जयपुर, राजधानी के प्रतिष्ठित नीरजा मोदी स्कूल की मान्यता रद्द करने के मामले में सीबीएसई (CBSE) ने राजस्थान हाईकोर्ट में अपना कड़ा जवाब पेश किया है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि स्कूल प्रशासन को सीधे हाईकोर्ट में याचिका दायर करने का कानूनी अधिकार नहीं है, बल्कि उन्हें नियमानुसार पहले सीबीएसई चेयरमैन के समक्ष अपील करनी चाहिए थी।
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जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे
छात्रा अमायरा की मौत के बाद गठित दो सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट में स्कूल प्रबंधन की गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं, जो बच्चों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करती हैं:
- पहचान में देरी: स्कूल में बच्चे आईडी कार्ड (ID Card) नहीं लगाते थे, जिसके कारण चौथी मंजिल से गिरने वाली छात्रा की पहचान घटना के आधे घंटे बाद तक नहीं हो सकी।
- सुरक्षा उपकरणों का अभाव: स्कूल की इमारत पर कोई सेफ्टी नेट नहीं लगा था। हालांकि स्कूल सीसीटीवी कैमरों से लैस था, लेकिन उनकी प्रभावी निगरानी (Monitoring) की कोई व्यवस्था नहीं थी।
- कागजी कमेटियां: स्कूल में ‘एंटी-बुलिंग’ सहित अन्य सुरक्षा कमेटियां केवल कागजों में ही चल रही थीं और धरातल पर उनका कोई अस्तित्व नहीं था।
- बुलिंग की शिकायत पर चुप्पी: जांच में सामने आया कि मृतका लंबे समय से बुलिंग (उत्पीड़न) का शिकार हो रही थी, लेकिन बार-बार शिकायत के बावजूद स्कूल प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
मामले का संक्षिप्त विवरण
| विवरण | जानकारी |
| स्कूल का नाम | नीरजा मोदी स्कूल, जयपुर |
| मामला | कक्षा 4 की छात्रा अमायरा की मौत के बाद मान्यता रद्दीकरण |
| सीबीएसई का स्टैंड | स्कूल को सीधे हाईकोर्ट आने का अधिकार नहीं |
| जांच कमेटी के निष्कर्ष | सुरक्षा में चूक, आईडी कार्ड न होना, बुलिंग की अनदेखी |
