मेटा का बड़ा फैसला: अब ‘फ्री’ नहीं रहेंगे फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सएप, कंपनी ने पेश किए ‘प्लस’ पेड सब्सक्रिप्शन प्लान

सोशल मीडिया के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। सालों तक पूरी तरह से मुफ्त रहने वाले आपके पसंदीदा एप्स— फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सएप अब अपनी प्रीमियम सेवाओं के लिए पैसे वसूलने की तैयारी में हैं। दिग्गज टेक कंपनी ‘मेटा’ (Meta) ने इन तीनों प्लेटफॉर्म्स के लिए नए ‘प्लस’ (Plus) सब्सक्रिप्शन प्लान की घोषणा की है।

कंपनी का यह कदम सिर्फ विज्ञापनों पर निर्भर रहने के बजाय कमाई का एक नया जरिया विकसित करने की रणनीति का हिस्सा है। मेटा ने स्पष्ट किया है कि ये नए ‘प्लस’ प्लान कंपनी के मौजूदा ‘मेटा वेरिफाइड’ (Meta Verified) ब्लू टिक वाले प्लान से अलग होंगे। हालांकि, मेटा ने अभी इन्हें वैश्विक स्तर पर रोलआउट करने का ऐलान किया है, लेकिन भारत में लॉन्चिंग की तारीख अभी तय नहीं की गई है। भारत के विशाल यूजर बेस को देखते हुए कंपनी इसे यहां चरणबद्ध तरीके से (Phased manner) लागू कर सकती है।

इंस्टाग्राम और फेसबुक ‘प्लस’ के 5 धांसू फीचर्स

प्लस वर्जन मुख्य रूप से क्रिएटर्स और आम यूजर्स के सोशल एक्सप्रेशन को बेहतर बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके सब्सक्राइबर्स को यह देखने की सुविधा मिलेगी कि उनकी स्टोरी को कितने लोगों ने ‘री-वॉच’ (दोबारा देखा) किया है। इसके अलावा 5 प्रमुख फायदे मिलेंगे:

  1. स्टोरी देखने पर नहीं चलेगा पता (Stealth Mode): अब आप किसी की भी स्टोरी देख सकेंगे और सामने वाले की ‘व्यूअर्स लिस्ट’ में आपका नाम नहीं आएगा। इसके अलावा आप अपनी स्टोरी देखने वालों के नाम भी सर्च कर सकेंगे।
  2. 24 घंटे से ज्यादा टिकेगी स्टोरी: वर्तमान में स्टोरी 24 घंटे में हट जाती है, लेकिन अब प्लस यूजर्स इसे 24 घंटे से ज्यादा समय तक अपनी प्रोफाइल पर रख पाएंगे। हफ्ते में एक बार किसी स्टोरी को ‘स्पॉटलाइट’ भी कर सकेंगे।
  3. कस्टम ‘क्लोज फ्रेंड्स’ लिस्ट: अभी सिर्फ ‘क्लोज फ्रेंड्स’ की एक लिस्ट बनती है, लेकिन नए फीचर से आप अलग-अलग ग्रुप्स (जैसे- परिवार, ऑफिस, दोस्त) की लिस्ट बना सकेंगे और तय कर पाएंगे कि कौन सी पोस्ट किसे दिखे।
  4. बिना नोटिफिकेशन के साइलेंट अपडेट: आप कोई भी फोटो या वीडियो सीधे अपनी प्रोफाइल या हाइलाइट्स में सेव कर सकेंगे, और आपके दोस्तों के फीड में इसका कोई नोटिफिकेशन नहीं जाएगा।
  5. प्रोफाइल डेकोरेशन: प्रोफाइल को सुंदर बनाने के लिए नए फॉन्ट, स्क्रीन पर तैरने वाले ‘सुपर हार्ट’ रिएक्शन और मनपसंद एप आइकॉन मिलेंगे।

वॉट्सएप प्लस: थीम और चैट पर फोकस

वॉट्सएप का प्लस वर्जन पूरी तरह से पर्सनलाइजेशन पर केंद्रित होगा। इसमें यूजर्स को कस्टम एप थीम्स, अलग-अलग रिंगटोन्स, ज्यादा चैट्स को पिन करने की सुविधा (एडिशनल पिंड चैट्स), लिस्ट कस्टमाइजेशन और प्रीमियम स्टिकर्स जैसे बेहतरीन फीचर्स मिलेंगे।

मेटा एआई (Meta AI) के भी आए पेड प्लान

सामान्य यूजर्स के लिए मेटा एआई मुफ्त रहेगा, लेकिन एडवांस फीचर्स के लिए दो नए प्लान टेस्ट किए जा रहे हैं:

  • मेटा वन प्लस: $7.99 (करीब 770 रुपए) प्रति माह।
  • मेटा वन प्रीमियम: $19.99 (करीब 1,900 रुपए) प्रति माह। यह प्लान हाई-लेवल कंप्यूट क्वेरीज और मुश्किल तर्कों को हल करने की क्षमता अनलॉक करेगा, जिससे बेहतरीन इमेज और वीडियो जनरेट किए जा सकेंगे।

क्रिएटर्स और बिजनेस के लिए महंगे एडवांस प्लान बिजनेस और क्रिएटर्स की रीच बढ़ाने के लिए कंपनी इसी हफ्ते दो खास प्लान टेस्ट करने जा रही है:

  • मेटा वन एसेंशियल ($14.99/करीब ₹1,450 प्रति माह): इसमें वेरिफाइड बैज, फर्जी अकाउंट से सुरक्षा और सभी सोशल लिंक्स को एक जगह जोड़ने के लिए एन्हांस्ड लिंकशीट मिलेगी।
  • मेटा वन एडवांस ($49.99/करीब ₹4,800 प्रति माह): एसेंशियल के फायदों के साथ-साथ फेसबुक फीड में फीचर होने, सर्च रिजल्ट में टॉप पर दिखने, रील्स पर बोल्ड ‘फॉलो’ बटन और एंगेज्ड यूजर्स को ऑटोमैटिक फॉलो रिक्वेस्ट भेजने की सुविधा मिलेगी। इसमें डीप एनालिटिक्स टूल्स और कंटेंट चोरी होने पर ओरिजिनल क्रिएटर को क्रेडिट क्लेम करने का नोटिफिकेशन भी मिलेगा।

क्यों बदल रहा है मेटा का बिजनेस मॉडल?

विशेषज्ञों के अनुसार, सालों से सोशल मीडिया कंपनियां यूजर्स के डेटा और विज्ञापनों से अरबों कमा रही थीं। लेकिन अब दुनियाभर में स्मार्टफोन और इंटरनेट यूजर्स की संख्या अपने चरम पर पहुंच चुकी है, जिससे नए यूजर्स जुड़ने की रफ्तार धीमी हो गई है। इसके अलावा, दुनिया भर में लागू हो रहे सख्त प्राइवेसी नियमों (जैसे यूरोप में GDPR) के कारण विज्ञापनों से होने वाली कमाई पर भारी असर पड़ा है। यही वजह है कि एलन मस्क के ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) की तर्ज पर अब मार्क जुकरबर्ग की कंपनी मेटा भी सीधे यूजर्स से पैसे लेकर अपने रेवेन्यू मॉडल को सुरक्षित कर रही है।

Share This Article
Leave a Comment