राजस्थान के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की औद्योगिक और शहरी तस्वीर को पूरी तरह बदलने के विधिक उद्देश्य से एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक प्रशासनिक कामयाबी सामने आई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के सतत नीतिगत प्रयासों और पड़ोसी राज्य हरियाणा के साथ किए गए प्रभावी समन्वय के चलते दिल्ली-गुरुग्राम-रेवाड़ी-SNB (शाहजहाँपुर-नीमराना-बहरोड़) रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर के राजस्थान खंड के क्रियान्वयन को एक विधिक मील का पत्थर हासिल हुआ है।
इस महत्वाकांक्षी सेमी-हाई-स्पीड रेल परियोजना के प्रथम चरण को अब आधिकारिक रूप से बहरोड़ तक विस्तारित करने की विधिक मंजूरी दे दी गई है। इसी के आधार पर दोनों राज्यों की तकनीकी विंग ने विस्तृत परियोजना लागत (DPR) और नए वित्तीय ढांचे (Financial Structure) को अंतिम विधिक रूप देने की कार्रवाई युद्धस्तर पर प्रारंभ कर दी है।
लागत साझेदारी का विधिक फॉर्मूला तय; हरियाणा सरकार उठाएगी बड़ा वित्तीय भार
इस अंतर-राज्यीय परियोजना के मार्ग में लंबे समय से लंबित लागत साझेदारी (Cost Sharing Formula) के विधिक विवाद को मुख्यमंत्री की सीधी मध्यस्थता के बाद सुलझा लिया गया है। दोनों राज्यों के मध्य हस्ताक्षरित नए विधिक समझौते के तहत:
- बावल से राजस्थान सीमा तक: हरियाणा के बावल से लेकर राजस्थान की भौगोलिक सीमा तक के रेल खंड की कुल परियोजना लागत का 50 प्रतिशत भाग हरियाणा सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
- राजस्थान सीमा से बहरोड़ तक: राजस्थान सीमा में प्रवेश करने के बाद से लेकर बहरोड़ टर्मिनल तक के खंड की शत-प्रतिशत सम्पूर्ण निर्माण और विधिक भू-अधिग्रहण लागत राजस्थान सरकार तथा उसकी संबद्ध नोडल संस्थाओं (जैसे रीको व यूडीएच) द्वारा वहन की जाएगी।
RRTS कॉरिडोर का सांख्यिकीय और भौगोलिक ढांचा
इस परियोजना के तकनीकी और सांख्यिकीय मानकों को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) के दिशा-निर्देशों के अनुसार निम्नलिखित रूप से श्रेणीबद्ध किया गया है:
- कुल लंबाई (Total Length): मुख्य कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 130 किलोमीटर होगी।
- कुल विकसित स्टेशन (Total Stations): संपूर्ण रूट पर आधुनिक सुख-सुविधाओं से युक्त कुल 19 स्टेशन विकसित किए जाएंगे।
- राजस्थान के विधिक स्टेशन: मरुधरा की सीमा के भीतर तीन प्रमुख रणनीतिक स्टेशन स्थापित किए जाने प्रस्तावित हैं— 1. शाहजहाँपुर, 2. नीमराना और 3. बहरोड़।
- यात्रा समय में अभूतपूर्व कटौती: इस परियोजना के विधिक रूप से पूर्ण होने पर नई दिल्ली के ‘सराय काले खाँ’ (Sarai Kale Khan) से राजस्थान के बहरोड़ तक की कुल दूरी महज 1 घंटे 50 मिनट में सुरक्षित रूप से पूरी की जा सकेगी।
औद्योगिक नेक्सस को मिलेगा विधिक बूस्ट; जापानी जोन और घीलोठ होंगे मालामाल
यह हाई-टेक परिवहन परियोजना राजस्थान के औद्योगिक विकास के इतिहास में गेमचेंजर साबित होने जा रही है। इस कॉरिडोर के सीधे जुड़ने से अलवर और कोटपुतली-बहरोड़ जिलों में स्थित मरुधरा के सबसे बड़े औद्योगिक क्लस्टर्स को सीधा विधिक लाभ मिलेगा। मुख्य रूप से शाहजहाँपुर औद्योगिक क्षेत्र, नीमराना का विश्वप्रसिद्ध जापानी ज़ोन (Japanese Zone), घीलोठ औद्योगिक क्षेत्र, और KBNIR (खुशखेड़ा-भिवाड़ी-नीमराना इनवेस्टमेंट रीजन) सीधे दिल्ली-एनसीआर के कोर इंफ्रास्ट्रक्चर से विधिक रूप से कनेक्ट हो जाएंगे।
औद्योगिक संघों के अनुसार, दिल्ली और आईजीआई एयरपोर्ट से कनेक्टिंग टाइम आधा रह जाने के कारण इस पूरे बेल्ट में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI), वैश्विक विनिर्माण इकाइयों की स्थापना, नए लॉजिस्टिक्स हब्स के विकास तथा कौशल विकास (Skill Development) को एक नई विधिक गति प्राप्त होगी।
लाखों युवाओं के लिए रोजगार और तीव्र सार्वजनिक परिवहन का विधिक उपहार
सचिवालय के उच्चाधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना केवल एक रेल लाइन नहीं, बल्कि मरुधरा के उभरते युवाओं के लिए रोजगार सृजन (Employment Generation) का महा-गलियारा है। तीव्र, सुरक्षित, वातानुकूलित और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिलने से दिल्ली-गुरुग्राम में काम करने वाले पेशेवर और तकनीकी विशेषज्ञ अब नीमराना-बहरोड़ को अपना आवासीय बेस बना सकेंगे, जिससे इस पूरे ग्रामीण-शहरी बेल्ट में सुनियोजित शहरीकरण (Urbanization) और रियल एस्टेट को भारी बूम मिलेगा। राज्य सरकार ने आयोजना और वित्त विभाग को इस प्रोजेक्ट के लिए आवश्यक बजटीय राशि को ‘ग्रीन चैनल’ के माध्यम से तत्काल विधिक रूप से रिलीज करने के कड़े आदेश जारी किए हैं।