मंत्री किरोड़ी लाल मीणा का ये लेटर हो रहा है वायरल! RPSC के ‘बड़े मगरमच्छों’ के नाम उजागर

राजस्थान की राजनीति में आज उस समय हड़कंप मच गया जब कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा द्वारा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को लिखा गया एक गोपनीय पत्र बिजली की गति से सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। इस ‘लेटर बम’ ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की साख को पूरी तरह हिला कर रख दिया है। पत्र में डॉ. मीणा ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि आयोग के भीतर एक संगठित गिरोह काम कर रहा था, जिसमें पूर्व अध्यक्षों—दीपक उप्रेती, शिव सिंह राठौड़ और संजय श्रोत्रिय की भूमिका संदिग्ध है। वायरल हो रहे इस पत्र में मंत्री ने दावा किया है कि ये ‘बड़े मगरमच्छ’ अब भी खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि केवल छोटे प्यादों को जेल भेजकर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।

वायरल पत्र के अनुसार, डॉ. मीणा ने जेल में बंद निलंबित सदस्य बाबूलाल कटारा से हुई अपनी बातचीत के आधार पर कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। पत्र में लिखा है कि आयोग में साक्षात्कार (Interview) के अंक पहले से ही फिक्स होते थे और ओएमआर शीट के साथ बड़े स्तर पर छेड़छाड़ की जाती थी। डॉ. मीणा ने मुख्यमंत्री को सुझाव दिया है कि इस पूरे फर्जीवाड़े की जड़ तक पहुँचने के लिए बाबूलाल कटारा को ‘सरकारी गवाह’ (Approver) बनाया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि कटारा के माध्यम से उन ‘अदृश्य हाथों’ का पता लगाया जा सकता है जिन्होंने लाखों योग्य युवाओं के सपनों और मेहनत का सौदा किया है।

इस वायरल पत्र में RAS भर्ती 2018 और 2021 को लेकर भी रोंगटे खड़े कर देने वाले आरोप लगाए गए हैं। पत्र के अनुसार, शिव सिंह राठौड़ ने मुख्य परीक्षा की कॉपियां जांचने का काम अपनी चहेती फर्म को दिया और ‘Not Attempted’ (NA) कॉपियों में बाद में चहेते अभ्यर्थियों से उत्तर लिखवाए गए। इतना ही नहीं, पत्र में यह भी आरोप है कि पूर्व अध्यक्ष भूपेंद्र यादव ने एक अभ्यर्थी के 82 अंक आने की बात इंटरव्यू से पहले ही व्हाट्सएप पर बता दी थी। वहीं, 2021 की भर्ती में प्रश्न-पत्र का एक सवाल ट्वीट कर लीक करने और कॉपियां निजी शिक्षकों से जंचवाने जैसे गंभीर आरोप भी इस पत्र का हिस्सा हैं, जो अब हर मोबाइल स्क्रीन पर वायरल हो रहे हैं।

मंत्री डॉ. मीणा ने केवल आयोग ही नहीं, बल्कि जांच एजेंसी SOG के अधिकारियों पर भी निशाना साधा है। वायरल पत्र में CI मोहन पोशवाल को मुख्य सरगना बताते हुए आरोप लगाया गया है कि उन्होंने साक्ष्य मिटाने और मुख्य आरोपियों को बचाने में मदद की। डॉ. मीणा ने साफ़ कहा है कि पिछले राज में ‘बाड़ ही खेत को खाने में जुटी थी’। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि इन सभी साक्ष्यों के आधार पर पूर्व पदाधिकारियों को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की जाए, ताकि युवाओं का न्याय प्रणाली पर विश्वास पुनः स्थापित हो सके।

फिलहाल, इस पत्र के वायरल होने के बाद आरपीएससी और प्रशासनिक हलकों में सन्नाटा पसरा हुआ है। अभ्यर्थी सोशल मीडिया पर इस पत्र को शेयर करते हुए ‘बड़े मगरमच्छों’ की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के इस कड़े रुख ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर टिकी हैं कि वे इस ‘वायरल सच’ पर क्या कड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हैं।

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