोपों के चलते जांच के घेरे में हैं, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों की हिम्मत की दाद देनी होगी कि वे अभी भी नियमों को ताक पर रखकर “करीबियों” के लिए रेड कार्पेट बिछा रहे हैं।
“क्या सरकारी निविदाएं अब काबिलियत के बजाय ‘कनेक्शन’ के आधार पर तय होंगी? अगर अनुभव और टर्नओवर की शर्तों को अपनों के हिसाब से बदला जाएगा, तो निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का क्या होगा?”
निष्पक्ष जांच की दरकार
इस पूरे प्रकरण ने सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर सवालिया निशान लगा दिया है। “Expose Now” मांग करता है कि:
-इस टेंडर प्रक्रिया की तुरंत उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच हो।
-शर्तों में बदलाव के पीछे के तर्कों को सार्वजनिक किया जाए।
-दोषी अधिकारियों और फर्म के बीच के गठजोड़ का पर्दाफाश हो।
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now
