जयपुर/सीकर। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ (NEET) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) ने इस पूरे पेपर लीक मामले की कड़ियों को जोड़ते हुए एक बड़ा खुलासा किया है। 3 मई को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न मानी जा रही इस परीक्षा की पोल 4 मई को तब खुली, जब सीकर की गलियों में एक ‘गेस पेपर’ वायरल होने लगा।
8 मई की रात: जब शुरू हुआ ‘ऑपरेशन क्लीन’
जांच में सामने आया कि 8 मई की रात 8 बजे आईबी (IB) से मिले एक इनपुट ने एसओजी की नींद उड़ा दी। एडीजी विशाल बंसल, आईजी अजयपाल लांबा और एसपी कुंदन कंवरिया ने रात 9 बजे ऑफिस पहुंचकर वायरल पेपर का मिलान ऑरिजिनल पेपर से किया। जब 135 सवाल और उनके विकल्प (Options) हूबहू मैच हो गए, तो अधिकारियों के होश उड़ गए। रात 12 बजे ही एसओजी की 25 टीमें एक्शन मोड में आईं और सीकर के लिए रवाना हो गईं।
सीकर से हरियाणा और महाराष्ट्र का कनेक्शन
एसओजी की जांच में यह खुलासा हुआ कि पेपर लीक का जाल कई राज्यों में फैला था:
- सीकर का लिंक: जांच में ‘आरके कंसल्टेंसी’ का नाम सामने आया। इसके संचालक की लोकेशन देहरादून मिली, जिससे वीडियो कॉल पर पूछताछ की गई।
- हरियाणा का जाल: सीकर में पकड़े गए एक ई-मित्र संचालक से पूछताछ में पता चला कि 29 अप्रैल को पेपर गुरुग्राम के यश यादव से खरीदा गया था।
- महाराष्ट्र तक तार: यश यादव ने कबूला कि उसने यह पेपर नासिक के शुभम खैरनार से लिया था। एसओजी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र पुलिस की मदद से शुभम को भी दबोच लिया।
80 छात्र और 150 संदिग्धों से पूछताछ
एसओजी ने अब तक 80 छात्रों सहित लगभग 150 लोगों से गहन पूछताछ की है। मंगलवार को एसओजी ने जयपुर से 9 और सीकर से 5 मुख्य संदिग्धों को CBI के हवाले कर दिया। पकड़े गए आरोपियों में विक्रम यादव, योगेश प्रजापत, संदीप हरितवाल और अन्य शामिल हैं।
सियासी घमासान: गहलोत और जूली ने साधा निशाना

इस पेपर लीक मामले ने राजनीतिक गलियारों में भी भूचाल ला दिया है।
- अशोक गहलोत: पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने दो सप्ताह तक लीक की जानकारी छिपाकर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किया।
- टीकाराम जूली: नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि भाजपा के 10 साल के शासन में अब तक 89 पेपर लीक हो चुके हैं और इस मामले में एफआईआर दर्ज करने में जानबूझकर देरी की गई।
NTA ने रद्द की परीक्षा
एसओजी द्वारा पेश किए गए पुख्ता सबूतों और जांच रिपोर्ट के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अंततः परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया है। अब इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है।
