सीकर। राजस्थान का सीकर जिला, जिसे देश के दूसरे ‘शिक्षा हब’ के रूप में पहचाना जाता है, आज एक ऐसी सनसनीखेज वजह से चर्चा में है जिसने देश के लाखों युवाओं का भविष्य अधर में लटका दिया है। NEET-UG 2026 की परीक्षा रद्द होने के पीछे की सबसे बड़ी कड़ी ‘सीकर कनेक्शन’ के रूप में सामने आई है। इस पूरे गिरोह का पर्दाफाश किसी जांच एजेंसी ने नहीं, बल्कि सीकर के ही एक जांबाज फिजिक्स शिक्षक की सजगता से हुआ है।
फिजिक्स शिक्षक: जिसने सिस्टम को आईना दिखाया
इस घोटाले की शुरुआत तब हुई जब एक छात्र ने अपने फिजिक्स शिक्षक को व्हाट्सएप पर एक ‘गेस पेपर’ भेजा। शिक्षक ने जब सवालों का मिलान किया, तो उनके होश उड़ गए; पेपर के सवाल हूबहू असली परीक्षा जैसे थे।
- अनसुनी शिकायत: शिक्षक सबसे पहले स्थानीय थाने पहुंचे, लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया।
- NTA को सीधी रिपोर्ट: हार न मानते हुए शिक्षक ने सीधे NTA (National Testing Agency) की वेबसाइट पर सभी पुख्ता दस्तावेज और सबूत अपलोड कर दिए। इसी एक कदम ने दिल्ली से लेकर राजस्थान के डीजीपी कार्यालय तक हड़कंप मचा दिया।
‘मास्टरमाइंड’ राकेश मंडावरिया: नवोदय से अपराध की दुनिया तक

SOG (Special Operations Group) की जांच में इस पूरे खेल का मुख्य मोहरा राकेश मंडावरिया बनकर उभरा है। सीकर के पिपराली रोड पर ‘आरके कंसलटेंसी एजुकेशनल’ चलाने वाला राकेश खुद कभी डॉक्टर बनने का सपना लेकर सीकर आया था।
- पृष्ठभूमि: राकेश ने 2001 में जवाहर नवोदय विद्यालय से अपनी शिक्षा शुरू की थी।
- असफलता और अपराध: खुद मेडिकल परीक्षा पास नहीं कर पाने के बाद उसने विदेश में एडमिशन दिलाने के नाम पर कंसल्टेंसी खोली और देखते ही देखते ‘पेपर सॉल्वर गैंग’ का अहम हिस्सा बन गया।
देहरादून में गिरफ्तारी और ‘नासिक’ कनेक्शन
एसओजी ने एक बेहद गोपनीय ऑपरेशन के तहत राकेश मंडावरिया को देहरादून से गिरफ्तार किया है। जांच में खुलासा हुआ है कि यह नेटवर्क केवल राजस्थान तक सीमित नहीं था। पेपर लीक के तार महाराष्ट्र के नासिक से भी जुड़े मिले हैं। 8 मई की रात से ही डीजीपी राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर संदिग्धों को उठाना शुरू कर दिया गया था, ताकि मुख्य सरगना को भागने का मौका न मिले।
100% सवालों का मैच होना खतरे की घंटी
SOG की रिपोर्ट ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि बायोलॉजी और केमिस्ट्री के 100% सवाल कथित गेस पेपर से मिल रहे थे। यह साबित करता है कि माफिया की पहुंच पेपर प्रिंटिंग प्रेस या डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर तक थी। यह केवल अनुमान नहीं, बल्कि परीक्षा से पहले छात्रों को रटवाया जाने वाला ‘लीक पेपर’ था।
कोचिंग हब की साख पर बट्टा
सीकर की पिपराली रोड, जहां हजारों छात्र दिन-रात मेहनत करते हैं, वहां राकेश मंडावरिया जैसे लोग करियर काउंसलिंग की आड़ में ‘शॉर्टकट’ का लालच देकर मेधावी छात्रों के भविष्य से खेल रहे थे। अब जांच एजेंसियां इस गिरोह से जुड़े ‘सफेदपोश’ चेहरों की तलाश कर रही हैं।
