जयपुर: राज हेल्थ पोर्टल पर डेटा अपलोड, फिर भी 350 कर्मचारी APO; बिना ड्यूटी करोड़ों का वेतन डकार रहा तंत्र

राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में प्रशासनिक सुस्ती और फाइलों के मकड़जाल का एक बड़ा मामला सामने आया है। विभाग की लापरवाही के कारण करीब 350 अराजपत्रित कर्मचारी पिछले आठ से दस महीनों से ‘एपीओ’ (Await Posting Order) चल रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि बिना किसी कार्यस्थल के ये कर्मचारी घर बैठे सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये का वेतन उठा रहे हैं। एक ओर जहाँ सरकारी खजाने पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के अस्पतालों में स्टाफ की भारी कमी के चलते मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार, विभाग ने लगभग दस महीने पहले प्रदेश के विभिन्न जिलों से अधिशेष कर्मचारियों की जानकारी मांगी थी। करीब आठ महीने पहले इन कर्मचारियों का पूरा डेटा ‘राज हेल्थ पोर्टल’ पर भी अपलोड कर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद अब तक इन्हें पदस्थापन (Posting) नहीं दिया गया है। इन कर्मचारियों में नर्सिंग, फार्मासिस्ट, पैरामेडिकल और अन्य चिकित्सकीय संवर्ग के कर्मी शामिल हैं, जिनकी सेवाएँ अस्पतालों के सुचारू संचालन के लिए बेहद जरूरी मानी जाती हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि पोस्टिंग को लेकर फाइलें तैयार हैं और स्वीकृति भी मिल चुकी है, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाने के कारण मामला महीनों से लंबित पड़ा है।

आमतौर पर एपीओ के मामलों में कुछ ही हफ्तों के भीतर पोस्टिंग दे दी जाती है, लेकिन इस मामले में साल भर का समय बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इस देरी से न केवल सरकारी धन की बर्बादी हो रही है, बल्कि कर्मचारियों में भी भारी असंतोष है। लंबे समय तक कार्य से दूर रहने के कारण ये कर्मचारी अपने नियमित अनुभव और कार्य कुशलता से भी वंचित हो रहे हैं। अस्पतालों में मैनपावर की कमी और दूसरी ओर योग्य कर्मचारियों का बिना काम के बैठे रहना, विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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