राजस्थान के खाद्य विभाग में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहाँ प्रशासनिक और विभागीय मुद्दों पर चर्चा के लिए बुलाई गई सरकारी बैठक को एक निजी संस्था के प्रचार मंच के रूप में इस्तेमाल किया गया। जयपुर के दुर्गापुरा स्थित राज्य कृषि प्रबंध संस्थान में आयोजित इस बैठक में न केवल अधिकारियों को एक निजी फाउंडेशन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया, बल्कि मौके पर ही रजिस्ट्रेशन के लिए QR कोड भी प्रदर्शित किए गए।
बैठक के बीच निजी कोर्स की मार्केटिंग
जानकारी के अनुसार, खाद्य विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में जिला रसद अधिकारियों और प्रबंधकों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य विभागीय कामकाज की समीक्षा करना था। लेकिन, चर्चा के बीच में ही एक निजी फाउंडेशन के प्रतिनिधि वहां पहुंचे और उन्होंने अधिकारियों को अपने पाठ्यक्रमों (Courses) के बारे में जानकारी देना शुरू कर दिया।
हैरानी की बात यह रही कि सरकारी परिसर के भीतर ही ‘ऑन स्पॉट रजिस्ट्रेशन’ की व्यवस्था की गई। अधिकारियों को बताया गया कि इन कोर्सेज की फीस 4,000 रुपये से लेकर 26,000 रुपये तक है। रजिस्ट्रेशन के लिए बकायदा ऑडिटोरियम में क्यूआर कोड लगाए गए ताकि अधिकारी तुरंत भुगतान कर सकें।
प्रमुख सचिव ने खुद की पैरवी
विवाद तब और गहरा गया जब बैठक की अध्यक्षता कर रहे प्रमुख सचिव ने खुद मंच से इस निजी फाउंडेशन का समर्थन किया। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों से कहा, “मैं पिछले 22 सालों से इस फाउंडेशन के कोर्सेज कर रहा हूँ, आप सभी को भी इससे जुड़ना चाहिए और ये कोर्स करने चाहिए।” एक जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी द्वारा सरकारी बैठक में किसी निजी संस्थान के सशुल्क कोर्सेज का इस तरह प्रचार करना अब चर्चा का विषय बन गया है।
विवाद बढ़ा तो साधी चुप्पी
जब यह मामला तूल पकड़ने लगा और बैठक के विवरण बाहर आए, तो इसे लेकर सवाल उठने शुरू हो गए। विभागीय बैठक में किसी निजी संस्था को व्यवसायिक गतिविधियों की अनुमति कैसे दी गई, इसे लेकर प्रशासनिक हलकों में नाराजगी है।
इस संबंध में जब प्रमुख सचिव से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने इसे आंतरिक मामला बताते हुए कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। उन्होंने केवल इतना कहा, “यह विभाग की अंदरूनी बैठक थी और मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।”
