जयपुर। राजस्थान में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) से जुड़े ठेकेदारों ने लंबित भुगतान और आठ सूत्रीय मांगों के समाधान को लेकर बड़ा आंदोलनात्मक फैसला लिया है। ऑल राजस्थान PHED कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन और संघर्ष समिति ने जलापूर्ति व्यवस्था सहित समस्त जल परियोजनाओं के कार्य चरणबद्ध तरीके से बंद करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय 8 सितंबर 2026 को जारी पत्र में घोषित किया गया है।
संघर्ष समिति के अनुसार प्रदेश के ठेकेदारों का लगभग तीन वर्षों से बकाया भुगतान लंबित है। इन भुगतान संबंधी समस्याओं और आठ सूत्रीय मांगों के समाधान के लिए पिछले करीब छह महीनों से शासन और विभाग के साथ लगातार वार्ताएं की गईं। पत्र में दावा किया गया है कि इस दौरान दो बार लिखित समझौता वार्ता भी हुई, लेकिन इसके बावजूद समस्याओं के समाधान के लिए अब तक कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
ठेकेदारों का कहना है कि लगातार आश्वासन और वार्ताओं के बावजूद भुगतान नहीं होने के कारण प्रदेश के ठेकेदार गंभीर आर्थिक परिस्थितियों से गुजर रहे हैं। इसी स्थिति के चलते संघर्ष समिति ने अब संगठित और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने का फैसला लिया है।
9 सितंबर से चरणबद्ध कार्यबंदी
संघर्ष समिति की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार कार्यबंदी चरणबद्ध तरीके से लागू होगी।
- 9 सितंबर 2026: सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक — 3 घंटे कार्यबंदी
- 10 सितंबर 2026: सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक — 6 घंटे कार्यबंदी
- 11 सितंबर 2026: सुबह 11 बजे से रात 11 बजे तक — 12 घंटे कार्यबंदी
- 12 सितंबर 2026 से: जलापूर्ति व्यवस्था सहित समस्त कार्य पूर्ण रूप से बंद किए जाएंगे।
संघर्ष समिति ने प्रदेश के सभी ठेकेदारों से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पूर्ण एकजुटता और अनुशासन के साथ कार्यबंदी में शामिल होने का आह्वान किया है। प्रत्येक फर्म को जलापूर्ति व्यवस्था सहित अपने सभी कार्य बंद रखने की लिखित सूचना संबंधित विभागीय अधिकारियों को तत्काल भेजने और उसकी प्रति संघर्ष समिति को उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
कई जिलों में जल परियोजनाओं पर असर की संभावना
एक अन्य संबंधित सूचना में M/s Dara Engineering & Infrastructures Pvt. Ltd. ने PHED के विभिन्न प्रोजेक्ट और डिवीजनों को कार्यबंदी के संबंध में सूचना दी है। इसमें जोधपुर, जालोर, पाली, फलोदी, बाड़मेर, जैसलमेर, उदयपुर, अजमेर, भरतपुर, कोटा, बूंदी, झालावाड़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर सहित कई क्षेत्रों के विभागीय अधिकारियों को संबोधित किया गया है।
सूचना में कहा गया है कि बकाया भुगतान और आठ सूत्रीय मांगों के समाधान को लेकर विभागीय स्तर पर भी लगभग छह माह से वार्ताएं चल रही हैं। ठेकेदारों के अनुसार भुगतान नहीं होने और गंभीर वित्तीय परिस्थितियों के कारण फर्म के कर्मचारी, ऑपरेटर और श्रमिक भी काम छोड़कर जा रहे हैं।
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि उसके क्षेत्र में संचालित निर्माण कार्य, जल परियोजनाएं और O&M (Operation & Maintenance) कार्य भी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बंद रहेंगे। सूचना में यह भी कहा गया है कि कार्यबंदी के कारण पेयजल आपूर्ति, परियोजना संचालन या अन्य किसी प्रकार की असुविधा उत्पन्न होती है तो उसकी जिम्मेदारी विभाग की होगी।
12 सितंबर से पूर्ण कार्यबंदी
सबसे अहम बात यह है कि 9 से 11 सितंबर तक कार्यबंदी की अवधि लगातार बढ़ाई जाएगी और 12 सितंबर से जलापूर्ति व्यवस्था समेत सभी संबंधित कार्य पूरी तरह बंद रखने का निर्णय लिया गया है। यह कार्यबंदी संघर्ष समिति के आगामी आदेश तक जारी रहने की बात पत्र में कही गई है।
संघर्ष समिति ने कहा है कि उसका उद्देश्य जनता को परेशान करना नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित भुगतान और आठ सूत्रीय मांगों का सम्मानजनक एवं स्थायी समाधान हासिल करना है। समिति ने ठेकेदारों की एकजुटता को आंदोलन की ताकत बताते हुए सभी से सहयोग की अपील की है।
ऐसे में यदि 12 सितंबर से प्रस्तावित पूर्ण कार्यबंदी लागू रहती है, तो जलापूर्ति व्यवस्था और विभिन्न जल परियोजनाओं के संचालन पर इसका असर पड़ने की स्थिति बन सकती है। हालांकि, उपलब्ध दस्तावेजों में सरकार या PHED की ओर से इस कार्यबंदी के संबंध में कोई जवाब/प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।