रामगंजमंडी PHED में ‘अंधा खेल’: बिना Work Order 2 महीने तक चला काम, सरकारी संसाधनों की खुलेआम लूट

रामगंजमंडी: जलदाय विभाग खंड रामगंजमंडी में सामने आया कथित ‘अंधा खेल’ अब केवल अनियमितताओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने विभागीय कार्यप्रणाली और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूरे मामले में ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप जिस तरह सामने आए हैं, उसने साफ कर दिया है कि किस तरह अपने ही विभाग को दीमक की तरह खोखला किया जा रहा है और सरकारी संसाधनों का खुलेआम दुरुपयोग हो रहा है।

बिना वर्क ऑर्डर चलता रहा खेल

जानकारी के अनुसार, पुराने ठेकेदार का टेंडर 31 जनवरी को समाप्त हो गया था, लेकिन इसके बावजूद 1 फरवरी से 26 मार्च तक बिना किसी वर्क ऑर्डर के ही दूसरे ठेकेदार से काम करवाया जाता रहा। इस दौरान ठेकेदार ने जलदाय विभाग के सरकारी कुएं और बिजली का उपयोग किया, जबकि नियमों के अनुसार यह पूरा खर्च ठेकेदार को स्वयं वहन करना होता है। इसके बावजूद विभागीय संसाधनों का इस्तेमाल कर सीधे तौर पर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया।

ठेकेदार के भरोसे सिस्टम, अधिकारी आंखें मूंदे बैठे रहे

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मोटर संचालन कक्ष की चाबी तक ठेकेदार के कर्मचारियों को सौंप दी गई थी। यानी विभाग का सिस्टम पूरी तरह ठेकेदार के भरोसे छोड़ दिया गया और जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे रहे। करीब तीन महीने तक यह पूरा खेल चलता रहा, लेकिन किसी भी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे यह सवाल और गहरा हो जाता है कि आखिर यह सब किसके संरक्षण में हो रहा था।

खबर का असर: कार्रवाई के डर से बंद किया उपयोग

मामला उजागर होने और खबरें प्रकाशित होने के बाद ठेकेदार ने अचानक सरकारी कुएं से पानी भरना और बिजली का उपयोग बंद कर दिया। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि पहले जो काम चल रहा था, वह नियमों के खिलाफ था और उजागर होते ही उसे रोक दिया गया। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी साबित कर दिया कि विभागीय लापरवाही और मिलीभगत के कारण ही यह खेल लंबे समय तक चलता रहा।

गंभीर सवाल: कौन करेगा नुकसान की भरपाई?

अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि बिना वर्क ऑर्डर के करीब दो महीने तक करवाए गए काम का भुगतान आखिर किस आधार पर किया जाएगा। क्या इसके लिए बिलों में हेराफेरी की जाएगी या फिर किसी अन्य मद से राशि निकालकर ठेकेदार को फायदा पहुंचाया जाएगा। साथ ही, तीन महीने तक सरकारी पानी और बिजली के उपयोग से जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कौन करेगा—विभाग या संबंधित ठेकेदार?

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