-करोड़ों के घोटालों में लिप्त 13 इंजीनियर्स व फर्मों पर 2 साल बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
-मैसर्स जगदीश प्रसाद अग्रवाल, मैसर्स जी.ए.इन्फ्रा पर किसकी हो रही है मेहरबानी?
-मामले में कार्रवाई के लिए मुख्यालय के 35 से ज्यादा आदेश भी रद्दी की टोकरी में
-क्या PHED के नए प्रमुख शासन सचिव करेंगे उदयपुर संभाग के भ्रष्टाचार की ‘सफाई’?
जयपुर। राजस्थान में ‘हर घर जल’ पहुंचाने के संकल्प वाले जल जीवन मिशन (JJM) में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका सनसनीखेज खुलासा विभाग के ही अधिकारियों के पत्रों से हो रहा है। जलदाय विभाग के कुछ ईमानदार अधिकारी इन फर्जीवाड़ा व भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करना चाहते हैं, लेकिन इसी पीएचईडी (PHED) के कुछ आलाधिकारी और मंत्रालय के कुछ अधिकारी इन घोटालेबाजों के लिए 2 साल से ‘सुरक्षा कवच’ बनकर बचाने में जुटे हुए है। इसी का नतीजा है कि करोड़ों का भ्रष्टाचार करने वाले इन 13 इंजीनियर्स व ठेका कंपनियों के खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। EXPOSE NOW के पास मौजूद दस्तावेज़ों से साफ है कि उदयपुर और बांसवाड़ा में हुए करोड़ों के घोटाले में बड़े चेहरों को बचाने के लिए विभाग के भीतर ही एक संगठित खेल चल रहा है। उदयपुर संभाग में करोड़ों के खेल और दोषी अधिकारियों को बचाने की कवायद पर पेश है EXPOSE NOW की विशेष रिपोर्ट-

PHED में कौन बना हुआ है करोड़ों के घोटालेबाजों का ‘कवच’ ?
लंबे समय से PHED मुख्य अभियंता, जेजेएम द्वारा 35 से ज्यादा बार पत्र लिखकर इन दोषी 13 इंजीनियर्स व ठेका फर्मों के खिलाफ RTPP नियमों व 16 सीसीए में कार्रवाई करने के प्रस्ताव बनाकर भेजने के निर्देश दिए गए, लेकिन शैतान सिंह, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, रीजन-उदयपुर द्वारा आज दिनांक तक कार्रवाई नहीं की गई। पिछले दिनों एक बार फिर PHED मुख्य अभियंता, JJM द्वारा अतिरिक्त मुख्य अभियंता, रीजन-उदयपुर को लिख गए पत्र से साफ हो रहा है कि जलदाय विभाग में अनुशासन नाम की कोई चीज नहीं बची है। अब सवाल उठता है कि आखिर एक अतिरिक्त मुख्य अभियंता में इतनी हिम्मत कहां से आ गई कि उसके द्वारा मुख्य अभियंता, जेजेएम के आदेशों की ही पालना नहीं की जा रही है। सूत्रों के अनुसार उदयपुर संभाग के प्रकरणों को PHED के कुछ उच्चाधिकारियों के साथ ही मंत्रालय का भी पूरा संरक्षण मिला हुआ है, इसलिए ही अतिरिक्त मुख्य अभियंता, रीजन-उदयपुर द्वारा मुख्य अभियंता, JJM के आदेशों की पालना नहीं की जा रही है।

जांच में करोड़ों का फर्जीवाड़ा उजागर, लेकिन कार्रवाई ‘शून्य’
मुख्य अभियंता (JJM) द्वारा अतिरिक्त मुख्य अभियंता (ACE), उदयपुर को लिखे गए पत्र (क्रमांक 1921-24) ने विभाग की कलई खोल दी है। जांच दल ने बांसवाड़ा के गढ़ी व अरथूना और उदयपुर के मावली व कोटड़ा ब्लॉक में फिजिकल वेरिफिकेशन के दौरान भारी धांधली पकड़ी थी। जांच में 2 अधिशाषी अभियंता (EE), 4 सहायक अभियंता (AEN) और 7 कनिष्ठ अभियंता (JEN) सीधे तौर पर जिम्मेदार पाए गए थे। हैरानी की बात है कि विभाग ने केवल 1 EE (धनाराम चौहान), 1 AEN (श्यामलाल चरपोटा) और 2 JEN (नितीश उपाध्याय व पुरुषोत्तम परमार) के खिलाफ ही कार्रवाई का प्रस्ताव भेजा, जिसमें भी इतनी खामियां है कि उनके खिलाफ भी कोई कार्रवाई होगी ही नहीं। बाकी बचे 9 प्रभावशाली इंजीनियर्स को बचाने के लिए बड़ा खेल किया जा रहा है, जिसमें अधिशाषी अभियंता बन्नेसिंह मीणाए एईएन पायल व्यास, एईएन मनोहर सिंह, एईएन मयंक डामोर, जेईएन दीपक जोशी, जेईएन विनोद कुमार, जेईएन दीपक शर्मा, जेईएन प्रितेश जैन व जेईएन राहुल वैष्णव का नाम शामिल है। विभाग ने इनके खिलाफ कार्रवाई न करने का कोई ठोस कारण तक नहीं दिया है।
डिफॉल्टर फर्मों पर ‘धनवर्षा’ की तैयारी?
आरटीपीपी (RTPP) एक्ट के तहत जिन ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाना था, उन्हें अब भुगतान (Payment) देने का रास्ता साफ किया जा रहा है। पत्र में साफ निर्देश हैं कि जी.ए. इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड और मैसर्स जे.पी. अग्रवाल जैसी डिफॉल्टर फर्मों के रुके हुए पेमेंट जारी किए जा सकते हैं। भुगतान से पहले केवल 5% से 10% काम के वेरिफिकेशन की औपचारिकता पूरी करने को कहा गया है, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने जैसा है।
मुख्यालय के आदेश रद्दी की टोकरी में!
दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि मुख्यालय ने पिछले एक साल में दर्जनों बार (मई 2024 से अगस्त 2025 तक) रिमाइंडर भेजे, लेकिन उदयपुर संभाग के अधिकारियों ने उन्हें अनसुना कर दिया। “बार-बार निर्देश देने के बाद भी कार्रवाई न करना घोर लापरवाही और उच्च कार्यालयों की अवहेलना है, जो कि कर्तव्य के प्रति गंभीर उदासीनता दर्शाता है।”
EXPOSE NOW के तीखे सवाल: जवाब कौन देगा?
-फाइलें दबाने का मास्टरमाइंड कौन? जब 16 CCA के तहत चार्जशीट तैयार थी, तो उन्हें संबंधित अधिकारियों को तामील (Serve) क्यों नहीं कराया गया?
-नेताओं का दबाव या कमीशन का खेल? जन प्रतिनिधियों की ‘सिफारिश’ का हवाला देकर डिफॉल्टर फर्मों को भुगतान करने की इतनी जल्दी क्यों है?
-क्या करेंगे नए मुखिया? क्या PHED के नए प्रमुख शासन सचिव इस संगठित भ्रष्टाचार (Organized Corruption) के सिंडिकेट को तोड़ पाएंगे?
उदयपुर और बांसवाड़ा की जनता आज भी नल में पानी आने का इंतज़ार कर रही है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी फाइलों को अलमारियों में दफन करने में मशगूल हैं। क्या दोषियों पर RTPP एक्ट के तहत कार्रवाई होगी या यह मामला भी ‘ठंडे बस्ते’ की भेंट चढ़ जाएगा?
ब्यूरो रिपोर्ट, EXPOSE NOW
