राजस्थान के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की एक सरकारी कार्यशाला में उस समय अजीब स्थिति पैदा हो गई, जब विभाग के सचिव (IAS) ने अधिकारियों को निजी संस्थाओं और धार्मिक फाउंडेशन से जुड़ने का निर्देश दे दिया। विभागीय मुद्दों पर चर्चा के नाम पर आयोजित इस वर्कशॉप में न केवल इन संस्थाओं के फायदे गिनाए गए, बल्कि अधिकारियों को 4 हजार से लेकर 26 हजार रुपये तक के पेड कोर्स जॉइन करने के निर्देश भी दिए गए।
एजेंडा गायब, निजी संस्थाओं पर रहा जोर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जयपुर के दुर्गापुरा स्थित कृषि अनुसंधान केंद्र के ऑडिटोरियम में 5 मई की शाम को यह कार्यशाला आयोजित की गई थी। इसके लिए 3 मई को विभाग के उपायुक्त की ओर से सर्कुलर जारी किया गया था, जिसमें केवल ‘विभागीय मुद्दों पर चर्चा’ की बात कही गई थी।
कार्यशाला में जब प्रदेश भर से आए जिला रसद अधिकारी, प्रवर्तन अधिकारी और निरीक्षक जुटे, तो वे यह देखकर चौंक गए कि वहां कुछ निजी संस्थाओं से जुड़े मोटिवेशनल स्पीकर्स के सेशन रखे गए थे। विभागीय चर्चा बहुत कम हुई और पूरा ध्यान निजी फाउंडेशन के कोर्स, उनके रजिस्ट्रेशन और भारी-भरकम फीस पर केंद्रित रहा।
सोशल मीडिया पर ग्रुप बनाकर दिया निर्देश
बताया जा रहा है कि इस कार्यशाला के दौरान बकायदा प्रेजेंटेशन दी गई कि इन चार दिवसीय कोर्स से कैसे जुड़ना है और इनके क्या फायदे हैं। इसके लिए सोशल मीडिया पर एक ग्रुप भी बनाया गया, जिसमें फाउंडेशन से जुड़ने के मैसेज साझा किए गए। 300 से अधिक अधिकारियों की मौजूदगी में हुए इस वाकये ने अब प्रशासनिक हलकों में चर्चा छेड़ दी है।
IAS का निजी लगाव और पुराना जुड़ाव
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के सचिव, जो खुद 2004 बैच के IAS अधिकारी हैं, उनका इन संस्थाओं से पुराना नाता रहा है। वे वर्ष 2020 में एक प्रमुख फाउंडेशन में प्रोजेक्ट डायरेक्टर के पद पर भी रह चुके हैं। वे सार्वजनिक रूप से इन संस्थाओं के प्रमुखों को अपना गुरु मानते रहे हैं। आईआईटी बॉम्बे से शिक्षित और अमेरिका की सिलिकॉन वैली में काम कर चुके यह अधिकारी 2004 में प्रशासनिक सेवा में आए थे।
अधिकारी का पक्ष
जब इस मामले में सचिव महोदय से बात की गई, तो उन्होंने इसे विभाग की ‘इंटरनल मीटिंग’ करार दिया। उन्होंने कहा कि बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, यह सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। हालांकि, सरकारी मंच और सरकारी समय का उपयोग किसी निजी पेड कोर्स के प्रचार के लिए किए जाने पर सवाल उठने लगे हैं।
