बीकानेर पीबीएम प्रसूता मामले पर मची भारी सियासी रार; सांसद हनुमान बेनीवाल का भजनलाल सरकार पर तीखा हमला

बीकानेर। बीकानेर के सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज से संबद्ध पीबीएम (PBM) अस्पताल के जनाना वार्ड में सिजेरियन और सामान्य डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की किडनियां प्रभावित होने के विधिक मामले ने अब मरुधरा की सियासत में भारी उबाल ला दिया है। इस गंभीर मानवीय मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने भजनलाल सरकार की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था को विधिक कटघरे में खड़ा करते हुए तीखा हमला बोला है। बेनीवाल के आरोपों के बाद डैमेज कंट्रोल में उतरे सूबे के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने मंगलवार को जयपुर में एक उच्च स्तरीय विधिक स्थिति रिपोर्ट पेश की। मंत्री ने स्पष्ट किया कि बीकानेर के सभी मरीज एक साथ नहीं, बल्कि अलग-अलग तारीखों और अलग-अलग चिकित्सकीय परिस्थितियों में अस्पताल में भर्ती हुए थे, इसलिए इसे कोई सामूहिक लापरवाही या महामारी के रूप में देखकर भय का माहौल नहीं बनाया जाना चाहिए।

“केवल कमेटियां बनाकर जिम्मेदारी से बच रही सरकार” — हनुमान बेनीवाल

नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए विधिक जवाबदेही तय करने की मांग की। बेनीवाल ने अपने आधिकारिक बयान में कहा:

“कोटा मेडिकल कॉलेज में प्रसूताओं की संदेहास्पद मौतों के घाव अभी भरे भी नहीं थे कि बीकानेर में आधा दर्जन माताओं की किडनियां खराब होने की खबर ने सरकारी स्वास्थ्य मॉडल की पोल खोल दी है। मुख्यमंत्री और चिकित्सा मंत्री बताएं कि आखिर कब तक हर बड़े हादसे के बाद केवल कागजी जांच समितियां बनाकर जिम्मेदारियों से बचा जाएगा? जब गरीब मरीज आईसीयू और वेंटिलेटर पर पहुंच जाता है, तब प्रशासन जागता है। सरकार विज्ञापनों में तो बेहतर स्वास्थ्य मॉडल का ढिंढोरा पीटती है, जबकि धरातल पर प्रसूताएं और उनके परिजन डर के साए में इलाज कराने को मजबूर हैं। इस घोर कैजुअल एटीट्यूड की विधिक जिम्मेदारी तय कर दोषियों पर तत्काल आपराधिक केस दर्ज होना चाहिए।”

चिकित्सा मंत्री का विधिक पक्ष: बीकानेर में 5 केस, अधिकांश की हालत स्थिर

सांसद बेनीवाल के हमलों पर पलटवार करते हुए और वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने बताया कि बीकानेर में घबराने जैसी कोई विधिक स्थिति नहीं है। उन्होंने विभाग के सांख्यिकीय आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा:

  • मरीजों का वर्गीकरण: कुल पांच प्रमुख मामलों की विधिक समीक्षा की जा रही है, जिनमें से तीन सिजेरियन ऑपरेशन (Cesarean Delivery) और दो नॉर्मल डिलीवरी (सामान्य प्रसव) के केस हैं।
  • क्लीनिकल हिस्ट्री: ये सभी महिलाएं अलग-अलग दिनों में भर्ती हुई थीं और इनमें से कुछ प्रसूताएं प्रसव से पहले ही अत्यधिक जटिल चिकित्सकीय परिस्थितियों (Pre-existing complications) से ग्रसित थीं।
  • मौसम का असर: पश्चिमी राजस्थान में जारी भीषण गर्मी और डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) भी इन मरीजों में ‘एक्यूट किडनी इंजरी’ को ट्रिगर करने का एक बड़ा विधिक व वैज्ञानिक फैक्टर रहा है।
  • वर्तमान स्थिति: राहत की बात यह है कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में अधिकांश मरीजों की डायलिसिस की विधिक आवश्यकता अब लगभग समाप्त हो चुकी है और उनकी सेहत में तेजी से विधिक सुधार हो रहा है। जोधपुर संभाग से एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम को विस्तृत फॉरेंसिक और क्लीनिकल ऑडिट के लिए बीकानेर पीबीएम भेजा गया है।

कोटा कांड का खौफनाक सच: जीवन रक्षक इंजेक्शन की वायल में मिला सिर्फ पानी!

चिकित्सा मंत्री खींवसर ने बीकानेर और कोटा मामलों की तुलना को विधिक रूप से खारिज करते हुए एक बेहद सनसनीखेज और डराने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि कोटा मेडिकल कॉलेज में प्रसूताओं की मौत के मामले की जो विधिक और फॉरेंसिक जांच चल रही है, उसमें एक बड़ा दवा घोटाला सामने आया है।

प्रसव के बाद महिलाओं के अत्यधिक रक्तस्राव (Post-Delivery Bleeding) को रोकने के लिए अस्पताल प्रशासन द्वारा ‘लोकल परचेज’ (स्थानीय खरीद) के जरिए जो जीवन रक्षक इंजेक्शन खरीदे और लगाए गए थे, उनकी जांच ड्रग कंट्रोल विंग ने की है। विधिक जांच में सामने आया है कि उस इंजेक्शन की वायल (शीशी) में आवश्यक जीवन रक्षक दवा की जगह महज पानी (Distilled Water) भरा हुआ था। दवा की इस गंभीर गुणवत्ता खामी और जालसाजी को प्रसूताओं की मौत का मुख्य विधिक कारण माना जा रहा है।

36 हजार करोड़ का बजट और थर्ड पार्टी विजिलेंस का नया सिक्योरिटी मॉडल

मंत्री ने बताया कि कोटा मामले में एम्स (AIIMS), ड्रग कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन और एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी सहित विभिन्न विधिक स्तरों से 56 बिंदुओं की विस्तृत ऑडिट रिपोर्ट मांगी गई है, जो आज शाम तक पूरी तरह सचिवालय को सौंप दी जाएगी। उन्होंने स्वीकार किया कि राजस्थान जैसे विशाल राज्य में लगभग 23 हजार सरकारी स्वास्थ्य इकाइयों की गुणवत्ता की लाइव मॉनिटरिंग करना एक बहुत बड़ी विधिक व प्रशासनिक चुनौती है।

इसी कारण अब सरकार एक बड़े नीतिगत और विधिक सुधार पर विचार कर रही है, जिसके तहत सरकारी अस्पतालों की दवाओं, ओटी इंफेक्शन और डॉक्टरों की कार्यप्रणाली की आकस्मिक जांच के लिए एक निजी थर्ड पार्टी विजिलेंस एजेंसी (Private Third-Party Agency) को तैनात किया जाएगा। मुख्यमंत्री द्वारा स्वास्थ्य बजट के रूप में रिकॉर्ड 36 हजार करोड़ रुपये की भारी विधिक राशि उपलब्ध कराई गई है। मंत्री ने साफ लहजे में चेतावनी दी कि दवा सप्लायर हो या अस्पताल के डॉक्टर, जिसकी भी लापरवाही या कैजुअल एटीट्यूड इस विधिक जांच रिपोर्ट में साबित होगा, उसे सीधे जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

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