उद्योगों को दिन में मिलेगी सबसे सस्ती बिजली: राजस्थान में सौर और पवन ऊर्जा के दम पर नया टैरिफ मैकेनिज्म तैयार

जयपुर। राजस्थान को भारत का ‘ग्रीन एनर्जी हब’ बनाने और स्थानीय उद्योगों की वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने के लिए भजनलाल सरकार एक क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है। राजस्थान ऊर्जा विकास निगम और तीनों विद्युत वितरण निगम (डिस्कॉम्स) मिलकर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों के लिए एक बिल्कुल नया और अनूठा ‘टैरिफ मैकेनिज्म’ (विद्युत दर फॉर्मूला) तैयार कर रहे हैं। इस प्रस्तावित मॉडल के तहत दिन के समय, जब पश्चिमी राजस्थान में सौर और पवन ऊर्जा (अक्षय ऊर्जा) का उत्पादन अपने चरम पर होता है और ग्रिड में बिजली की उपलब्धता सरप्लस होती है, तब उद्योगों को अत्यंत रियायती और सस्ती दरों पर बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। इस नीतिगत बदलाव का मुख्य मकसद राजस्थान में उत्पादित होने वाली क्लीन एनर्जी का शत-प्रतिशत बेहतर उपयोग करना और उद्योगों की उत्पादन लागत (Production Cost) को कम करना है।

इस तरह काम करेगा ‘टाइम ऑफ यूज’ (TOU) का नया प्लान

विद्युत विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रस्तावित मॉडल में बिजली की दरें चौबीस घंटे एक समान रहने के बजाय समय (टाइम-स्लॉट) के अनुसार गतिशील (Dynamic) तय की जा सकती हैं।

  • दिन का समय (सौर पीक): सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच जब सोलर और विंड एनर्जी का उत्पादन सबसे ज्यादा होता है, तब बिजली का बेस टैरिफ न्यूनतम रखा जाएगा।
  • शिफ्टिंग का फायदा: इस कंसेप्ट से उद्योग अपनी सबसे ज्यादा बिजली खपत वाली भारी गतिविधियों और उत्पादन शिफ्टों को कम टैरिफ वाले समय में री-शेड्यूल (Shift) कर सकेंगे। इससे जहां एक ओर उद्योगों का मासिक बिजली खर्च नाटकीय रूप से घट जाएगा, वहीं दूसरी ओर डिस्कॉम्स को भी दिन में अतिरिक्त रहने वाली अक्षय ऊर्जा को औने-पौने दामों में बाहर बेचने की मजबूरी से मुक्ति मिलेगी।

फैक्ट फाइल: राजस्थान का औद्योगिक पावर ग्रिड

विद्युत विभाग के सांख्यिकीय विश्लेषण के अनुसार, वर्तमान वित्तीय वर्ष में राज्य के औद्योगिक बिजली उपभोग और राजस्व का ढांचा इस प्रकार अनुमानित है:

  • औद्योगिक बिजली दरें: वर्तमान में प्रदेश में उद्योगों के लिए बिजली की दरें ₹6.00 से ₹7.50 प्रति यूनिट के उच्च स्तर पर हैं, जो उत्पादन लागत का एक बड़ा हिस्सा बनती हैं।
  • अनुमानित कुल खपत: इस चालू वित्तीय वर्ष में औद्योगिक क्षेत्र द्वारा कुल 9,367 करोड़ रुपए की बिजली खपत किए जाने का विधिक अनुमान लगाया गया है।
  • बचत का गणित: यदि नए मैकेनिज्म से उद्योगों को दिन के समय केवल 15 से 20 प्रतिशत की भी राहत मिलती है, तो उद्योगों की उत्पादन लागत में सालाना करोड़ों रुपए की सीधी बचत होगी।

केवल उद्योग ही नहीं, आम जनता के लिए भी लागू होगा यह कंसेप्ट

राजस्थान राज्य विद्युत विनियामक आयोग (RERC) ने स्पष्ट किया है कि यह अभिनव कंसेप्ट केवल फैक्ट्रियों तक ही सीमित नहीं रहेगा। आयोग कुछ समय पहले ही ‘टाइम ऑफ यूज’ (TOU) टैरिफ कंसेप्ट की विधिक रूपरेखा लेकर आया है, जिसके तहत भविष्य में डोमेस्टिक (घरेलू) उपभोक्ताओं के लिए भी दिन के अलग-अलग समय के हिसाब से दरें अलग-अलग तय की जाएंगी। इस मॉडल के लागू होने से आम नागरिक भी अपने रोजमर्रा के भारी काम (जैसे कपड़े धोना, पानी की मोटर चलाना, इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्ज करना) स्वतः ही उस समय करेंगे जब बिजली सबसे सस्ती होगी। इसका दोहरा फायदा होगा— उपभोक्ताओं का बिजली बिल कम होगा और रात के पीक समय (Peak Hours) में बिजली ग्रिड पर पड़ने वाला भारी लोड व ट्रिपिंग का दबाव पूरी तरह घट जाएगा।

सौर ऊर्जा में देश का सरताज है राजस्थान: स्थापित क्षमता 35 GW पार

अक्षय ऊर्जा के मोर्चे पर राजस्थान इस समय पूरे देश का नेतृत्व कर रहा है। थार रेगिस्तान के विशाल रेतीले भूभाग और साल में 325 से अधिक दिनों तक कड़क धूप के कारण यहां सौर ऊर्जा की असीम विधिक क्षमताएं हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 तक राज्य की कुल सौर ऊर्जा स्थापित क्षमता 35,000 मेगावाट (35 गीगावाट) के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर चुकी है, जो पूरे भारत की कुल सौर क्षमता का लगभग 27 प्रतिशत है। जोधपुर का ‘भदला सोलर पार्क’ जैसी विश्व स्तरीय मेगा परियोजनाएं इसी मरूधरा की धरती पर संचालित हैं। ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर और ‘पीएम-कुसुम’ जैसी दूरदर्शी योजनाओं ने इस सफलता को नई गति दी है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आ रही है।

पवन ऊर्जा: 5.2 गीगावाट क्षमता के साथ तीसरे स्थान पर मरुधरा

सौर ऊर्जा के साथ-साथ विंड एनर्जी (पवन ऊर्जा) के क्षेत्र में भी राजस्थान देश के शीर्ष तीन राज्यों में मजबूती से खड़ा है। पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर जैसे सीमावर्ती जिलों में सालभर चलने वाली निरंतर तेज हवाएं राज्य को पवन ऊर्जा के लिए एक आदर्श भौगोलिक मंच प्रदान करती हैं। दिसंबर 2025 तक राज्य की पवन ऊर्जा स्थापित क्षमता 5,195.82 मेगावाट (लगभग 5.2 गीगावाट) तक पहुंच चुकी है, जिसके बूते राजस्थान देश में तीसरे पायदान पर काबिज है। जैसलमेर का ‘पवन ऊर्जा क्लस्टर’ इस समय देश की सबसे बड़ी विंड परियोजनाओं में से एक है। नई टैरिफ नीति आने के बाद इन दोनों प्राकृतिक ऊर्जा स्रोतों का एक बेहतरीन ‘हाइब्रिड कॉम्बिनेशन’ तैयार होगा, जो राजस्थान को पूरी तरह से बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से समृद्ध बनाएगा।

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