जयपुर: राजस्थान में आगामी पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर सियासी पारा तेजी से चढ़ने लगा है। प्रदेश की दोनों प्रमुख पार्टियों—भाजपा और कांग्रेस—के अलावा बहुजन समाज पार्टी (BSP) और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) ने भी अपनी कमर कस ली है। चुनावों के मद्देनजर जहां कांग्रेस कार्यशालाओं के जरिए मैदान में उतर चुकी है, वहीं भाजपा ने चुनाव संचालन समिति के संभाग प्रभारियों और घोषणा पत्र समिति की घोषणा कर चुनावी तैयारियों को धार दे दी है।
भाजपा का मास्टरप्लान: 2028 विधानसभा चुनाव का ब्लूप्रिंट
भारतीय जनता पार्टी पंचायत और निकाय चुनावों को केवल स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि चुनने का माध्यम नहीं मान रही, बल्कि इसे 2028 के विधानसभा चुनाव में सत्ता वापसी का पहला बड़ा संगठनात्मक परीक्षण और ब्लूप्रिंट मान रही है। पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन के लिए एक विशेष ‘फॉर्मेट’ तैयार किया है। इसके तहत विधानसभा स्तर पर हर संभावित दावेदार की संगठन में सक्रियता, जनाधार, सामाजिक स्वीकार्यता, जीतने की क्षमता, सार्वजनिक छवि और राजनीतिक पृष्ठभूमि का बारीकी से मूल्यांकन किया जाएगा।
संभागीय चुनाव संचालन समिति में इन्हें मिली कमान
भाजपा ने नए सिरे से नेताओं को संभागों की जिम्मेदारी सौंपी है:
- जयपुर संभाग: प्रसन्न चंद मेहता, प्रभुलाल सैनी, शंकर सिंह राजपुरोहित।
- जोधपुर संभाग: ओंकार सिंह लखावत, सी.आर. चौधरी, हेमराज मीणा।
- उदयपुर संभाग: राजेन्द्र राठौड़, जसकौर मीणा, नारायण पंचारिया।
- कोटा संभाग: सी.पी. जोशी, अर्जुन लाल मीणा, अजीत महता।
- बीकानेर संभाग: राजेन्द्र गहलोत, मुकेश दाधीच, जसवंत सिंह विश्नोई, ज्योति मिर्धा।
- भरतपुर संभाग: अशोक परनामी, अलका सिंह गुर्जर, हरीराम रिणवा।
- अजमेर संभाग: अरुण चतुर्वेदी, देवजी भाई पटेल, लालचंद कटारिया।
इसके अलावा, घोषणा पत्र समिति में राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी, श्रवण सिंह बागड़ी, सौम्या गुर्जर समेत 13 दिग्गज नेताओं को शामिल किया गया है।
RPI (अठावले) भी लड़ेगी निकाय चुनाव
जयपुर पहुंचे केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने प्रेस वार्ता कर ऐलान किया कि उनकी पार्टी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) राजस्थान के नगर निकाय चुनाव लड़ेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी कुछ सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी और बाकी जगहों पर बीजेपी का समर्थन किया जाएगा, जिसके लिए जल्द ही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात की जाएगी। साथ ही उन्होंने छात्रों के प्रदर्शन और हालिया सियासी मुद्दों पर भी अपनी बात रखी।
Gen Z बनेगी चुनावी राजनीति का नया केंद्र
आगामी चुनावों में पहली बार मतदान करने वाले युवा यानी Gen Z मतदाता निर्णायक भूमिका निभाने जा रहे हैं। राजनीतिक दल युवाओं को लुभाने और उनका भरोसा जीतने के लिए अपनी रणनीतियों को नए सिरे से तैयार कर रहे हैं।
