जयपुर। राजधानी जयपुर में संपत्ति खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए बड़ा अपडेट है। जिला प्रशासन ने शहर की डीएलसी (District Level Committee) दरों में 10 प्रतिशत से लेकर 49 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया है। जिला कलक्टर संदेश नायक की अध्यक्षता में आयोजित जिला दर निर्धारण समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। प्रशासन के अनुसार, 50 प्रतिशत से कम बढ़ोतरी वाले प्रस्ताव अगले सात दिनों के भीतर लागू कर दिए जाएंगे, जबकि इससे अधिक बढ़ोतरी वाले प्रस्ताव राज्य सरकार की मंजूरी के लिए भेजे जाएंगे।
तेजी से विकसित क्षेत्रों में बढ़ेंगी दरें
बैठक में शहर के उन क्षेत्रों की समीक्षा की गई, जहां पिछले कुछ समय में बाजार मूल्य में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और तेजी से शहरी विकास हो रहा है। ऐसे इलाकों में डीएलसी दरों में 10 से 49 प्रतिशत तक वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया है। वहीं, जिन क्षेत्रों में बाजार मूल्य अपेक्षाकृत कम हुआ है, वहां डीएलसी दरों में कमी के प्रस्ताव भी समिति के समक्ष रखे गए हैं।
अप्रैल में भी बढ़ी थीं डीएलसी दरें
गौरतलब है कि इससे पहले अप्रैल 2026 में भी जयपुर में डीएलसी दरों में लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई थी। अब कुछ ही महीनों के भीतर दूसरी बार दरों में संशोधन का प्रस्ताव आने से जमीन और संपत्ति खरीदने वालों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ सकता है।
क्या होती है डीएलसी रेट?
डीएलसी (District Level Committee) रेट वह न्यूनतम सरकारी मूल्य होता है, जिस पर किसी भूमि या संपत्ति की रजिस्ट्री की जाती है। यह दर जिला प्रशासन द्वारा तय की जाती है और स्टांप शुल्क व रजिस्ट्रेशन शुल्क की गणना भी इसी आधार पर होती है।

यदि किसी क्षेत्र की डीएलसी दर बढ़ती है तो उस क्षेत्र में संपत्ति खरीदने पर रजिस्ट्री का खर्च भी बढ़ जाता है, जिससे कुल खरीद लागत में इजाफा होता है।
50 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी पर सरकार का फैसला
बैठक में तय किया गया कि जिन क्षेत्रों में डीएलसी दरों में 50 प्रतिशत से कम वृद्धि का प्रस्ताव है, उन्हें जिला स्तर पर मंजूरी मिलने के बाद सात दिनों के भीतर लागू कर दिया जाएगा।
हालांकि, जहां 50 प्रतिशत या उससे अधिक वृद्धि का प्रस्ताव है, वहां अंतिम निर्णय राज्य सरकार करेगी। इसी प्रकार डीएलसी दरों में कमी से जुड़े प्रस्तावों पर भी अंतिम फैसला राज्य सरकार के स्तर पर लिया जाएगा।
संपत्ति बाजार पर पड़ेगा असर
नई डीएलसी दरें लागू होने के बाद जयपुर में भूमि और संपत्तियों की खरीद-फरोख्त महंगी हो जाएगी। इससे स्टांप शुल्क, रजिस्ट्रेशन शुल्क और संपत्ति खरीदने की कुल लागत बढ़ सकती है। वहीं, रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में नई दरें बाजार मूल्य के अनुरूप होंगी, जबकि खरीदारों को अतिरिक्त वित्तीय योजना बनानी पड़ सकती है।
