सरकारी सब्सिडी पर विवाद: केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री और IAS नरेश पाल गंगवार के परिजनों को नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड से मिला भारी-भरकम फंड

जयपुर। केंद्र सरकार की कृषि सब्सिडी योजना को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी और एक वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी के परिवार को इसी मंत्रालय के तहत आने वाली योजना से करोड़ों रुपये का भारी-भरकम अनुदान (सब्सिडी) मिला है। इसके बाद से ही सरकारी पदों पर बैठे लोगों के ‘हितों के टकराव’ (Conflict of Interest) को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।

केंद्रीय मंत्री को मिला ₹99.60 लाख का अनुदान

रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान से आने वाले केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को करीब तीन महीने पहले उनके ही मंत्रालय की एक योजना के तहत ₹99,60,000 (करीब 99.6 लाख रुपये) की सब्सिडी जारी की गई है। यह सब्सिडी उनके खीरे (Cucumber) के कमर्शियल फार्म के लिए दी गई है।

बड़ी बात यह है कि यह अनुदान राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (National Horticulture Board – NHB) द्वारा अनुमोदित किया गया था, जिसके पदेन उपाध्यक्ष (Ex-officio Vice-President) खुद मंत्री भागीरथ चौधरी हैं। हालांकि, कागजों पर इस योजना के तहत परियोजनाओं को मंजूरी देने में राज्य मंत्री की कोई सीधी भूमिका नहीं होती और अंतिम मंजूरी एक ऐसी समिति देती है जिसमें बोर्ड के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष शामिल नहीं होते।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के तहत कुल 144 करोड़ रुपये की लागत वाली 467 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी, जो 677 एकड़ क्षेत्र को कवर करती हैं। इनमें से केवल 60 परियोजनाएं ऐसी थीं, जिन्हें 50 लाख रुपये से अधिक की सब्सिडी मिली और केंद्रीय मंत्री की परियोजना उन्हीं में से एक है।

वरिष्ठ IAS अधिकारी का परिवार भी लाभार्थियों में शामिल

यह मामला सिर्फ केंद्रीय मंत्री तक ही सीमित नहीं है। राजस्थान कैडर के 1994 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार के परिवार के सदस्य भी इस केंद्रीय योजना के बड़े लाभार्थियों में शामिल हैं। गंगवार वर्तमान में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में सचिव के पद पर तैनात हैं।

  • ₹1.16 करोड़ से अधिक की सब्सिडी: आईएएस अधिकारी की मां, पत्नी और बेटे को पिछले पांच वर्षों के दौरान इस योजना के तहत कुल मिलाकर 1.16 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी मिली है।
  • घोषणा पत्र में केवल एक का जिक्र: नियमों के मुताबिक, संपत्ति की अनिवार्य वार्षिक घोषणा (DoPT) में इन संपत्तियों की जानकारी देनी होती है। लेकिन रिकॉर्ड बताते हैं कि गंगवार ने वर्ष 2021-22 के लिए कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के पास जमा कराई गई अचल संपत्ति की घोषणा में इस योजना के तहत स्वीकृत केवल एक ही परियोजना का विवरण साझा किया था।

क्या है यह योजना?

यह पूरा मामला राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) द्वारा संचालित “Development of Commercial Horticulture through Production and Post-Harvest Management of Horticulture Crops” (वाणिज्यिक बागवानी का विकास) योजना से जुड़ा है। यह योजना व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को लागत की 50 फीसदी तक (अधिकतम 1 करोड़ रुपये प्रति परिवार) की वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इसमें खीरा, शिमला मिर्च, टमाटर और कुछ विशेष किस्म के फूलों की खेती शामिल है।

क्या है पूरा विवाद?

इस खुलासे के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या अपने ही मंत्रालय के अधीन आने वाले बोर्ड से इतनी बड़ी रकम की सब्सिडी लेना नैतिक रूप से सही है? हालांकि, मंत्री के सहयोगियों और समर्थकों का कहना है कि वे मंत्री होने के साथ-साथ एक किसान भी हैं और उन्होंने नियमों के तहत ही आवेदन किया था। मीडिया द्वारा इस संबंध में पूछे गए विस्तृत सवालों और प्रश्नावली पर फिलहाल केंद्रीय मंत्री और आईएएस अधिकारी की तरफ से विस्तृत आधिकारिक जवाब का इंतजार है।


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