बीकानेर। राजस्थान के शिक्षा विभाग ने राज्य में नामांकन वृद्धि के प्रति उदासीनता बरतने वाले अधिकारियों और संस्था प्रधानों के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर द्वारा जारी एक आधिकारिक आदेश के तहत राज्य के 175 सरकारी स्कूलों के प्रधानाचार्यों को ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी किया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि छात्र संख्या और शिक्षा की गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
क्यों हुई यह कार्रवाई?

निदेशालय द्वारा जारी पत्र (क्रमांक: शिविरा/माध्य/गुण. एवं प्रशि. अनु./प्रवेशोत्सव/22492/2026-27) के अनुसार, मुख्यमंत्री शिक्षित राजस्थान अभियान के अंतर्गत संचालित ‘प्रवेशोत्सव’ कार्यक्रम की समीक्षा की गई थी। शाला दर्पण पोर्टल और डिजिटल प्रवेशोत्सव ऐप से प्राप्त डेटा के विश्लेषण में निम्नलिखित कमियां पाई गईं:
- नामांकन में गिरावट: कई विद्यालयों में पिछले वर्ष की तुलना में छात्र संख्या में कमी दर्ज की गई है।
- प्रगति रिपोर्ट का अभाव: निर्धारित लक्ष्यों के बावजूद कई संस्था प्रधानों ने नामांकन वृद्धि में विभागीय अपेक्षानुरूप कार्य नहीं किया।
- दिशानिर्देशों की अवहेलना: विभाग द्वारा पूर्व में 05.03.2026, 25.03.2026 और 24.04.2026 को जारी किए गए विस्तृत निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
3 दिन के भीतर देना होगा जवाब
माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट (IAS) ने इस लापरवाही को अत्यंत खेदजनक और विभागीय फ्लैगशिप कार्यक्रम के प्रति उदासीनता का प्रतीक बताया है। नोटिस में संस्था प्रधानों को निम्नलिखित निर्देश दिए गए हैं:
- लक्ष्यों की प्राप्ति: आगामी 03 दिवस में नामांकन लक्ष्यों को शत-प्रतिशत पूरा करना सुनिश्चित करें।
- ई-मेल पर स्पष्टीकरण: विलंब या लापरवाही के ठोस कारणों के साथ अपना स्पष्टीकरण rajpraveshotsav@gmail.com पर भेजें।
- कठोर दंड की चेतावनी: यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो संबंधित प्रधानाचार्यों के विरुद्ध “राजस्थान असैनिक सेवाएं (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियम-1958” के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
अभियान का उद्देश्य
विभाग का लक्ष्य 3 से 18 वर्ष तक के उन सभी बालक-बालिकाओं को चिह्नित करना है जो अभी भी शिक्षा से वंचित हैं। डिजिटल प्रवेशोत्सव ऐप के माध्यम से इन बच्चों का सर्वे कर उन्हें विद्यालय में नामांकित करना और उनका ठहराव (Retention) सुनिश्चित करना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
निदेशालय का संदेश: नामांकन लक्ष्यों में कोताही बरतने वाले संस्था प्रधानों पर गाज गिरना तय है। विभाग का मुख्य उद्देश्य राज्य के प्रत्येक बच्चे को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना है।
