गुलाबी नगरी में बढ़ते ट्रैफिक के दबाव और आए दिन लगने वाले जाम से निजात दिलाने के लिए प्रशासन ने ‘सुगम पथ अभियान’ के तहत कमर कस ली है। इस अभियान के जरिए यादगार (अजमेरी गेट) से सांगानेर तक प्रस्तावित मॉडल ट्रैफिक कॉरिडोर को धरातल पर उतारने की तैयारी है। प्रथम चरण में यादगार से नारायण सिंह सर्किल तक के 3 किलोमीटर के दायरे को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त बनाने की कार्रवाई तेज कर दी गई है।
अब थड़ी-ठेलों के लिए कोई जगह नहीं ट्रैफिक पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि इस मार्ग पर अब सड़क किनारे कोई भी थड़ी या ठेला खड़ा नहीं होने दिया जाएगा। सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के आसपास के क्षेत्र में इसका असर दिखने भी लगा है, जहाँ से थड़ी-ठेले हटाए जाने के बाद सड़क चौड़ी और यातायात सुगम नजर आने लगा है।
नो-पार्किंग और सख्त निगरानी पूरे मार्ग पर ट्रैफिक पुलिस ने डिवाइडर और सड़क के किनारों पर कोन लगाकर ‘नो-पार्किंग’ व्यवस्था लागू कर दी है। इसके साथ ही:
- CCTV निगरानी: करीब 3 किमी लंबे इस खंड की निगरानी सीसीटीवी कैमरों से की जा रही है।
- लेफ्ट फ्री लेन: नारायण सिंह क्षेत्र सहित तीन प्रमुख स्थानों पर ‘लेफ्ट फ्री लेन’ विकसित की जा रही है ताकि मुड़ने वाले वाहनों को जाम न झेलना पड़े।
- अवैध प्याऊ पर कार्रवाई: जेडीए (JDA) ने फुटपाथ निर्माण की रिपोर्ट तैयार कर ली है और मार्ग में आने वाली अवैध प्याऊ को भी हटाया जाएगा।
- सीमित बस स्टॉप: अनावश्यक रुकावटों को कम करने के लिए बस स्टॉप की संख्या भी सीमित की गई है।
चुनौती: 10 साल में 8 अभियान, पर नतीजा सिफर? टोंक रोड पर अतिक्रमण की समस्या किसी ‘अमर बेल’ जैसी हो गई है। आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले 10 वर्षों में निगम, जेडीए और पुलिस ने मिलकर यहाँ 8 बड़े अभियान चलाए हैं, लेकिन विडंबना यह है कि इनका असर केवल 6 से 7 दिनों तक ही रहता है। वर्ष 2016 से लेकर 2025 तक हर साल कार्रवाई हुई, लेकिन कुछ ही समय बाद थड़ी-ठेले फिर से सड़कों पर काबिज हो जाते हैं।
अप्रैल 2026: एक नई उम्मीद इस बार एडिशनल एसपी रानू शर्मा के नेतृत्व में एक विशेष टीम इस अभियान की मॉनिटरिंग कर रही है। प्रशासन का लक्ष्य 13 किमी लंबे इस पूरे कॉरिडोर को ‘फ्री मूवमेंट जोन’ बनाना है। अब देखना यह होगा कि अप्रैल 2026 में शुरू हुआ यह अभियान स्थायी समाधान दे पाता है या पुराने अभियानों की तरह कुछ दिनों में दम तोड़ देगा।
