राजस्थान में खेजड़ी की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध! 11 दिन के आंदोलन के बाद झुकी सरकार, बजट सत्र में आएगा ‘ट्री प्रोटेक्शन लॉ’

Ravindar Kumar
3 Min Read

बीकानेर: राजस्थान के राज्य वृक्ष ‘खेजड़ी’ (Khejri) को बचाने के लिए बीकानेर में चल रहा ऐतिहासिक संघर्ष रंग लाया है। बीकानेर जिला कलेक्ट्रेट पर पिछले 11 दिनों से जारी ‘पर्यावरण बचाओ महापड़ाव’ और भारी जनदबाव के आगे झुकते हुए राज्य सरकार ने गुरुवार रात बड़ा फैसला लिया। सरकार ने प्रदेश में खेजड़ी की कटाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है और इसी बजट सत्र में ‘ट्री प्रोटेक्शन एक्ट’ (Tree Protection Law) लाने की घोषणा की है।

गुरुवार रात करीब 10 बजे राज्यमंत्री के.के. विश्नोई, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारीलाल विश्नोई, फलोदी विधायक पब्बाराम विश्नोई और जीव-जंतु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष जसवंत सिंह विश्नोई महापड़ाव स्थल पहुंचे। उन्होंने राजस्व विभाग के सचिव डॉ. जोगाराम द्वारा जारी आदेश की प्रति मंच पर मौजूद संतों को सौंपी।

  • आदेश में क्या है: मुख्य सचिव के निर्देश पर जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जब तक ‘ट्री प्रोटेक्शन लॉ’ नहीं बन जाता, तब तक पूरे राजस्थान में खेजड़ी की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

आंदोलन स्थगित, लेकिन चेतावनी जारी

सरकारी आदेश मिलने के बाद आंदोलन की अगुवाई कर रहे स्वामी सच्चिदानंद ने रात करीब 11 बजे महापड़ाव को स्थगित करने की घोषणा की। हालांकि, उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “फिलहाल हम आंदोलन स्थगित कर रहे हैं। यदि नया कानून जनभावना के अनुरूप नहीं हुआ या उसमें कोई कमी रही, तो आंदोलन फिर शुरू किया जाएगा।” मंच पर ‘खेजड़ी और जीवों की रक्षा कौन करेगा… हम करेंगे’ के नारे गूंज उठे।

राज्यसभा में भी गूंजा मुद्दा

इससे पहले, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने संसद में खेजड़ी संरक्षण का मुद्दा उठाया। नियम 180 (विशेष उल्लेख) के तहत उन्होंने मांग की:

  • खेजड़ी, नीम, रोहिड़ा और पीपल जैसे मरुस्थलीय पौधों का संरक्षण हो।
  • मरुस्थल के लिए घातक बन चुकी विदेशी वनस्पति ‘विलायती बबूल’ (जूलिफ्लोरा) का चरणबद्ध तरीके से उन्मूलन किया जाए, क्योंकि यह भूजल और जैव विविधता को नुकसान पहुंचा रही है।

अमृता देवी बिश्नोई को याद किया

भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारीलाल विश्नोई ने कहा कि सैकड़ों वर्षों बाद मां अमृता देवी का पर्यावरण बचाने का संदेश बीकानेर से पूरे विश्व में गया है। 70 साल बाद कानून बनाने की अलख संत समाज ने जगाई है, जिसका सम्मान करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने यह निर्णय लिया है।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *