जेजेएम घोटाला: पूर्व मंत्री महेश जोशी और पूर्व ACS सुबोध अग्रवाल समेत 13 आरोपियों की न्यायिक हिरासत 1 जून तक बढ़ी

जयपुर | राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में जेल की हवा खा रहे रसूखदारों को फिलहाल कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) मामलों की विशेष कोर्ट ने जेजेएम घोटाले से जुड़े मामले में पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी, पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) सुबोध अग्रवाल सहित 13 हाई-प्रोफाइल आरोपियों की न्यायिक हिरासत अवधि (Judicial Custody) 1 जून तक के लिए बढ़ा दी है।

सुरक्षा और न्यायिक प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए एसीबी कोर्ट ने यह अहम आदेश सभी आरोपियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए हुई पेशी के दौरान दिया।

एसीबी की गिरफ्त में आए इन 13 आरोपियों को अभी और दिन सलाखों के पीछे गुजारने होंगे, जबकि 3 अन्य को कोर्ट ने पहले ही भगोड़ा घोषित कर दिया है:

जिनकी न्यायिक हिरासत बढ़ी (13 आरोपी)- महेश जोशी (पूर्व मंत्री), सुबोध अग्रवाल (पूर्व ACS), दिनेश गोयल, कृष्णदीप गुप्ता, शुभांशु दीक्षित, सुशील शर्मा, विशाल सक्सेना, अरुण श्रीवास्तव, डीके गौड़, महेंद्र प्रकाश सोनी, मुकेश पाठक, निरिल कुमार और संजय बड़ाया।

फरार घोषित (3 आरोपी)- जितेंद्र शर्मा, मुकेश गोयल और संजीव गुप्ता (इन्हें कोर्ट पहले ही भगोड़ा घोषित कर चुकी है)

क्या है पूरा JJM घोटाला? (बैकग्राउंड)

जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल से जल पहुंचाने की योजना में हुए इस महाघोटाले की परतें काफी गहरी हैं:

  • फर्जीवाड़े का खेल (2021): जांच में सामने आया कि वर्ष 2021 में जेजेएम के तहत करोड़ों रुपये के टेंडर हथियाने के लिए श्री श्याम ट्यूबवेल और श्री गणपति ट्यूबवेल के संचालकों ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों (Fake Experience Certificates) का इस्तेमाल किया था।
  • ACB की एंट्री: इस फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ होने के बाद एसीबी ने मामले की प्रारंभिक जांच की और 30 अक्टूबर 2024 को आधिकारिक रूप से एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी।

ED की भी हो चुकी है एंट्री

इस महाघोटाले में केवल एसीबी ही नहीं, बल्कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के तहत समानांतर जांच कर रहा है। इससे पहले ईडी ने भी अपने स्तर पर मामला दर्ज कर पूर्व मंत्री महेश जोशी और संजय बड़ाया सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। हालांकि, बाद में महेश जोशी को ईडी के मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत (Bail) मिल गई थी, लेकिन एसीबी के जाल में वे अभी भी उलझे हुए हैं और उनकी न्यायिक हिरासत लगातार बढ़ाई जा रही है।

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