जयपुर, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान के सुदूर जनजातीय अंचलों में शिक्षा की एक नई अलख जाग रही है। राज्य में संचालित 31 एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल (EMRS) न केवल शिक्षा के केंद्र बन गए हैं, बल्कि वे अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के बच्चों के लिए सामाजिक सुरक्षा और सुनहरे भविष्य की उम्मीद बन गए हैं।
शिक्षा के साथ सपनों को नई उड़ान
वर्तमान में इन विद्यालयों में 11,619 छात्र-छात्राएं (6,710 बालक और 4,909 बालिकाएं) अध्ययनरत हैं। शिक्षा के प्रति बढ़ते भरोसे का प्रमाण यह है कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 में पिछले वर्ष के मुकाबले 1,620 अधिक विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है।
“AI, कंप्यूटर लैब और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जैसे नवाचार अब जनजातीय बालकों के जीवन में नए रंग भर रहे हैं।”
सफलता की कहानियाँ: अभावों से एमबीबीएस तक
इन विद्यालयों ने कई ऐसे सितारे दिए हैं जिन्होंने गरीबी को मात देकर सफलता की इबारत लिखी है:
- राजकुमारी मीना (सवाई माधोपुर): किसान की बेटी, आज भावनगर मेडिकल कॉलेज से MBBS कर रही हैं।
- अनिकेश मीना (करौली): नादौती के पास के गांव के रहने वाले अनिकेश अब पश्चिम बंगाल के डायमंड हार्बर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर बनने की पढ़ाई कर रहे हैं।
- मोहनलाल मीना (जयपुर): जिनके पिता गुजरात में मजदूरी करते हैं, वे आज फरीदकोट (पंजाब) के मेडिकल कॉलेज में MBBS छात्र हैं।
ईएमआरएस की प्रमुख विशेषताएं और सुविधाएं
- नि:शुल्क व्यवस्था: आवास, भोजन, पाठ्यपुस्तकें और दैनिक उपयोग की सामग्री (जूते-मौजे आदि) पूरी तरह मुफ्त।
- आधुनिक लैब: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), वर्चुअल रियलिटी, ऑटोमोटिव और एग्रीकल्चर स्किल्स के लिए विशेष लैब्स।
- करियर मार्गदर्शन: टाटा मोटर्स के सहयोग से ‘इनेबल’ कार्यक्रम के तहत NEET और IIT-JEE की ऑनलाइन कोचिंग।
- खेल और संस्कृति: राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं (राउरकेला, ओडिशा) और सांस्कृतिक फेस्ट (गोरखपुर, यूपी) में छात्रों ने कई पदक जीते हैं।
31वां विद्यालय: जमवारामगढ़ में नई शुरुआत
राजस्थान स्टेट एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल सोसायटी द्वारा जून 2025 से जयपुर के जमवारामगढ़ में राज्य का 31वां नवीनतम विद्यालय शुरू किया गया है, जो इस क्षेत्र के जनजातीय बच्चों के लिए वरदान साबित होगा।
