-पिंक और ग्रीन मार्बल के डंप में मिले निकेल, कोबाल्ट और गैलियम के सकारात्मक संकेत, सामान्य सतह से 25 से 40 गुना अधिक उपलब्धता का अनुमान
-खान विभाग और IIT ISM धनबाद के बीच करार, 78 खनिज डंप चिन्हित कर बनाए गए 10-10 के क्लस्टर
-रक्षा, एयरोस्पेस और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में आत्मनिर्भर बनेगा भारत, राजस्थान बनेगा देश का नया ‘मिनरल हब’
Expose Now एक्सक्लुसिव रिपोर्ट
जयपुर/उदयपुर। राजस्थान का खनन क्षेत्र जल्द ही एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बदलाव का गवाह बनने जा रहा है। वर्षों से जिन्हें बेकार और पर्यावरण के लिए बोझ समझकर छोड़ दिया गया था, मार्बल के वो मलबे (खनिज अपशिष्ट) अब देश की तकदीर बदलने की ताकत रखने वाले ‘खजाने’ के रूप में सामने आए हैं। राज्य के पिंक और ग्रीन मार्बल के खनन क्षेत्रों में पड़े मलबे के वैज्ञानिक अध्ययन में निकेल, कोबाल्ट, क्रोमियम और गैलियम जैसे बेहद दुर्लभ और महत्वपूर्ण ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ की प्रचुर मौजूदगी के सकारात्मक संकेत मिले हैं।
IIT धनबाद के साथ मिलकर ‘कचरे से सोना’ बनाने की तैयारी:-
केंद्र सरकार के ‘नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन’ के तहत राजस्थान के खान विभाग की इकाई RSMET और देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT ISM धनबाद ने हाथ मिलाया है। इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत राज्य में वर्षों से जमा 78 बड़े खनिज डंप को चिन्हित किया गया है। शुरुआती चरण में उदयपुर और आसपास के क्षेत्रों में पिंक मार्बल के 8 और ग्रीन मार्बल के 2 डंप्स का वैज्ञानिक परीक्षण किया गया। जांच के जो नतीजे आए हैं, वे चौंकाने वाले और बेहद उत्साहजनक हैं। प्रारंभिक अनुमानों के मुताबिक, इन मलबों में क्रिटिकल मिनरल्स की मात्रा पृथ्वी की सामान्य सतही परत में मिलने वाली मात्रा से 25 से 40 गुना अधिक हो सकती है।
राजस्थान के 15 जिलों में टटोला जा रहा है भविष्य:-
खान विभाग अब बाकी बचे 68 डंप और टेलिंग्स का भी जियो-रेफरेंस्ड डेटाबेस तैयार कर मैपिंग, सैंपलिंग और खनिज विश्लेषण करा रहा है। इसके लिए प्रदेश के कई जिलों में फैले मलबे के ढेरों को चिन्हित किया गया है, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
-उदयपुर, सलूंबर, ऋषभदेव, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़।
-अजमेर, ब्यावर, सावर, नागौर, सिरोही।
-जोधपुर, बालेसर, सोजत सिटी और जालौर।
इन क्षेत्रों में न केवल निकेल और कोबाल्ट, बल्कि टंगस्टन, लिथियम और रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE) की उपलब्धता का भी सटीक आकलन किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का दावा, राजस्थान बनेगा देश का ‘पावरहाउस’:-
हाल ही में IIT ISM धनबाद के विशेषज्ञों ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (खान एवं पेट्रोलियम) अपर्णा अरोड़ा से मुलाकात कर इस प्रोजेक्ट की प्रगति और क्रिटिकल मिनरल्स की प्रचुर संभावनाओं पर मुहर लगाई है। इसके अलावा बाड़मेर जिले के ‘सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स’ में पहले ही रेयर अर्थ और हेवी रेयर अर्थ मिनरल्स के बड़े भंडार मिल चुके हैं, जिनकी नीलामी की प्रक्रिया केंद्र सरकार द्वारा आगे बढ़ाई जा रही है।
क्यों खास हैं ये मिनरल्स और क्या होगा देश को फायदा:-
निकेल, कोबाल्ट, गैलियम और लिथियम जैसे खनिजों को ‘भविष्य का ईंधन’ कहा जाता है। वर्तमान में भारत इन खनिजों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। इनका सीधा उपयोग:
-रक्षा और सामरिक क्षेत्र: अत्याधुनिक हथियार और मिलिट्री उपकरण बनाने में।
-एयरोस्पेस और एयरोनॉटिकल: फाइटर जेट, सैटेलाइट और स्पेस मिशन के कलपुर्जों में।
-ग्रीन एनर्जी: इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की बैटरियां और सोलर पैनल बनाने में।
यदि इस मलबे से व्यावसायिक स्तर पर इन खनिजों का निष्कर्षण (Extraction) सफल रहा, तो राजस्थान न केवल भारत की ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा को मजबूती देगा, बल्कि दुनिया के नक्शे पर क्रिटिकल मिनरल्स के सबसे बड़े केंद्र के रूप में उभरेगा।
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now