NEET-UG 2026: 5 लाख से शुरू होकर आखिरी घंटों में 2000 रुपये तक गिरा पेपर का भाव, ऐसे फैला माफिया का जाल

सीकर। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में हर दिन चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। ताज़ा जांच में सामने आया है कि यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि पेपर माफिया ने इसकी बिसात परीक्षा से 8 महीने पहले (दीपावली के आसपास) ही बिछा दी थी। पेपर न केवल ऑफलाइन लाखों रुपये में बिका, बल्कि परीक्षा के आखिरी घंटों में टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर कौड़ियों के दाम (2000 रुपये) पर सर्कुलेट हुआ।

नासिक की प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ ‘सच्चाई का दस्तावेज’

जांच एजेंसियों के अनुसार, पेपर लीक का उद्गम स्थल महाराष्ट्र का नासिक था। नासिक की एक प्रिंटिंग प्रेस में पेपर की कॉपियां छपी थीं, जहाँ से माफिया धनंजय ने इसे शुभम खैरनार तक पहुँचाया। शुभम ने इसे हरियाणा के यश यादव को दिया, जो इस पूरे सिंडिकेट का सबसे बड़ा बिचौलिया बनकर उभरा।

राजस्थान में 45 लाख की डील और ‘जमवारामगढ़’ कनेक्शन

यश यादव ने जयपुर के जमवारामगढ़ निवासी दो भाइयों— दिनेश बिवाल और मांगीलाल बिवाल के साथ 45 लाख रुपये में सौदा तय किया था।

  • गारंटी: माफिया ने दावा किया था कि गेस पेपर से 143 प्रश्न आएंगे (हालांकि असल में 120-130 प्रश्न ही मिले)।
  • एडवांस पेमेंट: इन दोनों भाइयों ने माफिया को 30 लाख रुपये एडवांस भी दे दिए थे।
  • पारिवारिक संलिप्तता: मांगीलाल का बेटा विकास, जो वर्तमान में सवाई माधोपुर से MBBS कर रहा है, वह भी इस खेल में शामिल पाया गया है।

5 लाख से 2 हजार तक: कैसे गिरा पेपर का ‘बाजार’?

माफिया ने शुरुआत में सीकर और आसपास के छात्रों के परिजनों से 5 से 15 लाख रुपये तक वसूले। लेकिन जैसे-जैसे परीक्षा का समय नजदीक आया, पेपर पर नियंत्रण खत्म हो गया।

  1. 29 अप्रैल: परिजनों से लाखों की डीलिंग हुई।
  2. परीक्षा से 2 दिन पहले: पेपर का दाम गिरकर 2000 रुपये रह गया।
  3. आखिरी घंटे: टेलीग्राम ग्रुप्स पर पेपर को मुफ्त और ‘फ्री सर्कुलेशन’ मोड में डाल दिया गया।

पुलिस की सुस्ती और फिजिक्स टीचर की जांबाजी

सीकर के एक प्राइवेट कोचिंग के फिजिक्स टीचर को 4 मई को ही लीक का पता चल गया था।

  • वह रात 2 बजे थाने पहुंचे, लेकिन स्थानीय पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया।
  • 6 मई को टीचर ने सीधे NTA को ईमेल किया और अपना फोन तक फॉरेंसिक जांच के लिए देने की पेशकश की। इसी मेल के बाद IB (इंटेलिजेंस ब्यूरो) हरकत में आई और CBI तक मामला पहुंचा।

रडार पर कई कोचिंग संस्थान

जांच में यह भी सामने आया है कि दिनेश और मांगीलाल के परिवार के कई बच्चे पहले से ही मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रहे हैं, लेकिन उनके चयन की जानकारी कभी कोचिंग संस्थानों को नहीं दी गई। शक है कि यह परिवार लंबे समय से पेपर माफिया के संपर्क में था। अब CBI सीकर के कई नामी कोचिंग संस्थानों और ‘सफेदपोश’ मददगारों की कुंडली खंगाल रही है।

वर्तमान में, CBI ने दिनेश, मांगीलाल, विकास और यश यादव को ट्रांजिट रिमांड पर लिया है, जबकि सीकर के राकेश मंडावरिया से पूछताछ के बाद उसे अभी छोड़ा गया है।

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