जयपुर। आदिवासी स्वाभिमान और स्वतंत्रता संग्राम के ऐतिहासिक प्रतीक राजस्थान के मानगढ़ धाम (Mangarh Dham) को ‘राष्ट्रीय स्मारक’ घोषित करने की लंबे समय से चली आ रही मांग पर बड़ा झटका लगा है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित नहीं किया जा सकता है।
बड़े बदलावों ने बिगाड़ी पुरातात्विक पहचान:-
लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस फैसले के पीछे के तकनीकी और पुरातात्विक कारणों का खुलासा किया। मंत्रालय द्वारा किए गए स्थल निरीक्षण में यह पाया गया कि मानगढ़ धाम में हाल के वर्षों में बड़े पैमाने पर आधुनिक निर्माण और विकास कार्य कराए गए हैं। इन व्यापक आधुनिक बदलावों की वजह से इस ऐतिहासिक स्थल की मूल पुरातात्विक विशेषताएं, प्रामाणिकता और अखंडता पूरी तरह प्रभावित हुई हैं। ‘प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958’ के सख्त नियमों के मुताबिक, किसी भी स्थल को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के लिए उसकी ऐतिहासिक प्रामाणिकता का बरकरार रहना अनिवार्य है, जिस पर मानगढ़ धाम अब खरा नहीं उतरता।
फिलहाल कोई नया प्रस्ताव विचाराधीन नहीं:-
राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश की सीमाओं से जुड़े इस महान जनजातीय स्वतंत्रता आंदोलन स्थल को लेकर संसद में जब सवाल उठाया गया कि क्या सरकार किसी नए विकल्प या ठोस निर्णय पर विचार कर रही है, तो संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने साफ किया कि वर्तमान में ऐसा कोई भी प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन नहीं है।
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now
