Expose Now Exclusive: PHED ठेकेदारों का सरकार को सीधा ‘चैलेंज’, 17 जून से राज्यभर में पेयजल सप्लाई ठप करने का ऐलान!

-35 महीनों से नहीं मिला वैध भुगतान, समझौते को लेकर भजनलाल सरकार पर लगाया वादाखिलाफी का आरोप

-भुगतान ठेकेदारों का हक, लेकिन क्या सरकार उन योजनाओं का भी पेमेंट कर दे, जिनसे जनता को एक बूंद पानी नहीं मिला?

-ग्रामीण इलाकों में दम तोड़ चुकी हैं अधिकांश योजनाएं, PHED इंजीनियर्स की शह या ठेकेदारों की मनमानी?

-क्या अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापन देकर राजस्थान के इतिहास में सरकार की ऐसी ‘फजीहत’ कराने के पीछे किसकी साजिश?

जयपुर। राजस्थान में पानी की सप्लाई को लेकर आने वाले दिन बेहद संकटभरे हो सकते हैं। ऑल राजस्थान पीएचईडी कांट्रेक्टर एसोसिएशन (PHED Contractors Association) की ‘संघर्ष समिति’ (Sangharsh Samiti) ने सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। संघर्ष समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश विश्नोई (Omprakash Bishnoi) के नेतृत्व में राज्यभर के सभी PHED ठेकेदारों ने आगामी 17 जून 2026 से ओएंडएम (ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस) सहित सभी जल परियोजनाओं का काम पूरी तरह बंद करने का ऐलान कर दिया है। ठेकेदारों के इस सामूहिक कार्य बहिष्कार से प्रदेश में पेयजल आपूर्ति ठप होना तय माना जा रहा है। हालांकि, भीषण गर्मी के इस दौर में सरकार के खिलाफ इस तरह का मोर्चा खोलने के पीछे भजनलाल सरकार को राजनीतिक रूप से बदनाम करने की एक सोची-समझी साजिश की बू भी आ रही है।

सिक्के का दूसरा पहलू, भुगतान हक है, लेकिन बिना पानी दिए पैसा कैसा?

ठेकेदार संगठन पिछले 35 महीनों के बकाए को अपना हक बताकर आंदोलन कर रहे हैं, जो एक हद तक सही भी हो सकता है। लेकिन ‘Expose Now’ यहाँ एक बड़ा और कड़वा सवाल उठाता है—क्या सरकार उन योजनाओं का भी भुगतान जनता की जेब से कर दे, जिनमें कागजों पर तो करोड़ों रुपए बहा दिए गए, लेकिन धरातल पर जनता को आज तक एक बूंद पानी भी नसीब नहीं हुआ? जल जीवन मिशन (JJM) और अन्य पेयजल योजनाओं में हुए जमकर भ्रष्टाचार के कारण आज स्थिति बदतर है। पूर्व में हुए घोटालों के बाद ही केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए इसके बजट पर रोक लगाई थी और राज्य सरकार को दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन अधिकांश मामलों में जांच और कार्रवाई ठप पड़ी है।

ग्रामीण उपभोक्ता प्यासे, आखिर इस बर्बादी का जिम्मेदार कौन?

आज हकीकत यह है कि प्रदेश की अधिकांश ग्रामीण पेयजल योजनाएं पूरी तरह से फ्लॉप साबित हो रही हैं और ग्रामीण उपभोक्ताओं को पानी नहीं मिल रहा है। पाइपलाइनें डाल दी गईं, टंकियां खड़ी हो गईं, लेकिन सप्लाई गायब है। ग्रामीण जनता को प्यासा मारने के खेल का असली जिम्मेदार कौन है? क्या वे PHED इंजीनियर्स जिम्मेदार हैं जिन्होंने बिना ग्राउंड चेकिंग और बिना पानी की उपलब्धता सुनिश्चित किए ठेकेदारों के फर्जी बिल पास कर दिए और अपनी जेबें भरीं? या फिर वे रसूखदार ठेकेदार जिम्मेदार हैं जिन्होंने घटिया निर्माण किया, सिर्फ सरकारी बजट को ठिकाने लगाया और अपना मुनाफा कमाकर चलते बने?

अखबारों में विज्ञापन देकर फजीहत, क्या सरकार को बदनाम करने की है साजिश?

इस पूरे विवाद का एक हैरान करने वाला पहलू यह भी है कि ठेकेदारों के संगठन ने अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापन देकर सरकार की जमकर फजीहत कराई है। राजनैतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि जनता को पानी न मिलने के मूल मुद्दे से ध्यान भटकाने और अपनी कमियों को छुपाने के लिए, सरकार के खिलाफ इस तरह का माहौल बनाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, यह भजनलाल सरकार को बदनाम करने की किसी राजनीतिक साजिश का हिस्सा भी हो सकता है।

एक तरफ जहां ठेकेदार एसोसिएशन 17 जून से पूरी सप्लाई ठप कर सरकार को घुटनों पर लाने की तैयारी में है, वहीं जनता के बीच इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि भ्रष्टाचार की जांच करने और दोषियों को सजा देने के बजाय आम जनता को पानी के लिए तरसाने की बिसात बिछाई जा रही है। वैध और ईमानदारी से किए गए काम का भुगतान जरूर होना चाहिए, लेकिन भ्रष्टाचार की आड़ में जनता के पैसे की लूट को सही नहीं ठहराया जा सकता। अब देखना यह होगा कि भजनलाल सरकार इस सीधे चैलेंज और सिस्टम के भीतर बैठे भ्रष्टाचारियों से कैसे निपटती है।

ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now

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