राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा की काली करतूतों का एक और बड़ा अध्याय खुला है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की जांच में सामने आया है कि कटारा ने स्कूल व्याख्याता (कृषि विज्ञान) भर्ती परीक्षा-2022 का पेपर 60 लाख रुपए में बेचा था। चौंकाने वाली बात यह है कि कटारा ने नकदी के साथ-साथ अपने भांजे के लिए भूगोल विषय का पेपर भी ‘घूस’ के तौर पर मांगा था।
SOG ने बाबूलाल कटारा, उसके भांजे विजय डामोर और मुख्य सरगना अनिल उर्फ शेर सिंह मीणा को रविवार को गिरफ्तार किया। कटारा की यह चौथी गिरफ्तारी है, जो आयोग की चयन प्रक्रिया में गहरी सेंधमारी को दर्शाती है।
NEET-2026: 150 पेज की पीडीएफ और “गैस पेपर” का सच
एडीजी विशाल बंसल ने नीट परीक्षा को लेकर भी गंभीर खुलासे किए हैं। उनके अनुसार, नीट-2026 का एक कथित “गैस पेपर” (150 पेज की पीडीएफ) परीक्षा से करीब एक महीने पहले ही छात्रों के बीच घूम रहा था।
- दावा: इस गैस पेपर से केमेस्ट्री के 410 में से 120 सवाल आने की बात कही जा रही है।
- जांच: एसओजी अब इस पीडीएफ के स्रोत और देहरादून से जुड़े संदिग्ध संपर्कों की पड़ताल कर रही है। फिलहाल इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
ऐसे खुली पोल: फर्जी मार्कशीट से ‘टॉपर्स’ तक पहुँची SOG
जांच की शुरुआत जयपुर के फागी स्थित एक स्कूल से हुई, जहाँ अनिता चौधरी ने ओपीजेएस यूनिवर्सिटी से बैकडेट की फर्जी मार्कशीट लगाकर नौकरी पाई थी।
- अनिता के फरार होने के बाद जांच का दायरा बढ़ा तो सीकर के दिवराला में कार्यरत अशोक यादव एसओजी के हत्थे चढ़ा।
- अशोक का फर्जीवाड़ा: अशोक ने मेरिट में तीसरा स्थान हासिल किया था, जबकि उसके पास आवश्यक शैक्षणिक योग्यता ही नहीं थी। उसने ओपीजेएस विश्वविद्यालय से फर्जी मार्कशीट बनवाई थी।
नंबरों का गणित: जहाँ से शुरू हुआ शक
अशोक यादव के परीक्षा परिणामों ने एसओजी के संदेह को पुख्ता किया:
- जीके पेपर: 150 में से केवल 68 अंक।
- कृषि विज्ञान: 300 में से 239 अंक (असामान्य अंतर)। एसओजी के अनुसार, 280 पदों के मुकाबले केवल 55 अभ्यर्थी ही पास हुए थे, जिनमें अशोक का स्कोर संदिग्ध था।
60 लाख की डील और सरकारी आवास पर ‘लिखाई’
पूछताछ में सामने आया कि अशोक ने विनोद रेवाड़ से 7 लाख में सॉल्वड पेपर खरीदा था। यह पेपर उसे अनिल उर्फ शेर सिंह मीणा से मिला था। शेर सिंह ने कुबूल किया कि उसे यह पेपर तत्कालीन RPSC मेंबर बाबूलाल कटारा ने 60 लाख रुपए में दिया था।
- साजिश का केंद्र: कटारा प्रश्नपत्र अपने सरकारी आवास पर ले गया, जहाँ उसके भांजे विजय डामोर ने उसे रजिस्टर में लिखा और बाद में शेर सिंह को थमा दिया।
भांजे के लिए भूगोल की शर्त
बाबूलाल कटारा का भांजा विजय डामोर भूगोल विषय का अभ्यर्थी था। चूंकि भूगोल का पेपर कटारा के पास नहीं था, इसलिए उन्होंने शेर सिंह से डील की कि 60 लाख रुपए के अलावा उसे भूगोल और जीके का पेपर भी चाहिए। हालांकि, शेर सिंह ने पेपर विजय के मोबाइल पर भेजा, लेकिन विजय ने उसे देखा नहीं और बिना पेपर देखे ही केंद्र में प्रवेश कर गया।
माफिया नेटवर्क और करोड़ों की वसूली
अनिल उर्फ शेर सिंह मीणा ने पेपर की कॉपियां गिरोह के अन्य सदस्यों—भूपेंद्र सारण और सुरेश ढाका को दीं। इसके माध्यम से प्रदेशभर के अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपए वसूले गए। ADG विशाल बंसल ने स्पष्ट किया कि यह मामला प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर गंभीर हमला है और इसमें शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
