भारत की लगभग 80% आबादी इस समय एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रही है जिसे अक्सर ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है—यह है विटामिन-डी की कमी। हमारी बदलती जीवनशैली, वातानुकूलित कमरों में घंटों बिताने की आदत और धूप से बढ़ती दूरी ने हमें शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर कर दिया है। डॉक्टरों के अनुसार, विटामिन-डी की कमी केवल हड्डियों को ही कमजोर नहीं बनाती, बल्कि यह बालों के झड़ने, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) और डिप्रेशन जैसी गंभीर मानसिक समस्याओं का भी प्रमुख कारण है। चूंकि हमारे शरीर के लिए यह विटामिन एक हार्मोन की तरह काम करता है, इसलिए इसकी सही मात्रा का ज्ञान होना हर आयु वर्ग के लिए अनिवार्य है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एक व्यक्ति को रोजाना कितने विटामिन-डी की आवश्यकता है, यह उसकी उम्र पर निर्भर करता है। नवजात शिशुओं (0 से 1 वर्ष) को प्रतिदिन लगभग 400 IU की जरूरत होती है। वहीं, 1 से 70 वर्ष तक के बच्चों, युवाओं और वयस्कों के लिए यह मात्रा 600 IU निर्धारित की गई है। बुजुर्गों (70 वर्ष से अधिक) में शरीर की पोषक तत्व सोखने की क्षमता कम हो जाती है, इसलिए उन्हें प्रतिदिन 800 IU विटामिन-डी लेने की सलाह दी जाती है। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह ऑस्टियोपोरोसिस और मांसपेशियों में पुराने दर्द का कारण बन सकता है।

विटामिन-डी का सबसे प्राकृतिक और मुफ्त स्रोत सूरज की रोशनी है, लेकिन खान-पान के जरिए भी इसकी कमी को पूरा किया जा सकता है। साल्मन और ट्राउट जैसी फैटी फिश विटामिन-डी और ओमेगा-3 का बेहतरीन भंडार हैं। शाकाहारी विकल्पों में सफेद मशरूम (खासकर यूवी-ट्रीटेड) एकमात्र ऐसा पौधा-आधारित स्रोत है जिसमें विटामिन-डी पाया जाता है। इसके अतिरिक्त, अंडे की जर्दी और फोर्टिफाइड दूध (जिसमें ऊपर से विटामिन-डी मिलाया गया हो) को डाइट में शामिल कर आप इस पोषण संबंधी कमी को दूर कर सकते हैं। अपनी सेहत को नजरअंदाज न करें और पर्याप्त धूप के साथ इन सुपरफूड्स का मेल जरूर बनाएं।
