-चंबल में माफिया राज का काउंटडाउन शुरू, 11 मई तक का है आखिरी मौका!
जयपुर/दिल्ली। जब सिस्टम सो जाता है, तो माफिया सर उठाने लगता है। लेकिन अब चंबल के रेत माफियाओं और उनके ‘खाकी-खादी’ वाले मददगारों की खैर नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सरकारों को कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अगर अवैध खनन नहीं रुका, तो कोर्ट अपनी ‘असाधारण शक्तियों’ का इस्तेमाल कर चंबल में सीधे CRPF उतार देगा। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने जो कहा, वह सिस्टम के मुंह पर तमाचा है। कोर्ट ने साफ तौर पर माना कि राजस्थान, एमपी और यूपी के अफसर ‘जानबूझकर सुस्ती’ दिखा रहे हैं। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि माफिया के साथ ‘मूक सहमति’ (Collusion) है। अगर 11 मई तक हालात नहीं सुधरे, तो पूरे चंबल क्षेत्र में रेत खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया जाएगा।
- सुप्रीम कोर्ट का अल्टीमेटम: ‘सुधर जाओ वरना हम संभाल लेंगे कमान’
देश की सबसे बड़ी अदालत ने चंबल नेशनल सेंचुरी में जारी अवैध रेत खनन पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकारों को सीधी चेतावनी दी है कि अगर खनन नहीं रुका, तो कोर्ट अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए पूरे चंबल क्षेत्र में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा देगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि राज्य सरकारें विफल रहीं, तो वहां CRPF (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) की तैनाती कर दी जाएगी।

- अफसरों की ‘मिलीभगत’ बेनकाब: जानबूझकर दिखाई जा रही सुस्ती
कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि राजस्थान, एमपी और यूपी के अफसर जानबूझकर सुस्ती दिखा रहे हैं। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि खनन माफिया के साथ अधिकारियों की ‘मूक सहमति’ और मिलीभगत का परिणाम है। कोर्ट ने अधिकारियों को चेताया है कि अगर आदेशों के पालन में कोताही बरती गई, तो अधिकारियों पर अवमानना (Contempt of Court) की कार्रवाई की जाएगी। - ‘पॉल्यूटर पे’ सिद्धांत: माफिया ही नहीं, अफसरों की जेब से भी वसूला जाएगा हर्जाना
सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि यह मामला सिर्फ अवैध खनन का नहीं, बल्कि पर्यावरण और कानून के शासन (Rule of Law) का है। कोर्ट ने ‘पॉल्यूटर पे’ (Polluter Pays) सिद्धांत का जिक्र करते हुए कहा कि पर्यावरण को जो क्षति हुई है, उसकी वसूली की जाएगी। अधिकारियों को जवाब देना होगा कि पर्याप्त कानून होने के बावजूद माफिया बेखौफ क्यों हैं? आदेशों में लापरवाही बरतने वाले अफसरों पर सीधे अवमानना (Contempt of Court) की कार्रवाई होगी

- ‘ऑपरेशन चंबल’: अब ऐसे कसेगा शिकंजा
कोर्ट ने तीन राज्यों के लिए एक ‘डेडलाइन’ और ‘एक्शन प्लान’ तय कर दिया है:-
-हथियारबंद गश्ती दल: पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीमें अब लाठी के भरोसे नहीं, बल्कि आधुनिक हथियारों, सुरक्षा गियर और हाई-टेक संचार उपकरणों से लैस होकर 24×7 पहरा देंगी।
-बिना कोर्ट की मर्जी नहीं छूटेंगे वाहन: अब कोई स्थानीय नेता या बड़ा अफसर अवैध खनन में पकड़ी गई मशीनों को नहीं छुड़ा पाएगा। रिलीज के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी अनिवार्य होगी।
-हाईटेक निगरानी: संवेदनशील इलाकों में वाई-फाई सक्षम सीसीटीवी और खनन के वाहनों में GPS लगाना अनिवार्य होगा।

- हाईटेक निगरानी: अब GPS और CCTV से होगी माफिया की घेराबंदी:-
कोर्ट ने तीन राज्यों के समन्वय के लिए एक कड़ा फ्रेमवर्क तैयार करने का निर्देश दिया है:
-इंटरस्टेट समन्वय: तीनों राज्यों को बताना होगा कि कंट्रोल रूम कहां बनेंगे और लाइव मॉनिटरिंग कौन करेगा।
-GPS अनिवार्य: मुरैना और धौलपुर में पायलट प्रोजेक्ट के तहत खनन से जुड़े हर वाहन में GPS लगाना अनिवार्य होगा।
-CCTV सर्विलांस: संवेदनशील खनन रूट्स पर हाई-रेजोल्यूशन, वाई-फाई सक्षम CCTV लगाए जाएंगे, जिसकी निगरानी सीधे SP और DFO स्तर के अधिकारी करेंगे।
- फोर्स को मॉडर्न हथियार, पुलिस-वन विभाग की संयुक्त गश्ती:-
खनन माफिया के आधुनिक हथियारों से लैस होने की खबरों के बाद, कोर्ट ने आदेश दिया है कि पुलिस और वन विभाग के संयुक्त गश्ती दल बनाए जाएं। इन दलों को न केवल आधुनिक हथियार और सुरक्षा गियर (बुलेटप्रूफ जैकेट आदि) दिए जाएं, बल्कि संचार के बेहतरीन उपकरण भी मुहैया कराए जाएं ताकि माफिया का मुकाबला मजबूती से किया जा सके।

- जब्त वाहन अब नहीं होंगे आसानी से रिहा:
- अवैध खनन के खिलाफ शिकंजा कसते हुए कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अब अवैध खनन में पकड़े गए वाहन और मशीनें सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बिना रिलीज नहीं की जा सकेंगी। इसका मतलब है कि अब स्थानीय रसूख या सिफारिश के दम पर जब्त किए गए डंपर और मशीनें नहीं छूटेंगी, जिससे माफिया की आर्थिक कमर टूटना तय है।
- अब देखना है कि क्या सरकारें और प्रशासन अब भी गहरी नींद से जागेंगे? या फिर सुप्रीम कोर्ट को ही चंबल की वादियों में कानून का राज स्थापित करने के लिए सेना या अर्धसैनिक बल भेजने पड़ेंगे? 11 मई तक की मोहलत है, उसके बाद चंबल की तस्वीर बदल सकती है।
