-IAS ललित गोयल के तबादले के बाद दबा दी गई थी 631 फर्जी प्लॉटों की लिस्ट; मोहन-सोहन जैसे डमी नामों के जरिए पटेल नगर व तिलक नगर के प्राइम प्लॉट हड़पने का खेल उजागर
जयपुर/भीलवाड़ा। नगर विकास न्यास (UIT) भीलवाड़ा में बेशकीमती जमीनों के फर्जीवाड़े और 950 भूखंडों के बहुचर्चित घोटाले में अब परतें और तेजी से खुलने लगी हैं। डबल लॉक में रखे प्रॉपर्टी रजिस्टर में पेंसिल से फर्जी एंट्रियां कर भूमाफियाओं के इशारे पर ‘मोहन-सोहन’ जैसे डमी नामों पर 15-15 भूखंड चढ़ाने का काला खेल सामने आने के बाद अब प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
तत्कालीन सचिव ने 319 प्लॉट किए थे निरस्त, तबादला होते ही फाइलों पर बैठ गए बाबू:-
इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन यूआईटी सचिव (IAS) ललित गोयल ने गड़बड़ी पकड़ में आने के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए 319 संदिग्ध भूखंडों को तत्काल निरस्त करने के आदेश जारी किए थे और रजिस्टर में निरस्तीकरण की सील भी लगवाई थी। इसके साथ ही करीब 631 अन्य ऐसे भूखंड भी चिन्हित किए गए थे, जिनके न तो वास्तविक मालिक का पता था और न ही कोई वैध दस्तावेज। इनकी सूचियां भी तैयार थीं, लेकिन जैसे ही सचिव ललित गोयल का तबादला हुआ, भूखंड शाखा के भ्रष्ट बाबुओं और संविदाकर्मियों ने फाइलों को ठंडे बस्ते में दबा दिया। हैरानी की बात यह रही कि ओएसडी को जानकारी होने के बावजूद बचे हुए 631 भूखंडों को निरस्त करने की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया गया।
नीलामी के लिए प्लॉट तलाशे तब खुला ‘डमी नामों’ का राज:-
यह पूरा फर्जीवाड़ा तब उजागर हुआ जब आम जनता ने पटेल नगर और तिलक नगर में खाली पड़े भूखंडों को नीलामी में रखने के लिए आवेदन किया। जब यूआईटी ने रिकॉर्ड खंगाला तो पता चला कि जो भूखंड मौके पर सालों से खाली पड़े हैं, वे रजिस्टर में पहले से ही दर्ज हैं। जांच में सामने आया कि तिलक नगर के 117 प्लॉट सहित पटेल नगर, पटेल नगर विस्तार और बापू नगर जैसी सात पॉश कॉलोनियों के प्राइम भूखंडों पर भूमाफियाओं के इशारे पर डुप्लीकेट और फर्जी प्रविष्टियां की गई थीं। जब जेईएन और एईएन ने मौका मुआयना कर स्थानीय लोगों से पूछताछ की, तो रिकॉर्ड में दर्ज नामों वाले व्यक्तियों का इलाके में कोई वजूद ही नहीं मिला।
सालों से एक ही कुर्सी पर जमे बाबू और संविदाकर्मियों की मनमर्जी:-
यूआईटी में बार-बार फाइलें गायब होने और रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की जड़ में वर्षों से एक ही शाखा में जमे बाबू और संविदाकर्मी हैं। कई कर्मचारी तो ऐसे हैं जिन पर पूर्व में भी कार्रवाई हुई, लेकिन रसूख के दम पर वे दोबारा उसी सीट पर आकर बैठ गए। उच्चाधिकारियों की लचर मॉनिटरिंग के चलते संविदाकर्मियों और बाबुओं की मिलीभगत से रिकॉर्ड रूम से ओरिजिनल प्रॉपर्टी रजिस्टर लीक कर भूमाफियाओं के लिए नई फाइलें तैयार करने का रैकेट बेखौफ चलता रहा।
“यूआईटी के रिकॉर्ड में फर्जी नामों से प्लॉट दर्ज करना अत्यंत गंभीर मामला है। यह प्लॉट रिकॉर्ड में कब, कैसे और किसने चढ़ाए—इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जो 631 भूखंड अभी तक निरस्त नहीं हुए हैं, उनकी विस्तृत रिपोर्ट लेकर आम सूचना (पब्लिक नोटिस) जारी की जाएगी और उन्हें तुरंत प्रभाव से निरस्त किया जाएगा। गायब फाइलों की भी पड़ताल शुरू कर दी गई है, इस धांधली में शामिल किसी भी दोषी कर्मचारी व अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।”
— सालुंखे गौरव रवींद्र, आईएएस एवं सचिव, यूआईटी भीलवाड़ा
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now