राजस्थान के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने अजमेर जिले के किशनगढ़ तहसील में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है । ब्यूरो ने पटवार हल्का खण्डाच के पटवारी विश्राम जाट के खिलाफ जमीन के नामान्तकरण (Mutation) खोलने के बदले रिश्वत मांगने के आरोप में मामला दर्ज किया है ।
मामले का विवरण
शिकायतकर्ता दौलत सिंह पुत्र केदार सिंह ने एसीबी को दी अपनी रिपोर्ट में बताया कि उनके पिता ने 21 अगस्त 2025 को ग्राम टिहरी में करीब 3 बीघा 16 बिस्वा कृषि भूमि खरीदी थी । इस भूमि का नामान्तकरण खुलवाने के लिए जब वे पटवारी विश्राम जाट से मिले, तो उसने ₹4000 की रिश्वत की मांग की । शिकायतकर्ता ने जब पटवारी को टोकते हुए कहा कि सरकारी शुल्क तो केवल 50-60 रुपये ही लगता है, तो आरोपी ने स्पष्ट कह दिया कि ₹4000 देने पर ही काम होगा ।
सत्यापन के दौरान हुआ खुलासा
एसीबी द्वारा 7 अक्टूबर 2025 को की गई सत्यापन वार्ता के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए । रिकॉर्ड की गई बातचीत के अनुसार, आरोपी पटवारी ने यह स्वीकार किया कि उसने पूर्व में ₹1500 प्राप्त कर लिए हैं । बातचीत में पटवारी ने कहा, “मैंने आपको चार (हजार) बताया था, चार में से पंद्रह सौ दे दिए” । इसके बाद उसने शेष ₹1500 की और मांग की ।
कानूनी कार्रवाई
एसीबी ने 19 नवंबर 2025 को ट्रैप की योजना बनाई थी, लेकिन उस समय आरोपी ने रिश्वत की राशि लेने से इनकार करते हुए कहा कि “बाद में देखेंगे” । हालांकि, सत्यापन के दौरान रिश्वत की मांग की पुष्टि होने और पहले ही ₹1500 लेने की बात स्वीकार करने के आधार पर, एसीबी ने आरोपी पटवारी विश्राम जाट के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है ।
इस मामले की विस्तृत जांच अब निरीक्षक नरेंद्र सिंह राठौड़ को सौंपी गई है । पूरी कार्रवाई भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, जयपुर के पुलिस अधीक्षक पीयूष दीक्षित के निर्देशन में संपन्न हुई ।
