थार खुद कातिल नहीं, पर कातिल कौन? जयपुर में बेलगाम ड्राइविंग, अवैध मॉडिफिकेशन और दबंगई का खतरनाक कॉकटेल
जयपुर। सड़क पर दौड़ती चौड़े टायर, ऊंची बॉडी और तेज रफ्तार वाली थार कभी स्टाइल, एडवेंचर और रुतबे की पहचान मानी जाती थी। लेकिन आज जयपुर की सड़कों पर यह एसयूवी कई गंभीर और जानलेवा हादसों के केंद्र में आ चुकी है। वाहन अपने आप में दुर्घटना का कारण नहीं होता, लेकिन बेलगाम रफ्तार, नशे में ड्राइविंग, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी, अवैध मॉडिफिकेशन और स्टंटबाजी के चलते यह गाड़ी आम राहगीरों के लिए खौफ का पर्याय बनती जा रही है।
2024 से सितंबर 2026 के बीच सामने आए मामलों के अनुसार, जयपुर शहर और आसपास के इलाकों में थार से जुड़े गंभीर हादसों में कम से कम 16 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

दो साल के प्रमुख खौफनाक हादसे
| दिनांक / समय | स्थान | घटना का विवरण | नुकसान |
| 26 फरवरी 2024 | न्यू सांगानेर रोड, मानसरोवर | तेज रफ्तार थार ने आगे चल रहे ऑटो को टक्कर मारी। चालक व साथी फरार। | 2 की मौत, 4 घायल |
| 16 मई 2024 | जमवारामगढ़ | थार और बोलेरो के बीच भीषण आमने-सामने की भिड़ंत। | 5 की मौत, 9 घायल |
| अक्टूबर 2024 | मानसरोवर | अनियंत्रित थार ने पैदल चल रहे परिवार को कुचला। चालक गिरफ्तार। | महिला और 2 बच्चों की मौत |
| 22 अक्टूबर 2025 | रामपुरा पुलिया, चौमूं (NH-52) | ओवरस्पीड थार ने तीन बाइकों को रौंदा। चालक मौके से भागा। | एक ही परिवार के 4 की मौत, 3 घायल |
| दिसंबर 2025 | विधानसभा के पास | लाल रंग की थार ने 2 बाइक और स्कूटी को टक्कर मारी। 18 वर्षीय चालक पकड़ा गया। | 1 युवक (पारस व्यास) की मौत, 1 गंभीर |
| दिसंबर 2025 | निवारू रोड | तेज रफ्तार थार ने बाइक सवार दंपति और रिश्तेदार को टक्कर मारी। | 3 लोग घायल |
| 22 जनवरी 2026 | जयपुर-दिल्ली हाईवे | एयरफोर्स भर्ती की तैयारी कर रही 18 वर्षीय छात्रा को थार ने कुचला। | 1 छात्रा (अनाया शर्मा) की मौत |
| 18 मार्च 2026 | भड़ाला कट, गोविंदगढ़ | गलत दिशा से आ रही थार ने स्कूटी को टक्कर मारी। | पिता-पुत्र की मौत, 1 बच्चा घायल |
| 22 अगस्त 2026 | जयपुर | थार ने स्कूटी सवार बुजुर्ग को टक्कर मार 50 मीटर तक घसीटा। | 1 बुजुर्ग (छाजू सिंह) की मौत |
| 31 अगस्त 2026 | मानसरोवर मेट्रो स्टेशन | लाल बत्ती तोड़कर थार ने कार व ई-रिक्शा को टक्कर मारी। रिक्शा 50 फीट उछला। | 3 लोग गंभीर रूप से घायल |

सवाल: क्या थार दोषी है या उसके पीछे का ‘ड्राइविंग कल्चर’?
हादसों के पैटर्न से स्पष्ट है कि समस्या वाहन के डिजाइन से ज्यादा उसके गलत इस्तेमाल की है:
- दबंगई और ओवरस्पीडिंग: थार के भारी वजन और ऊंची ग्राउंड क्लीयरेंस के चलते टक्कर का असर सामने वाले छोटे वाहनों (बाइक, स्कूटी, ऑटो) पर अत्यधिक घातक होता है।
- अवैध मॉडिफिकेशन: सामान्य से बड़े और बाहर निकले टायर, मेटल बंपर (बुलबार), और डार्क टिंटेड ग्लास (काली फिल्म) मोटर वाहन नियमों का उल्लंघन करने के साथ-साथ वाहन के संतुलन और ब्रेकिंग क्षमता को प्रभावित करते हैं।
- हिट एंड रन की प्रवृत्ति: अधिकांश मामलों में हादसे के बाद चालक घायलों की मदद करने के बजाय मौके से वाहन छोड़कर या भगाकर फरार हो जाते हैं।

पुलिस भी अब मॉडिफाइड थार पर कस रही शिकंजा
जयपुर ट्रैफिक पुलिस ने जून 2026 में अवैध रूप से मॉडिफाइड वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया। एक कार्रवाई में 41 वाहन जब्त और 65 वाहनों के चालान किए गए। झोटवाड़ा में जब्त 15 वाहनों में चार थार और 11 स्कॉर्पियो शामिल थीं। इनमें काली फिल्म, मॉडिफाइड बंपर और सामान्य से बड़े टायर जैसी खामियां बताई गईं
परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस ने संयुक्त अभियान में शहर के टोल प्लाजा पर भी कार्रवाई की। एक दिन में 1,000 से अधिक वाहन जांचे गए और 200 से ज्यादा चालान किए गए। अभियान में बिना नंबर प्लेट, अनधिकृत मॉडिफिकेशन और अन्य उल्लंघनों पर कार्रवाई का लक्ष्य रखा गया।


लेकिन असली चुनौती चालान नहीं, ‘ड्राइविंग कल्चर’ है
सवाल यह नहीं कि “थार पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?” बल्कि सवाल यह है कि जो चालक थार को सड़क पर स्टंट, रफ्तार और दबंगई का माध्यम बना रहे हैं, उन पर लगातार निगरानी क्यों नहीं हो?
विशेषकर युवा चालकों, बार-बार ओवरस्पीडिंग करने वाले वाहनों और ऐसे वाहनों पर निगरानी जरूरी है जिनके खिलाफ लगातार चालान हो रहे हैं। एक मामले में जिस थार से नगर कीर्तन में टक्कर हुई थी, उसके ओवरस्पीडिंग के कई पुराने चालान सामने आए थे। यानी सिर्फ चालान काटना पर्याप्त नहीं—बार-बार नियम तोड़ने वाले वाहन और चालक का जोखिम प्रोफाइल बनाना जरूरी है।
सड़क सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम
- एएनपीआर (ANPR) और स्पीड रडार: शहर के प्रमुख चौराहों और हाईवे पर हाई-स्पीड कैमरों से निगरानी बढ़ाई जाए।
- रिपीट ऑफेंडर्स पर सख्त कार्रवाई: जिन वाहनों के लगातार ओवरस्पीडिंग या सिग्नल जंप के चालान कट रहे हैं, उनके चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस तत्काल निलंबित या रद्द किए जाएं।
- मॉडिफिकेशन वर्कशॉप्स पर रोक: वाहनों में अवैध बदलाव करने वाले गैरेज और एक्सेसरी दुकानों पर नियमन लागू हो।
- नाबालिग चालकों पर शिकंजा: स्कूल-कॉलेज क्षेत्रों में बिना वैध लाइसेंस गाड़ी चलाने वालों और वाहन मालिकों पर सीधे कानूनी केस दर्ज किए जाएं।
थार नहीं, ‘दुरुपयोग’ है असली खतरा
थार एक वाहन है और सुरक्षित तरीके से चलाए जाने पर कोई भी SUV सामान्य यातायात का हिस्सा है। लेकिन जब यही वाहन रफ्तार, स्टंट, दिखावे, शराब, गलत दिशा, लाल बत्ती तोड़ने या दबंग ड्राइविंग का हथियार बन जाए, तो सड़क पर बाकी लोगों की जिंदगी खतरे में पड़ जाती है।
जयपुर के सामने चुनौती इसलिए बड़ी है क्योंकि एक थार हादसे में सिर्फ एक वाहन नहीं टकराता—उसकी ऊंचाई, वजन और रफ्तार के कारण सामने मौजूद बाइक, स्कूटी या ऑटो सवार के लिए परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं।
दो साल के रिकॉर्ड से साफ है—थार को सड़क से हटाने की जरूरत नहीं, लेकिन थार के नाम पर होने वाली बेलगाम ड्राइविंग पर लगाम लगाने की जरूरत जरूर है और इसके लिए पुलिस की कार्रवाई हादसे के बाद नहीं, बल्कि हादसे से पहले शुरू होनी चाहिए।