जोधपुर RTE घोटाला: बाबू ने डीईओ के फर्जी हस्ताक्षर कर रची करोड़ों की साजिश, 50 स्कूलों में 12 करोड़ के गबन की आशंका

जोधपुर: राजस्थान के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जोधपुर जिले में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत मिलने वाले सरकारी फंड में करीब 12 करोड़ रुपये के गबन की आशंका जताई जा रही है। एक विशेष जांच रिपोर्ट के अनुसार, विभाग के एक लिपिक (बाबू) ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के फर्जी हस्ताक्षर कर 50 स्कूलों की भौतिक सत्यापन रिपोर्ट तैयार कर दी और करोड़ों रुपये की राशि का दुरुपयोग किया।

साजिश का पर्दाफाश: 1.08 करोड़ का ‘वर्चुअल’ फर्जीवाड़ा

जांच में सामने आया है कि एकलखोरी-बासनी क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों के नाम पर भारी हेराफेरी की गई है। अकेले एकलखोरी स्कूल के शिक्षकों के नाम पर 1.06 करोड़ रुपये का फर्जी भुगतान दिखाया गया है। इसी तरह बासनी स्कूल के शिक्षकों के नाम पर 77 लाख रुपये से अधिक का गबन थोपा गया है। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी लिपिक ने बिना किसी वास्तविक जांच के भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड कर दी।

शिक्षकों को गलत नोटिस और विभागीय घेराव

इस घोटाले का सबसे विवादास्पद पहलू यह है कि विभाग ने उन शिक्षकों को नोटिस जारी कर दिए हैं, जिनका इस पूरी प्रक्रिया से कोई लेना-देना नहीं था। शिक्षकों के संगठनों ने जब जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का घेराव किया, तब विभाग ने स्वीकार किया कि यह सारा ‘खेल’ एक निलंबित लिपिक द्वारा किया गया है। वर्तमान में संबंधित अधिकारी ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है।

उच्चस्तरीय जांच की मांग और सामाजिक आक्रोश

शिक्षक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एफएसएल (FSL) जांच की मांग की है ताकि फर्जी हस्ताक्षरों की पुष्टि हो सके। इस बीच, सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री और अन्य उच्च अधिकारियों को टैग करते हुए एक अभियान भी चल रहा है। नागरिकों का आरोप है कि सरकारी तंत्र के विभिन्न विभागों में भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़ा गहराई तक फैला हुआ है।

जांच एजेंसियों की दखल की मांग

प्रदेश में बढ़ते भ्रष्टाचार के मामलों को देखते हुए अब राजस्थान के तमाम विभागों की जांच सीबीआई (CBI), एसीबी (ACB) और एसओजी (SOG) जैसी बड़ी एजेंसियों से कराने की मांग जोर पकड़ रही है। जागरूक नागरिकों का कहना है कि भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़ा और अन्य अवैध गतिविधियों में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि शासन में पारदर्शिता बनी रहे।

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