अरावली पर ‘सुप्रीम’ फैसला और सियासी भूचाल: क्या 90% पहाड़ खनन के लिए खुल जाएंगे? सरकार बोली- “अरावली हमारी पहचान है, पूरी तरह सुरक्षित रहेगी”

जयपुर: राजस्थान की जीवनरेखा और उत्तर भारत के ‘फेफड़े’ कही जाने वाली अरावली पर्वतमाला (Aravali Range) इन दिनों एक बड़े कानूनी और सियासी विवाद के केंद्र में है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरावली की नई परिभाषा तय किए जाने के बाद से प्रदेश में “Save Aravalli” अभियान तेज हो गया है। एक तरफ पर्यावरणविद इसे अरावली का “डेथ वारंट” बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ सरकार ने भरोसा दिलाया है कि अरावली का एक इंच भी बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा।

जानिए पिछले कुछ हफ्तों में अरावली को लेकर क्या-क्या हुआ है:

1. सुप्रीम कोर्ट का फैसला और ‘100 मीटर’ का विवाद

नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की सिफारिश को मानते हुए अरावली की एक समान परिभाषा (Uniform Definition) तय की।

  • नई परिभाषा: अब केवल उन्हीं पहाड़ियों को ‘अरावली’ माना जाएगा जो अपनी स्थानीय सतह से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंची हैं।
  • विवाद की वजह: पर्यावरणविदों और विपक्ष का दावा है कि राजस्थान में अरावली का एक बड़ा हिस्सा (करीब 90%) छोटी पहाड़ियों और टीलों के रूप में है, जिनकी ऊंचाई 100 मीटर से कम है। डर है कि नई परिभाषा के चलते ये छोटे पहाड़ कानूनी सुरक्षा से बाहर हो जाएंगे और खनन माफिया इन पर कब्जा कर लेंगे।

2. सरकार का बड़ा आश्वासन: “छेड़छाड़ नहीं होगी”

विवाद बढ़ता देख केंद्र और राज्य सरकार ने मोर्चा संभाला है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और राजस्थान सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई परिभाषा का मतलब खनन की छूट देना नहीं है।

  • बयान: सरकार ने कहा, “अरावली सिर्फ पहाड़ नहीं, हमारी पहचान है। हम विश्वास दिलाते हैं कि अरावली पूरी तरह सुरक्षित है और इससे कोई छेड़छाड़ नहीं होगी”
  • तर्क: सरकार का कहना है कि नई परिभाषा से अरावली का संरक्षण और मजबूत होगा। कोर्ट ने नए खनन पट्टों (Leases) पर तब तक रोक लगा दी है जब तक ‘सतत खनन योजना’ (Sustainable Mining Plan) तैयार नहीं हो जाती।

3. विपक्ष का हमला: “यह डेथ वारंट है”

राजस्थान में विपक्ष ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लिया है।

  • अशोक गहलोत का बयान: पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि यह फैसला अरावली के लिए “रेड कार्पेट” बिछाने जैसा है जो अवैध खनन को न्योता देगा। उन्होंने इसे पर्यावरण विनाश का आमंत्रण बताया है।
  • टीकाराम जूली का आरोप: नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि सरकार अपने “उद्योगपति मित्रों” को फायदा पहुंचाने के लिए अरावली को खत्म करने की साजिश रच रही है। उन्होंने कहा कि अगर छोटी पहाड़ियां खत्म हुईं तो राजस्थान में रेगिस्तान का विस्तार दिल्ली तक हो जाएगा।

4. जमीन पर एक्शन: खनन माफिया पर शिकंजा

बयानों के बीच, राजस्थान पुलिस और प्रशासन ने अवैध खनन के खिलाफ सख्ती दिखाई है।

  • पुलिस की कार्रवाई: हाल ही में जयपुर और आसपास के इलाकों में ‘बजरी माफिया’ के खिलाफ डिकॉय ऑपरेशन (Decoy Operation) चलाए गए। माफिया से मिलीभगत के आरोप में 5 थानेदारों को सस्पेंड और कई को लाइन हाजिर किया गया है।

5. ‘अरावली ग्रीन वॉल’ प्रोजेक्ट पर काम जारी

विवादों से इतर, अरावली को हरा-भरा बनाने के लिए ‘अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट’ (Aravali Green Wall Project) पर भी काम चल रहा है। इसके तहत गुजरात से लेकर दिल्ली तक 1400 किलोमीटर लंबी और 5 किलोमीटर चौड़ी ‘हरी पट्टी’ (Green Belt) विकसित की जा रही है, ताकि रेगिस्तान को आगे बढ़ने से रोका जा सके।

निष्कर्ष: फिलहाल अरावली का भविष्य ‘सुप्रीम’ व्याख्या और सरकार की नीयत पर टिका है। जहाँ एक तरफ कानूनी परिभाषा ने असमंजस पैदा किया है, वहीं सरकार का यह वादा कि “अरावली सुरक्षित रहेगी”, जनता के लिए एक उम्मीद की किरण है।

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