Expose Now Exclusive: वक्फ बोर्ड में भ्रष्टाचार का खेल, 8 लाख की घूस मांगता सीनियर रीडर बेनकाब

डीडवाना/जयपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने राजस्थान वक्फ अधिकरण (ट्रिब्यूनल), जयपुर के एक सीनियर रीडर के खिलाफ भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला दर्ज किया है। आरोपी ने एक पैतृक संपत्ति के विवाद में परिवादी के पक्ष में निर्णय करवाने के बदले लाखों रुपये की रिश्वत और एक दुकान की मांग की थी।

  1. मुख्य आरोपी और मामला

-आरोपी का विवरण: सलावत खां पुत्र भंवरू खां, निवासी छापरी खुर्द, डीडवाना।
-पद: सीनियर रीडर, राजस्थान वक्फ अधिकरण, जयपुर।
-पीड़ित/परिवादी: मकसूद अली पुत्र कासीम अली, निवासी डीडवाना।
-विवादित संपत्ति: डीडवाना के खसरा नंबर 2462 में स्थित पैतृक जमीन और मकान, जिस पर वर्ष 2003 से वक्फ बोर्ड न्यायालय में केस चल रहा है।

  1. रिश्वत का खेल: 20 लाख से 8 लाख तक का सौदा

-शुरुआती मांग: आरोपी सलावत खां ने केस का निपटारा मकसूद अली के पक्ष में करने के लिए सबसे पहले 20 लाख रुपये की मांग की थी।
-अंतिम सौदा: एसीबी द्वारा की गई सत्यापन कार्यवाही के दौरान, आरोपी 8 लाख रुपये नगद और विवादित जमीन में से स्वयं के लिए एक दुकान की जमीन लेने पर सहमत हुआ।
-आरोपी की चाल: सलावत खां ने आश्वासन दिया था कि वह 18 फरवरी 2026 को फैसला सुनाकर पहले आदेश की कॉपी देगा और उसके बाद रिश्वत की राशि दो किश्तों में लेगा।

  1. ट्रेप से पहले ही सतर्क हुआ भ्रष्टाचार का खिलाड़ी

-भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने जाल बिछाया था, लेकिन आरोपी को विभाग की कार्यवाही की भनक लग गई।
-व्हाट्सएप कॉल से इनकार: 17 फरवरी 2026 की रात को आरोपी ने सह-परिवादी अयुब खान को व्हाट्सएप कॉल करके पैसे लेने से स्पष्ट मना कर दिया, क्योंकि उसे संदेह हो गया था।
-एसीबी की कार्यवाही: हालांकि रंगे हाथों गिरफ्तारी नहीं हो सकी, लेकिन एसीबी ने पहले ही डिजिटल टेप रिकॉर्डर के जरिए रिश्वत की मांग का पुख्ता सत्यापन (Verification) कर लिया था।

  1. कानूनी शिकंजा और FIRदर्ज धाराएं:

-भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत मामला दर्ज।
-जांच अधिकारी: इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच वन्दना भाटी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, एसीबी अजमेर को सौंपी गई है।
-साक्ष्य: एसीबी ने वार्ता की ट्रांसक्रिप्ट, मूल मेमोरी कार्ड और पेन ड्राइव को साक्ष्य के रूप में जब्त किया है।

Expose Now की राय
वक्फ बोर्ड जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में बैठे जिम्मेदार अधिकारी जब न्याय को ही सौदेबाजी का हिस्सा बना लें, तो आम आदमी का भरोसा डगमगाना लाजमी है। हालांकि आरोपी चालाकी से ट्रेप से बच गया, लेकिन एसीबी के पास मौजूद डिजिटल सबूत उसे सलाखों के पीछे भेजने के लिए काफी हैं।

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