जयपुर: राजस्थान में सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा-2021 के पेपर लीक मामले में स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है. लंबे समय से फरार चल रहे और 10 हजार रुपये के इनामी आरोपी सहायक लेखाधिकारी (Assistant Accounts Officer) नागेश कुमार यादव को SOG ने गिरफ्तार कर लिया है. इस गिरफ्तारी के बाद राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के भीतर फैले भ्रष्टाचार और पेपर लीक के मजबूत नेटवर्क की कड़ियां एक बार फिर से बेनकाब हो गई हैं.
एसओजी के एडीजी (ADG) विशाल बंसल ने इस पूरी कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि इस महाघोटाले में जांच एजेंसियां बेहद मुस्तैदी से काम कर रही हैं और नागेश की गिरफ्तारी के बाद अब तक कुल 144 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है.
7.50 लाख रुपये में सौदा: परीक्षा से पहले रटवाया पूरा सॉल्व्ड पेपर
SOG की कड़ाई से की गई पूछताछ और जांच में सामने आया है कि आरोपी नागेश कुमार यादव ने अपने भाई सुरजीत सिंह यादव को सब-इंस्पेक्टर बनाने के लिए एक बड़ा और शातिर सौदा किया था. नागेश ने अपने ही एक सहकर्मी पुरुषोत्तम दाधीच से महज 7.50 लाख रुपये में एसआई भर्ती का ओरिजिनल पेपर खरीदा था.
इसके बाद, परीक्षा से ठीक पहले नागेश ने अपने भाई सुरजीत को एक सुरक्षित जगह पर ले जाकर पूरा सॉल्व्ड पेपर (हल किया हुआ प्रश्नपत्र) रटवाया. इस अवैध मदद की बदौलत भाई सुरजीत सिंह यादव ने परीक्षा में ऐसा प्रदर्शन किया जो आम अभ्यर्थियों के लिए अकल्पनीय था. वह राज्य स्तर की मुख्य मेरिट सूची में 18वें स्थान (Rank 18) पर चयनित होकर टॉपर बन बैठा.
अविश्वसनीय नंबरों ने खोला राज: हिंदी में आए 200 में से 190.79 अंक
SOG को सुरजीत के परीक्षा परिणाम से पेपर लीक के पुख्ता और वैज्ञानिक सबूत मिले हैं. जब सुरजीत की मार्कशीट को खंगाला गया, तो जांच अधिकारी भी हैरान रह गए:
- हिंदी (Paper-1): सुरजीत को 200 में से 190.79 अंक प्राप्त हुए.
- सामान्य ज्ञान (Paper-2): उसे 200 में से 158.27 अंक मिले.
इतने असाधारण और संदेहास्पद नंबरों ने SOG के शक को यकीन में बदल दिया. जब कड़ियों को जोड़ा गया, तो पेपर लीक के इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश हो गया.
RPSC के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा तक जुड़े हैं तार
एसओजी की जांच में जो सबसे चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, वो यह कि इस पेपर लीक के तार सीधे आरपीएससी (RPSC) के शीर्ष स्तर तक जुड़े हुए थे. आरोप है कि यह प्रश्नपत्र सबसे पहले आरपीएससी के तत्कालीन सदस्य बाबूलाल कटारा के जरिए आयोग के दफ्तर से बाहर आया था.
कटारा से बाहर आने के बाद यह पेपर कुंदन कुमार लाटा नाम के शख्स के पास पहुंचा. कुंदन से यह पर्चा पुरुषोत्तम दाधीच तक आया और फिर अंत में नागेश कुमार यादव ने इसे 7.50 लाख रुपये में खरीदकर अपने भाई तक पहुंचाया. SOG की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से पूरे सिंडिकेट की परतें एक-एक कर खुल रही हैं.
सिंडिकेट पर SOG का शिकंजा, और भी गिरफ्तारियां संभव
एडीजी विशाल बंसल के मुताबिक, साल 2021 की इस सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा को लेकर एसओजी लगातार मुस्तैदी से जांच कर रही है. नागेश कुमार की गिरफ्तारी के बाद भी टीम शांत नहीं बैठी है. SOG इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्ध चेहरों, बिचौलियों और अनुचित लाभ उठाने वाले अभ्यर्थियों की तलाश में लगातार अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर रही है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ और रसूखदार चेहरों की गिरफ्तारी और बड़े खुलासे हो सकते हैं.